गोंडा में आठ दिवसीय राष्ट्रकथा का शुभारंभ:जगद्गुरू रामानंदाचार्य बोले- “राष्ट्र” और “राम” एक-दूसरे के पूरक, जैसे राम मंदिर बना वैसे मथुरा भी बनेगा

📅 Published: January 1, 2026 | 📂 Category: India Up

गोंडा के नंदिनी निकेतन में आठ दिवसीय राष्ट्रकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। श्रीआनंदम धाम पीठाधीश्वर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने अयोध्या से पधारे साधु-संतों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर कथा का आरंभ किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने पुष्प वर्षा कर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज का स्वागत किया। आयोजन के पहले दिन 10 हजार से अधिक बच्चों ने सहभागिता कर कथा का श्रवण किया। उद्घाटन कार्यक्रम में श्रीराम बल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि युवाओं के रुझान में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां युवा पर्यटन स्थलों की ओर अधिक जाते थे, अब वे काशी, वृंदावन, महाकाल और श्रीधाम अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसे उन्होंने एक “नया और सकारात्मक परिवर्तन” बताया।महंत राजकुमार दास ने कहा कि युवाओं में सनातन मूल्यों के प्रति रुचि बढ़ रही है और उनका मानना है कि इन मूल्यों को अपनाने से जीवन में स्थिरता और दिशा मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में राष्ट्रकथा और रामकथा से प्रेरणा लेना आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण को लेकर भी वक्तव्यों का दौर चला। महंत राजकुमार दास ने कहा कि भविष्य में वहां मंदिर निर्माण की संभावनाएं दिख रही हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्जिद बनाए जाने की घोषणा से जुड़े सवाल पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कथा के उद्घाटन में पहुंचे जगद्गुरु रामानंदाचार्य दिनेशाचार्य महाराज, श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम ने कहा कि “राष्ट्र” और “राम” एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्र को सशक्त और मर्यादित बनाना है, तो भगवान श्रीराम के चरित्र और आदर्शों को जीवन में आत्मसात करना होगा।उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या से ही राष्ट्र की परिकल्पना जुड़ी हुई है और राष्ट्रकथा व रामकथा का संयुक्त आयोजन इसी विचार को आगे बढ़ाता है। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने के प्रश्न पर दिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि उनके अनुसार भारत सांस्कृतिक रूप से पहले से ही हिंदू राष्ट्र है और समय के साथ इसकी औपचारिक घोषणा भी हो सकती है। मथुरा और अन्य स्थानों पर मंदिर निर्माण को लेकर भी उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। आयोजन में बड़ी संख्या में बच्चे, श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार, आठ दिनों तक चलने वाली इस राष्ट्रकथा में प्रतिदिन विभिन्न विषयों पर प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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