जापान में रिकॉर्ड 29 करोड़ में बिकी मछली:ब्लूफिन टूना में आखिर ऐसा क्या खास है; इसे जाल लगाकर क्यों नहीं पकड़ सकते

📅 Published: January 8, 2026 | 📂 Category: India National

जापान में नए साल की पहली नीलामी में एक मछली रिकॉर्ड 29 करोड़ रुपए में बिकी। 243 किलो की ब्लूफिन टूना दुनिया की सबसे महंगी मछली बन चुकी है। इसके सिर्फ एक किलो मांस की कीमत में 5 रॉयल एनफील्ड बाइक आ जाएं। इससे पहले भी ये रिकॉर्ड ब्लूफिन टूना के ही नाम था। आखिर इस मछली में ऐसा क्या खास है, इसे किसने और क्यों खरीदा; ऐसे 6 सवालों के जवाब जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: 29 करोड़ की यह मछली किसने खरीदी? जवाब: जापान की राजधानी टोक्यो की तोयोसु फिश मार्केट में 5 जनवरी को नए साल की पहली नीलामी हुई। इसमें 243 किलो की ब्लूफिन टूना 510 मिलियन येन यानी करीब 29 करोड़ रुपए में बिकी। इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग टूना को खरीदा है जापान की मशहूर कंपनी कियोमुरा कॉर्पोरेशन के मालिक कियोशी कियोमुरा ने। उन्हें जापान में ‘टूना किंग’ कहा जाता है। वे ‘सुशी जनमई’ नाम से मशहूर सुशी रेस्टोरेंट चेन चलाते हैं और हर साल ऊंची बोली लगाने के लिए जाने जाते हैं। नीलामी के बाद कियोमुरा ने कहा- ‘मैं कम कीमत की उम्मीद कर रहा था, लेकिन बोली इतनी तेजी से बढ़ी कि खुद को रोक नहीं पाया। अच्छी क्वालिटी की टूना देखकर मैं रुक ही नहीं सकता। सवाल-2: आखिर ब्लूफिन टूना इतनी महंगी क्यों होती है? जवाबः ब्लूफिन टूना को दुनिया की सबसे प्रीमियम खाने योग्य मछलियों में गिना जाता है। इसका मांस बेहद मुलायम, रसीला और फैट से भरपूर होता है। खासकर पेट का हिस्सा (ओटोरो) मक्खन जैसा माना जाता है। स्वाद, रंग और टेक्सचर में यह बाकी टूना से कहीं बेहतर होती है। हालांकि इसके इतनी महंगी होने के पीछे 4 बड़ी वजहे हैं… 1. ब्लूफिन टूना की कमी: यह मछली गहरे और खुले समुद्र में हजारों मील की यात्रा करती है, जिसके कारण इसे ढूंढना और पकड़ना बहुत मुश्किल काम है। पहले बहुत अधिक शिकार होने की वजह से अब समुद्र में इनकी संख्या काफी घट गई है, इसीलिए सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसके शिकार पर सख्त नियम और कोटा तय कर दिया है। 2. ब्लूफिन टूना का साइजः कुछ मछलियों का वजन 450 किलो से भी ज्यादा हो सकता है। मछली जितनी बड़ी और पुरानी होती है, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है। इसकी वजह यह है कि बड़ी और उम्रदराज टूना का स्वाद और मांस की बनावट बेहतर मानी जाती है। 3. पकड़ने और ढोने की मुश्किल: जापान के ‘ओमा’ तट के पास पकड़ी गई टूना सबसे महंगी मानी जाती है। क्योंकि वहां के मछुआरे इसे जाल नहीं, बल्कि एक खास तकनीकि लाइन फिशिंग से पकड़ते हैं। इससे मछली को चोट या तनाव नहीं होता और मीट क्वालिटी टॉप क्लास रहती है। क्वालिटी बनाए रखने के लिए बहुत तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा खर्च आता है, जो इसकी कीमत को और बढ़ा देता है। 4. सबसे बड़ी वजह है डिमांड: दुनिया भर में सुशी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे लोग ज्यादा सुशी खाने लगे हैं, वैसे-वैसे इसके जरूरी इंग्रीडिएंट्स, खासकर ब्लूफिन टूना की मांग और कीमत दोनों बढ़ती चली गई हैं। जापान में ब्लूफिन टूना का महत्व सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। नए साल की पहली नीलामी को वहां शुभ माना जाता है। साल की पहली नीलामी में ऊंची बोली लगाने से पूरे साल व्यापार अच्छा चलने की मान्यता है। इसी वजह से बड़ी कंपनियां और फेमस रेस्टोरेंट सामान्य नीलामी में अधिक से