ED छापे के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ:I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

📅 Published: January 23, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के लिए चुनावी रणनीति बना रहे I-PAC ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दैनिक भास्कर को I-PAC के कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक स्टाफ के लिए ‘रेड गाइडलाइंस’ लागू की गई हैं। ये बदलाव 8 जनवरी को कंपनी के दफ्तर में हुई ED की छापे के बाद किया गया। छापेमारी के अगले दिन CM ममता बनर्जी और I-PAC के बीच एक इमरजेंसी मीटिंग हुई और पूरे स्टाफ के लिए सीक्रेट एडवाइजरी जारी की गई। रूटीन के कामकाज में भी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। हालांकि I-PAC का कहना है कि चुनावी तैयारियों पर छापेमारी का असर नहीं पड़ा है। ED की छापेमारी के दौरान CM ममता बनर्जी I-PAC के दफ्तर पहुंचीं, जहां से फाइलें लेकर निकलते वक्त उनकी ED अफसरों से बहस भी हुई। ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर TMC के डॉक्यूमेंट्स उठवाने का आरोप लगाया था। रेड के दिन I-PAC के दफ्तर में और क्या हुआ? उसके बाद I-PAC और TMC की स्ट्रैटजी में क्या बदला? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने I-PAC में काम करने वाले लोगों से बातचीत की। ‘सबके फोन जमा कराए, एक हॉल में बैठा दिया‘
I-PAC ऑफिस में रेड के वक्त स्टाफ भी मौजूद था। एक स्टाफ ने छापे के दिन का हाल बताते हुए कहा, ‘ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया। हमसे कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई फिल्म चल रही हो। हम सबके मोबाइल जमा करा लिए गए, ताकि कोई बाहर खबर न दे सके। दफ्तर के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए। ED की टीम ने हमें एक बड़े हॉल में बैठाया था। जबकि वो छानबीन के लिए अलग-अलग केबिन में चले गए।‘ टीम क्या जांच कर रही थी? एक स्टाफ ने बताया, वो लैपटॉप, हार्ड डिस्क और ई-मेल खंगालने में लगे थे। अफसरों का फोकस उन अलमारियों और कंप्यूटर्स पर था, जिसमें TMC के फंड्स, वेंडर्स की पेमेंट और कैंडिडेट सिलेक्शन से जुड़ी फाइलें रखी थीं। करीब 5 से 6 घंटों तक दफ्तर का कोना-कोना तलाशा गया। ममता जो हरे रंग की फाइल लेकर निकलीं, उसमें क्या?
रेड शुरू होने के करीब 5 घंटे बाद CM ममता बनर्जी I-PAC के चेयरमैन प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। यहां से वे हरे रंग की फाइल लेकर निकलीं। ममता ने आरोप लगाया कि ED ने I-PAC चेयरमैन के घर पर छापेमारी करके TMC का इंटरनल डेटा जब्त करने की कोशिश की। फाइल लेकर उन्होंने कहा कि इसमें TMC से जुड़ी हार्ड डिस्क, स्ट्रैटजी और पॉलिसीज की जानकारी है। ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाया और रेड को डराने-धमकाने की कार्रवाई बताया। अफसरों और ममता के बीच क्या बातचीत हुई
प्रतीक जैन के घर से ममता सीधे I-PAC के ऑफिस पहुंची थीं। उनके साथ DGP, पुलिस फोर्स और Z-सिक्योरिटी के जवान भी थे। उस वक्त ऑफिस में मौजूद एक सोर्स ने बताया- ‘CM के पहुंचने के बाद दफ्तर का माहौल ज्यादा बिगड़ गया। वो सीधे उस कमरे में जा पहुंचीं, जहां ED के अफसर डॉक्यूमेंट्स खंगाल रहे थे। CM काफी गुस्से में थीं। उन्होंने अफसरों से रेड की वजह पूछी, इस दौरान बहस भी हुई। हालांकि इन सबका छापेमारी पर खास असर नहीं हुआ।’ ’CM ममता के साथ आए अफसर रेड के बीच से कई फाइलें लेकर बाहर चले गए। ED की टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की। इधर दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ बढ़ने लगी। ये सब देखकर स्टाफ में मौजूद कई लोगों की घबराहट बढ़ गई थी।’ इन फाइलों में क्या था? इसे लेकर सोर्स ने बताया, ’इनमें I-PAC के ग्राउंड पर किए जा रहे सर्वे से लेकर कई तरह का डेटा रहता है। चुनाव में कम समय बचा है इसलिए हर विधानसभा सीट के लिए हम एक अलग स्ट्रैटजी बना रहे हैं। इन फाइलों में इन्हीं से जुड़ा डेटा और रिसर्च रहता है।’ हालांकि ED का आरोप है कि ममता ने सरकारी काम में बाधा डाली और डॉक्यूमेंट्स चुराने की कोशिश की। वहीं, CM ममता ने इसे गलत बताया। रेड के बाद कोलकाता पुलिस ने ED अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने पुलिस जांच पर रोक लगा दी। इसे केंद्रीय एजेंसियों पर राज्य के दखल का केस बताते हुए ममता सरकार से जवाब मांगा है। रेड के बाद कैसा था दफ्तर का माहौल
