मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इम्युनोकॉन-2025 के तीसरे दिन का शुभारंभ भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के प्रोफेसर दीपांकर नंदी के व्याख्यान से हुआ। भारतीय प्रतिरक्षा विज्ञान समाज (IIS) के सहयोग से यह आयोजन हो रहा है। प्रोफेसर नंदी ने अपने संबोधन में बताया कि इंटरफेरॉन परिवार का एक महत्वपूर्ण सदस्य मेजबान कोशिकाओं की रक्षा करने के साथ-साथ ट्यूमर-रोधी प्रक्रियाओं को भी बढ़ाता है। उनकी प्रयोगशाला का शोध टी-सेल सक्रियण, इंटरफेरॉन-मध्यस्थित नाइट्रिक ऑक्साइड प्रतिक्रियाओं तथा माइक्रोबियल तनाव को समझने पर केंद्रित है। इसके बाद इमोरी यूनिवर्सिटी, यूएसए की प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर ज्योति रंगराजन ने एचआईवी संक्रमित और असंक्रमित व्यक्तियों में तपेदिक (टीबी) नियंत्रण से जुड़े प्रतिरक्षा नेटवर्क पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि टीबी आज भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है, विशेष रूप से उन मरीजों में जो एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त हैं। अपने शोध निष्कर्षों को साझा करते हुए प्रोफेसर रंगराजन ने स्पष्ट किया कि एचआईवी रोगियों की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली टीबी संक्रमण को तेजी से सक्रिय कर देती है। एचआईवी संक्रमण के कारण प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच होने वाला संचार, साइटोकाइन प्रतिक्रिया तथा संक्रमण नियंत्रण से जुड़ी कई जैविक प्रक्रियाएं बाधित हो जाती हैं। इसके विपरीत, एचआईवी-मुक्त व्यक्तियों में प्रतिरक्षा नेटवर्क अधिक प्रभावी ढंग से टीबी बैक्टीरिया पर नियंत्रण बनाए रखता है। उन्होंने इस क्षेत्र में अलग-अलग उपचार रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि दोनों तरह के मरीजों को बेहतर और लक्ष्यित चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। प्रोफेसर रंगराजन ने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग बढ़ाने, नई दवाओं के विकास और उन्नत निदान तकनीकों के उपयोग को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। टीबी और एचआईवी पर संयुक्त शोध को विश्व स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने भविष्य में इस दिशा में व्यापक वैज्ञानिक प्रयासों की अपील की गई।
HIV मरीजों की कमजोर इम्युनिटी से TB का खतरा ज्यादा:प्रयागराज के MNNIT में इम्युनोकॉन का तीसरा दिन, USA की प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. ज्योति रंगराजन का संबोधन
📅 Published: November 21, 2025 |
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