जम्मू के डोडा में रहने वाली अनीता राज विलेज डिफेंस गार्ड्स यानी VDG की ट्रेनिंग ले रही हैं। उन्होंने पहली बार ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखी है। वे ट्रेनिंग में आकर बहुत खुश हैं और कहती हैं, ‘अभी सर्दियां हैं तो आतंकी ज्यादा एक्टिव रहते हैं। वो इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान से घुसपैठ करते हैं। इसलिए अभी हम 24 घंटे अलर्ट रहते हैं।‘ 30 दिसंबर को ही सेना ने डोडा के अलग-अलग गांवों में ट्रेनिंग कैंप लगाए हैं। यहां जंगलों और पहाड़ों के बीच पेट्रोलिंग करने के साथ ही हथियार चलाना और हैंडल करना भी सिखाया जा रहा है। डोडा की रहने वाली कई महिलाएं विलेज डिफेंस गार्ड भी हैं। ये पिछले एक साल से घर के कामकाज के अलावा सेना के साथ गांव की सुरक्षा भी कर रही हैं। उन्हीं में से एक सोनाली कहती हैं, ‘मैं एक साल से VDG में हूं। मुझे देश के लिए लड़ना है और हम किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। हमें खुशी है कि देश के लिए काम कर रहे हैं।‘ पहले विलेज डिफेंस ग्राउंड (VDG ) को VDC कहा जाता था। इसमें सिर्फ पुरुष ही ट्रेनिंग ले रहे थे। अब पिछले साल से महिलाएं भी इसका हिस्सा हैं। ट्रेनिंग देने वाले अधिकारी के मुताबिक, ये 10 से 15 लोगों का एक ग्रुप होता है, जिसका लीडर रिटायर्ड पुलिस या आर्मी अधिकारी है। ऑटोमैटिक हथियार मिले और ट्रेनिंग भी, अब आतंकियों से लड़ना आसान
दैनिक भास्कर ने VDG की ट्रेनिंग देने वाले अधिकारियों से बात की। वे कहते हैं, ‘जम्मू के पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों में पैदल जाने का ही रास्ता है। वहां अगर कभी आतंकियों का मूवमेंट होता तो कैंप से आर्मी को पहुंचने में कई बार 4-5 घंटे भी लग जाते हैं। ऐसे इलाकों की पहचान कर वहां के लोकल लोगों को उनकी इच्छा से हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है। अगर कोई रिटायर्ड पुलिस या आर्मी अधिकारी है तो उसे ग्रुप की जिम्मेदारी दी जा रही है।‘ हमने डोडा में VDG की ट्रेनिंग में शामिल महिलाओं और कुछ युवकों से भी बात की। इनमें से एक सुरिंदर कुमार ने बताया कि पहले उन्हें थ्री नॉट थ्री से ट्रेनिंग दी जाती थी। हालांकि अब ऑटोमैटिक हथियार दिया गया है, जिससे काफी सहूलियत हो रही है। 2022 में गृह मंत्रालय के ऑर्डर के बाद अब VDG को ऑटोमैटिक हथियार दिए जा रहे हैं। ट्रेनिंग लेने वाले एक अन्य VDG मेंबर राजेश कुमार सिंह कहते हैं, ‘हमें समय-समय पर ट्रेनिंग दी जाती है। गन कैसे ओपन करनी है, कैसे बंद करनी और कैसे चलानी है। इससे हमें काफी फायदा हुआ है। अगर हमें किसी जंग में चीन बॉर्डर पर भी ले जाया गया तो हम उसके लिए तैयार हैं।‘ यहां हथियारों की ट्रेनिंग लेने आईं मधुबाला कहती हैं, हमें ट्रेनिंग मिली है। इससे हमें बहुत फायदा हुआ। हमारा जज्बा बढ़ा है। वैसे भी हमें सब कुछ आना चाहिए। दुश्मन से लड़ना भी। खुशी है कि देश की सेवा करने का मौका मिल रहा है। वहीं डोडा में रहने वाले सुनील कहते हैं कि गांव में जब भी कोई अजनबी आता है तो हम उसकी पहचान करके सेना को जानकारी देते हैं। फिर आर्मी के साथ मिलकर गश्त भी करते हैं। हाल के दिनों में डोडा के इलाकों में कुछ संदिग्ध आतंकियों की गतिविधियां देखने को मिलीं। उसके बाद से यहां VDG को फिर एक्टिव किया जा रहा है। ट्रेनिंग देने वाले अधिकारी बताते हैं, ‘पिछले दो साल से महिलाएं भी विलेज डिफेंस गार्ड्स का हिस्सा बन रही हैं। दरअसल, महिलाएं सुनसान पहाड़ी पर मौजूद घरों में अकेली पड़ जाती हैं। ऐसे में इन्हें ट्रेनिंग मिलने से अब सुरक्षा बढ़ गई है। VDG जिले के SSP, डीएम और आर्मी अफसरों से कॉन्टैक्ट में रहते हैं। उनके लीडर को वायरलेस सेट भी दिए गए हैं। इसलिए कोई भी खतरा होने पर हमसे संपर्क कर सकते हैं।‘ 1995 में कैसे बनाई गई पहली विलेज डिफेंस कमेटी, रियासी में हुई ट्रेनिंग