करीब 6 घंटे बाद रेड खत्म हुई। ED की टीम वहां से भारी-भरकम बैग लेकर निकली। तब तक I-PAC के अंदर का नजारा बदल चुका था। सोर्स ने बताया, ’टीम अपने साथ कई लैपटॉप और हार्ड डिस्क का क्लोन डेटा लेकर गई है। इसके तुरंत बाद I-PAC मैनेजमेंट और TMC के नेताओं के बीच एक इमरजेंसी मीटिंग हुई। इसमें तय हुआ कि अब इस रेड को ही BJP के खिलाफ हथियार बनाया जाएगा।’ I-PAC ने स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि वे किसी अजनबी से बात न करें। इस बीच न कोई डॉक्यूमेंट नष्ट किया जाएगा और न ही दफ्तर से बाहर ले जाया जाएगा, ताकि आगे किसी भी कानूनी अड़चन से बचा जा सके। I-PAC के स्टाफ के लिए नई ‘रेड गाइडलाइंस’
छापेमारी के अगले ही दिन I-PAC मैनेजमेंट ने स्टाफ के लिए एक सीक्रेट एडवाइजरी जारी की। इसमें तीन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया। 1. डिजिटल क्लिनिंग के तहत वर्क लैपटॉप और फोन पर कोई प्राइवेट या सेंसिटिव पॉलिटिकल डेटा न रखें।
2. कोई भी कर्मचारी सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करेगा।
3. जांच एजेंसी अगर दोबारा आती है तो कानूनी टीम की मौजूदगी के बिना कोई बयान दर्ज नहीं कराएगा। रेड के बाद I-PAC की रणनीति क्या?
रेड के बाद I-PAC ने अपनी स्ट्रैटजी और आक्रामक कर दी है। संस्था में हमारे सोर्स ने बताया कि किस इलाके में रेड का मुद्दा फायदेमंद होगा और कहां नुकसान हो सकता है, इन पहलुओं को देखते हुए आगे की स्ट्रैटजी बनाई जा रही है। रेड के बाद I-PAC तृणमूल के लिए 3 लेवल प्लान पर काम कर रहा है… 1. TMC नेतृत्व को सुझाव दिया है कि रेड को बंगाल के गौरव पर दिल्ली का हमला बताया जाए। गांव-गांव में ये मैसेज भेजा जा रहा है कि BJP केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके आपकी लोकप्रिय योजनाएं बंद कराना चाहती है। 2. माइक्रो मैनेजमेंट के तहत I-PAC की टीमें उन बूथों की पहचान कर रही हैं, जहां वोट शेयर 5% से ज्यादा गिरा है। सरकारी योजनाओं का फीडबैक लिया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य साथी, कन्याश्री जैसी योजनाओं का फायदा किसे नहीं मिला, इसकी लिस्ट सीधे CM ऑफिस भेजी जा रही है। 3. I-PAC कैंडिडेट्स की लिस्ट फाइनल नहीं करता, लेकिन वो हर मौजूदा विधायकों की विनेबिलिटी रिपोर्ट यानी जीतने की क्षमता की रिपोर्ट बना रहा है। इसमें कार्यकर्ताओं से लेकर बूथ लेवल तक फीडबैक लिया जा रहा है। ED की छापेमारी ममता की चुनावी मशीनरी पर अटैक
I-PAC पर छापेमारी का चुनाव पर असर समझने के लिए हमने पश्चिम बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी से बात की। वे कहते हैं, ‘तृणमूल कांग्रेस इस रेड को BJP के खिलाफ एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी। ममता इसे बंगाल के अपमान, बंगालियों की अस्मिता और प्रवासी मजदूरों के मुद्दों से जोड़ेंगीं।‘ 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही TMC की चुनावी मशीनरी I-PAC संभाल रही है। ऑफिशियल तौर पर I-PAC प्रशासन नहीं चलाता, लेकिन चुनाव से जुड़ा हर छोटा-बड़ा काम देखता है। इसलिए प्रभाकर रेड को ममता की पॉलिटिकल मशीनरी को कमजोर करने की कोशिश मानते हैं। वे आगे कहते हैं, ‘अगर आप उस जड़ पर वार करेंगे, जो आपकी पूरी रणनीति संभाल रहा है तो उसका कुछ असर होने की उम्मीद रहती ही है। BJP को भी शायद यही उम्मीद है कि इससे कुछ फर्क पड़ेगा। हालांकि असल में कितना और क्या असर होगा, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी।‘ छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी जो ‘ग्रीन फाइल’ लेकर बाहर निकली थीं, प्रभाकर मणि उसे मैसेजिंग मानते हैं। 5 साल पुराने केस में छापा, मनी ट्रेल तलाश रही थी ED
