बस्ती में महान समाज सुधारक संत गाडगे महाराज को उनके परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि दी गई। सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके जीवन, विचारों और बहुजन समाज के प्रति समर्पण पर प्रकाश डाला, साथ ही शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया। वक्ताओं ने संत गाडगे महाराज के शिक्षा संबंधी संदेश को दोहराया। उन्होंने कहा था कि बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए यदि खाना खाने की थाली भी बेचनी पड़े, तो भी उन्हें शिक्षित किया जाना चाहिए। उनका दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही समाज को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जा सकती है। कार्यक्रम में संत गाडगे महाराज के त्याग और सामाजिक संवेदना पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वे अपने निजी दुखों से ऊपर उठकर समाज के दुख को अपना मानते थे। अपने पुत्र के निधन पर भी वे नहीं रोए थे, लेकिन 6 दिसंबर 1956 को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण पर वे फूट-फूट कर रोए थे। उन्होंने उस समय कहा था कि “आज समाज के करोड़ों बेटों की मौत हो गई है।” बाबा साहेब के प्रति उनका स्नेह इतना गहरा था कि डॉ. अंबेडकर के परिनिर्वाण के बाद संत गाडगे महाराज ने भोजन, पानी और दवा का त्याग कर दिया। इसके चौदह दिन बाद, 20 दिसंबर 1956 को उनका भी निधन हो गया। इस अवसर पर भारत मुक्ति मोर्चा ने संत गाडगे महाराज को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने तर्क दिया कि उनका पूरा जीवन सामाजिक समरसता, स्वच्छता, शिक्षा और मानव सेवा को समर्पित रहा है, इसलिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जाना चाहिए। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में चंद्रिका प्रसाद, डॉ. आर.के. आनंद, ह्रदय गौतम, नीलू निगम, चंद्र प्रकाश गौतम, सरिता भारती, खुशी, सनोज, ठाकुर प्रेम नंदवंशी, तिलक राम गौतम, साधना राज, राम राना, राम जियावन, परमात्मा, डॉ. जे.के. भार्गव और बुद्धि प्रकाश गौतम सहित कई अन्य लोग शामिल थे।
संत गाडगे महाराज के परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि:वक्ताओं ने शिक्षा और सामाजिक चेतना का संदेश दोहराया
📅 Published: December 20, 2025 |
📂 Category: India Up