जम्मू के गांवों में लोकल लोगों को आतंकियों का मुकाबला करने के लिए हथियारों की ट्रेनिंग देने की शुरुआत 1995 में रियासी के बागनकोट गांव से हुई थी। उस समय रियासी के SSP पूर्व IPS अधिकारी एसपी वैद थे। जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP रिटायर्ड IPS अधिकारी एसपी वैद बताते हैं, ‘ये 1995 की शुरुआत की बात है। रियासी के बागनकोट गांव में आतंकियों का ग्रुप पाकिस्तान से घुसपैठ करके आ रहा था। आतंकी कश्मीर की तरफ जा रहे थे। तभी उन्होंने बागनकोट गांव में हमला कर दिया और गांव के दो लोगों को मार गिराया। मुझे वायरलेस पर मैसेज मिला।‘ ‘किसी तरह हम लोग गांव की तरफ पहुंचे। हमें रास्ते में ही गांव के लोग मिले और वे लाशें लेकर सड़क पर आ गए थे। उनमें बहुत गुस्सा था। वे हथियार की मांग करने लगे। हमने लाइसेंस के बारे में पूछा तो बोले- हम गरीब हैं, लाइसेंस कैसे लेंगे। तब हमने उन्हें हथियार दिलाने का भरोसा दिया।‘ ‘गांव वालों ने ये भी बताया कि उन्होंने अपना बचाव करते हुए कुल्हाड़ी और गडासे से दो आतंकियों को मार गिराया, लेकिन उनकी लाशें बाकी आतंकी अपने साथ ले गए। गांव वालों की हिम्मत देखकर पहली बार हमने ही विलेज डिफेंस कमेटी (VDC) शुरू की। तब मैंने पुलिस मुख्यालय से परमिशन लेकर गांव वालों को पहली बार थ्री नॉट थ्री की 10 राइफलें दीं और ट्रेनिंग दिलाई। उन्हें 50-50 राउंड गोलियां भी दी गईं।’ ’जिन दो लोकल लोगों को आतंकियों ने मारा था। उनकी एक-एक बेटियों को पुलिस कॉन्स्टेबल बनवाया गया। जिससे पूरे गांव का हौसला बढ़ा। इसके बाद उन पहाड़ी इलाकों के लिए ये एक सिस्टम बन गया।’ पुलिस और सेना के होते हुए VDC बनाने की जरूरत क्यों पड़ी
हमने पूछा कि इन इलाकों में हमेशा आर्मी और पुलिस क्यों नहीं तैनात रहती है। VDC बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। इस पर पूर्व DGP एसपी वैद कहते हैं, ‘जम्मू और कश्मीर की भौगोलिक स्थिति में काफी अंतर है। कश्मीर में दूर-दराज के दो से तीन गांव भी एक साथ सटे हुए हैं। वहीं जम्मू में डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी और रियासी समेत कई इलाकों के हालात काफी अलग हैं।‘ ‘यहां के गांवों में जाने के लिए एक या दो ही सड़क है। इसके बाद एक घर किसी एक पहाड़ी पर है तो दूसरा घर उससे काफी दूर दूसरी पहाड़ी पर है। इन घरों तक जाने के लिए सिर्फ पैदल रास्ते हैं। यहां आर्मी या फोर्सेस तुरंत नहीं पहुंच सकतीं। कोई घटना होने पर सूचना मिलने के बाद भी सेना को पहुंचने में कई बार 4-5 घंटे लग जाते थे। तब तक आतंकी घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते थे।‘ ‘यही वजह है कि यहां के लोकल लोगों को हथियारों की ट्रेनिंग देकर सुरक्षा के लिए तैयार किया गया। यही वजह है कि जम्मू के इन इलाकों में आतंकी जल्द अपना ठिकाना नहीं बना पाते, न ही लोगों को मार पाते हैं। ये बेहद जरूरी और कारगर कदम है।‘ VDG अगर न होते तो जम्मू में भी हिंदुओं का नरसंहार होता