अधिक बोली लगाकर इसे हासिल करना चाहते हैं। यह नीलामी उनके लिए कारोबार से कहीं ज्यादा ब्रांडिंग और सम्मान पाने का जरिया होती है। सवाल-3: ब्लूफिन टूना को जाल लगाकर क्यों नहीं पकड़ा जाता? जवाबः ब्लूफिन टूना को किसी बड़े जाल से नहीं, बल्कि ‘लॉन्गलाइन’ तकनीक से पकड़ा जाता है। जापान में मछली पकड़ने का ये पारंपरिक तरीका है। इस प्रक्रिया में समुद्र में एक बहुत लंबी रस्सी डाली जाती है। इस रस्सी पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चारे (भोजन) लगे कांटे होते हैं। जब ब्लूफिन टूना चारा निगलती है, तो वह कांटे में फंस जाती है। इसके बाद मछुवारे उसे धीरे और सावधानी से बाहर निकालते हैं। जापान के ओमा शहर के मछुआरे कड़कड़ाती ठंड में समुद्र के बीचों-बीच घंटों तक संघर्ष करते हैं ताकि मछली को बिना किसी नुकसान के जिंदा या ताजी हालत में नाव तक लाया जा सके। अगर मछली बड़ी और अच्छी क्वालिटी की निकली, तो नीलामी में उसकी कीमत करोड़ों तक पहुंच सकती है। इससे मछुआरे की किस्मत बदल जाती है। सवाल-4: इससे पहले सबसे महंगी मछली कौन-सी थी? जवाब: 2019 में भी एक ऐसी ही चौंकाने वाली नीलामी हुई थी। उस समय 278 किलो की एक टूना को 333.6 मिलियन येन यानि उस समय के हिसाब से लगभग 20 करोड़ रुपए में खरीदा गया था। ये रिकार्ड भी 29 करोड़ की मछली खरीदने वाले कियोमुरा के नाम ही है। यानी उन्होंने अपनी ही रिकॉर्ड तोड़ा है। सवाल-5: क्या एक मछली पर 29 करोड़ रुपये खर्च करना समझदारी है? जवाब: पहली नजर में यह घाटे का सौदा लग सकता है, क्योंकि कोई भी रेस्टोरेंट 29 करोड़ की लागत को सिर्फ सुशी बेचकर वसूल नहीं कर सकता। दरअसल, इसके पीछे ‘मार्केटिंग और ब्रांडिंग’ का बड़ा खेल है। जब कोई व्यापारी इतनी महंगी मछली खरीदता है, तो उसका नाम दुनिया भर की मीडिया और सोशल मीडिया पर छा जाता है। इसे एक तरह का ‘फ्री पब्लिसिटी स्टंट’ माना जाता है जिसकी वैल्यू करोड़ों के विज्ञापन से कहीं अधिक होती है। इससे ग्राहकों के बीच यह मैसेज जाता है कि यदि यह रेस्टोरेंट मालिक दुनिया की सबसे बेहतरीन मछली खरीद सकता है, तो यहां मिलने वाली हर चीज की क्वालिटी बेहतर ही होगी। ये तरीका अमीर ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है, जो केवल भोजन के लिए नहीं बल्कि बड़े होटल में सिर्फ एक एक्सपीरिएंस के लिए मोटी रकम खर्च करने को तैयार रहते हैं। सवाल-6: भारत में सबसे महंगी मछली कौन-सी नीलाम हुई है? जवाब: भारत की सबसे महंगी मछली की नीलामी में घोल मछली सबसे आगे है। महाराष्ट्र के पालघर में 1 सितंबर 2021 को 157 मछलियों के एक लॉट को ₹1.33 करोड़ में बेचा गया था। घोल मछली के पेट में औषधीय गुण होते हैं और यह कॉस्मेटिक्स व दवाओं में इस्तेमाल होती है। हांगकांग, जापान जैसे देशों में इसकी भारी मांग है और यह ‘सी गोल्ड’ कहलाती है। इसके अलावा अक्टूबर 2025 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में 88 तेलिया भोला मछली पकड़ी गई, जिसकी नीलामी में कीमत लगभग 60 लाख पहुंची थी। ———————- ये खबर भी पढ़िए… जवान बेटे के लिए मां-बाप क्यों मांग रहे इच्छामृत्यु:सुप्रीम कोर्ट में गुहार मंजूर, एम्स रिपोर्ट बना रहा; क्या है इज्जत से मरने का अधिकार गाजियाबाद के रहने वाले अशोक राणा और निर्मला राणा जवान बेटे हरीश के लिए सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु मांग रहे हैं। 11 दिसंबर को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एम्स को रिपोर्ट बनाने को कहा। अब अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होनी है। पूरी खबर पढ़िए

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