संगम नगरी प्रयागराज आए सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ एक बार फिर पीले वस्त्र वाले सतुआ बाबा नजर आए। सीएम के दौरे के दौरान सतुआ बाबा की हनक अलग ही नजर आई। एक महाकुंभ था जब सतुआ बाबा लगातार सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ दौरा करने पहुंच रहे थे। अब माघ मेला की तैयारियों के बीच भी सतुआ बाबा का अलग ही रंग देखने को मिला। एक तरह से सीएम के करीबी होने की हनक साफ नजर आई। पीले वस्त्र कंठी माला पहने सतुआ बाबा के आगे पीछे अफसरों की लाइन रही। हर कोई बाबा से हाथ मिलाने, उनके साथ चलने को अतुर रहा। माघ मेला में भी सतुआ बाबा की चलनी है, ऐसे में साधु संतों के अलावा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी बाबा की बाट जोहते नजर आए। आला पुलिस अधिकारी उनके साथ पैदल दौड़ते दिखते तेा उन्हें कार छोड़ने पहुंचे। सतुआ बाबा वाराणसी वाले श्री विष्णुस्वामी सम्प्रदायाचार्य के महामण्डलेश्वर संतोष दास जी महाराज को सतुआ बाबा के नाम से जाना जाता है। इस कर्यक्रम में सतुआ बाबा की हनक देखने को मिली, सतुआ बाबा बैठक से लेकर हर कार्यक्रम में योगी के करीब दिखे मुख्यमंत्री के स्वागत से लेकर गंगा आरती और बैठक हर कार्यक्रम में बेहद करीब दिखे। देखें तस्वीरें इस दौरान पुलिस अधिकारीयों को निर्देशित करते हुए भी नजर आए जिससे चर्चा का विषय है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हेलीकाप्टर तक छोड़ने भी गए। मुख्यमंत्री के साथ साथ हर जगह पीले वस्त्र में दिखने वाले बाबा की हनक पूरे कार्यक्रम में रही पूरे कार्यक्रम के दौरान आगे आगे लीड करते भी नजर आए। महाकुंभ 2025 के आयोजन से ठीक पहले इन्होंने मेला अधिकारी विजय किरण आनंद पर जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। महाकुंभ में सबसे बड़ा पंडाल इनका ही थ, सेक्टर 19 में इन्होंने एक रैन बसेरा भी बनवाया था। कौन हैं सतुआ बाबा संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा विष्णुस्वामी संप्रदाय की सतुआ बाबा पीठ के मुखिया हैं। जो भी इसका प्रमुख बनता है, उसे सतुआ बाबा नाम से जाना जाता है। जब इसके छठे पीठाधीश्वर यमुनाचार्य महाराज सतुवा बाबा का निधन हुआ तो संतोष दास ने पीठ की कमान संभाली दरअसल छठवें सतुआबाबा की कार्तिक पूर्णिमा 28 नवंबर 2011 में राजकोट के अस्पताल में निधन हुआ था। इसके बाद 2011 में ही उन्होंने शिष्य संतोषदास को महामंडलेश्वर घोषित कर उत्तराधिकारी बनाया था। महामंडलेश्वर संतोष दास विष्णु स्वामी संप्रदाय के 57वें आचार्य हैं। माना जाता है कि विष्णु स्वामी का जन्म 26 सौ साल पहले दक्षिण भारत के मदुरै जिले में हुआ था। वो बालरूप गोपाल के उपासक थे और शिष्य परंपरा विष्णु स्वामी संप्रदाय की शुरुआत उन्होंने की थी। पंथ के 50वें आचार्य दीक्षित प्रथम सतुआ बाबा महंत रणछोड़ दास ने 18वीं सदी में मणिकर्णिकाघाट पर सतुआ बाबा आश्रम बनाया था।
CM के दौरे में सतुआ बाबा की हनक भी दिखी:बाब से मिलने, हाथ मिलाने, उन्हें कार तक पहुंचाने में लगे रहे आला अफसर
📅 Published: November 22, 2025 |
📂 Category: Uncategorized