जम्मू के दूर-दराज के पहाड़ी गांवों में विलेज डिफेंस गार्ड्स न होते तो क्या होता। इस सवाल पर पूर्व DGP वैद कहते हैं, ‘1990 के दशक में कश्मीर की तरह जम्मू में भी नरसंहार होने लगा था। उस वक्त पाकिस्तान चाहता था कि जिस तरह कश्मीर से हिंदुओं को भगाया गया। कश्मीरी पंडितों पर जुल्म हुए, उसी तरह जम्मू के पहाड़ी इलाकों में भी जुल्म हो और हिंदुओं को भगा दिया जाए।‘ ‘उस समय अगर ये विलेज गार्ड कमेटी नहीं बनाई जाती तो जम्मू एरिया में भी हिंदुओं पर अत्याचार होते और मास मर्डर किए जाते क्योंकि यहां के लोग खुद ही हथियार लेकर अपनी सुरक्षा में जुट गए इसलिए पाकिस्तान की ये चाल जम्मू में नहीं चली।‘ तब की VDC (अब VDG) को याद करते हुए वो कहते हैं, ‘डोडा, किश्तवाड़, राजौरी और पुंछ की पहाड़ियों में रहने वाले लोग रात-रात भर आतंकियों से लड़े हैं। वे तब तक लड़ते, जब तक उनके पास से गोला-बारूद खत्म नहीं हो गए। बहुत सारे लोगों ने इसके लिए अपनी जान भी दी है।‘ गृह मंत्रालय ने नया VDG बनाने का दिया आदेश
दैनिक भास्कर ने 2022 में गृह मंत्रालय की तरफ से विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) को लेकर जारी आदेश की कॉपी भी निकाली। उसमें VDG को लेकर नए दिशा-निर्देश दिए हैं। ये आदेश 14 अगस्त 2022 को जारी हुआ। इसमें लिखा है- ‘VDG को अपनी इच्छा के आधार पर छोटे-छोटे ग्रुप बनाने हैं। ये जम्मू के दूर-दराज के इलाकों में खुद अपनी सुरक्षा के लिए अलर्ट रहेंगे।‘ ‘इन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी और ये दिन-रात के वक्त गश्त करेंगे। ये उन एरिया के लिए है, जहां पुलिस और सिक्योरिटी फोर्सेज को पहुंचने में काफी मुश्किल होती है। VDG के एक ग्रुप में 15 से ज्यादा लोग नहीं होंगे। इनके पास हथियार का लाइसेंस होना जरूरी है।‘ इनके ग्रुप का लीडर कोई रिटायर्ड आर्मी मैन या जम्मू-कश्मीर पुलिस का पूर्व कर्मी होना चाहिए। ग्रुप में ऐसे युवा होने चाहिए, जो अपनी खुशी से हथियारों की ट्रेनिंग लें और कम्युनिटी की सिक्योरिटी में अलर्ट रहें। ‘VDG दो कैटेगरी में बनाए गए। पहला V1 कैटेगरी, जिसमें ग्रुप को लीड करने वाला होगा। वही ग्रुप को दिशा-निर्देश देगा। उसके पास वायरलेस सेट भी होगा, जिससे वो रिमोट एरिया से आर्मी और पुलिस को मैसेज भी कर सकेगा। उसे हर महीने 4500 रुपए सैलरी दी जाएगी। दूसरी कैटेगरी V2 है, जिसमें ग्रुप मेंबर्स होंगे। इन्हें हर महीने 4000 रुपए मिलेंगे।‘ VDG की ट्रेनिंग पर आतंकियों की नजर, 33 साल से वांटेड आतंकी का खुलासा
जम्मू से पिछले 33 साल से गायब आतंकी जहांगीर सरूरी का प्रोपेगैंडा इंटरव्यू द रिवोल्यूशन रिसर्जेंस मैगजीन में पब्लिश हुआ है। उसमें लोकल लोगों को सेना की मदद करने और ट्रेनिंग देने का जिक्र किया गया है। जिससे पता चलता है कि आतंकियों की भी इस VDG पर नजर है। इस आतंकी से सवाल पूछा गया था कि भारतीय सेना और सरकार इन्हें (आतंकियों के आंदोलन को) दबाने के लिए कौन से तरीके अपना रही है? इस पर मोस्ट वांटेड आतंकी जहांगीर सरूरी ने जवाब दिया कि भारतीय सेना ने कुछ हिंदू युवाओं को हथियारों से लैस किया है। उन्हें उधमपुर जैसे शिविरों में आर्मी ट्रेनिंग दी गई है।
……………….. ये खबर भी पढ़ें… ‘मार्च में इंडियन आर्मी करेगी बड़ा ऑपरेशन’ ‘हमारे लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। हम जानते हैं कि किसी भी इम्तिहान का मुश्किल हिस्सा आखिर में होता है। अल्लाह की मर्जी से हम इसे जीतकर, और मजबूत होकर निकलेंगे। ये सिर्फ आपकी लड़ाई है। जो भी करना है, खुद करना है। जल्द ही हम कब्जे से निपटने के लिए पूरा एक प्लान बताएंगे।’ ये मैसेज कश्मीर में एक्टिव आतंकियों के लिए है। पढ़िए पूरी खबर…
पाकिस्तानी आतंकियों से लड़ेंगी जम्मू की अनीता-सोनाली:विलेज डिफेंस गार्ड एक्टिव, गश्त और फायरिंग की ट्रेनिंग दे रही सेना
📅 Published: January 4, 2026 |
📂 Category: India National