छापेमारी के तार 5 साल पुराने अनूप मांझी उर्फ लाला केस से जुड़े हैं। मांझी पर बंगाल में कोयला तस्करी का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। ED की फाइलों में ये भी दर्ज है कि मांझी के खिलाफ 2000 से 2015 के बीच अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े 16 केस दर्ज हुए थे। इनमें से कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ED का दावा है कि कोयला तस्करी से हुई करोड़ों की अवैध कमाई हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचाई गई। 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान TMC का प्रचार इन्हीं पैसों से किया गया। ED में हमारे सोर्स का दावा है कि मांझी के करीबियों ने I-PAC को फंडिंग दी, जिसके एजेंसी के पास पुख्ता सबूत हैं। रेड का मकसद फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड्स के जरिए उसी मनी ट्रेल को पकड़ना था। पुराने केस ओपन करने की टाइमिंग अहम
प्रतीक जैन के TMC में जिम्मेदारी संभालने और ED की कार्रवाई की टाइमिंग को प्रभाकर मणि अहम बताते हैं। वे कहते हैं, ‘प्रतीक जैन पार्टी की IT सेल और सोशल मीडिया संभालते थे। जिस केस का हवाला दिया जा रहा है, वो करीब 5 साल पुराना है। उसमें आखिरी पूछताछ भी 2 साल पहले हुई थी। 2 साल तक कुछ नहीं हुआ और अब अचानक चुनाव के पहले छापेमारी एक संदेश तो देता ही है। वे कहते हैं कि ये रिकॉर्ड रहा है कि चुनाव के पहले गैर-BJP शासित राज्यों में ऐसी रेड बढ़ जाती हैं, जिसे जनता भी पॉलिटिकल टाइमिंग के तौर पर देखती है। पश्चिम बंगाल में I-PAC कैसे काम कर रहा है?
इस वक्त I-PAC का पूरा फोकस पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव पर है। I-PAC सीधे राजनीति में शामिल हुए बिना एक मल्टीलेवल स्ट्रैटजी मैनेजमेंट टीम के तौर पर काम कर रहा है। उसका मेन मकसद डेटा आधारित रणनीति तैयार कर पार्टी नेतृत्व को मदद देना है। 1. बूथ लेवल पर माइक्रो मैनेजमेंट
I-PAC हर विधानसभा क्षेत्र और हर बूथ स्तर पर आंकड़ों का एनालिसिस कर रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि किस बूथ पर TMC का वोट परसेंट घटा है, कहां जनता में असंतोष है और नाराजगी बढ़ रही है। 2. सर्वे और फीडबैक लेना
ग्राउंड टीम के जरिए लगातार रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसमें आम लोगों की समस्याएं, सरकारी योजनाओं पर लोगों की राय और लोकल नेताओं की स्वीकार्यता देखी जाती है। 3. सरकारी योजनाओं पर फीडबैक
I-PAC ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी योजनाओं के असर पर भी सर्वे कर रही है। इसमें लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं पर फीडबैक लिया जा रहा है कि ये योजनाएं सही तरीके से लोगों तक पहुंच रही हैं या नहीं। ये भी देख रहे कि इन्हें लेकर कहां असंतोष है। 4. नेताओं की छवि और बयानबाजी की रणनीति
कौन नेता कहां क्या बोलेगा, किस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाना है या संयम बरतना है, इन सभी मामलों में I-PAC बैक एंड से इनपुट दे रहा है। I-PAC ही पश्चिम बंगाल में TMC की IT सेल का भी काम संभालती है। 5. कैंडिडेट सिलेक्शन में अहम रोल
I-PAC कैंडिडेट की फाइनल लिस्ट तय नहीं करता, लेकिन पार्टी नेतृत्व को फीडबैक रिपोर्ट देता है। इस रिपोर्ट में बताया जाता है कि किस कैंडिडेट की जीत की संभावना ज्यादा है, कहां कड़ा विरोध है और कहां नए चेहरों की जरूरत है। इसके बाद उम्मीदवारों पर अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है। …………………. ये खबर भी पढ़ें… क्या पाकिस्तान से आए लोगों ने ईरान में भड़काई हिंसा ‘हमारा गुस्सा महंगाई की वजह से है, लेकिन ईरान में जो हो रहा है, वो आम लोगों का गुस्सा नहीं है। ये तो साजिश है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों में घुसते हैं और आग लगाने लगते हैं, फायरिंग करते हैं। रश्त शहर में तो पूरा बाजार जला दिया। हॉस्पिटल पर हमले हुए, एक नर्स को जिंदा जला दिया। गिरफ्तार लोगों के पास हैंड ग्रेनेड मिले हैं। इन सबके पीछे अमेरिका और इजराइल हैं।’ ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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