‘जब मैंने पापा को बताया कि शोएब से शादी करना चाहती हूं, तो वो गुस्से में आग बबूला हो गए। कहने लगे कि वो मुस्लिम है, लव जिहाद करना चाहता है। तुम्हारा धर्म बदलवाकर मुस्लिम बना देगा। तुम्हें बुर्का पहनाएगा। नौकरी नहीं करने देगा। पंडित परिवार की लड़की हो, हम लोग तो लहसुन प्याज भी नहीं खाते। मुस्लिम के यहां तो नॉनवेज भी बनता होगा। पापा जानबूझकर अखबारों में छपी लव जिहाद की खबरें रोज सुबह जोर-जोर से पढ़कर सुनाते थे। हर बात पर किसी न किसी बहाने से बताते थे कि मुसलमान क्या क्या कर सकते हैं। नौकरी नहीं करने देंगे। हालांकि मैंने उनकी एक नहीं सुनी और शोएब से कोर्ट मैरिज कर ली।’ आज ब्लैकबोर्ड में स्याह कहानी उनकी जिन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर दूसरे धर्मों में शादी की। जिसके बाद दोनों के परिवार ने ये कहकर साथ छोड़ दिया कि अब ये हमारे समाज का हिस्सा नहीं… बरेली की रहने वाली आकांक्षा शर्मा ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर साल 2015 में मथुरा के शोएब से शादी की थी। आकांक्षा और शोएब दोनों गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं। मैं उनसे मिलने के लिए ग्रेटर नोएडा उनके घर पहुंची। एक पॉश सोसाइटी में अपने ड्रॉइंग रूम में बैठी आकांक्षा बताती हैं कि ‘साल 2011 में पहली बार मैं शोएब से मिली थी। उस वक्त हम दोनों एक ही ऑफिस में नौकरी कर रहे थे। पहली मुलाकात ऑफिस में हुई, फिर धीरे-धीरे हम ऑफिस के बाहर भी मिलने लगे। हमारी दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला।’ गहरी सांस लेते हुए आकांक्षा कहती हैं कि ‘एक दिन शोएब ने मुझसे कहा कि अब हमें शादी के बारे में सोचना चाहिए। आखिरकार हम दोनों इस फैसले पर पहुंचे कि अगर धर्म बदलना पड़ा तो हम शादी नहीं करेंगे। कई दिनों तक सबसे बातचीत करने के बाद हमने घरवालों से बात करने का फैसला किया। उसी दिन शाम को मैंने अपने घर फोन किया और मम्मी को शोएब के बारे में बताया। वो भड़क गईं और कहने लगीं कि तुम्हें मुस्लिम लड़का ही मिला था। बचपन से तुम्हें यही सिखाया कि एससी-एसटी और मुस्लिम लड़कों से शादी का ख्याल भी दिमाग में मत लाना। आखिर तुमने वही कर दिखाया। कुछ ही दिन में मम्मी-पापा दोनों दिल्ली आए और मुझे अपने साथ ले गए।’ आकांक्षा बीते दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि ‘घर पर हर वक्त तनाव का माहौल रहता। मुझे दिन रात यही बताया जाता कि मुस्लिम लड़के से शादी करने के बाद कैसे मेरी जिंदगी बदल जाएगी। मुझे लव जिहाद से जुड़ी सारी खबरें बताई जातीं। उधर, शोएब ने जब अपने घरवालों को आकांक्षा के बारे में बताया तो उनका भी एक ही जवाब था, हिंदू लड़की के साथ शादी के बारे में कभी सोचना भी मत। ये कभी नहीं हो सकता। हम दोनों ये समझ चुके थे कि घरवाले इस फैसले में कभी हमारा साथ नहीं देंगे। एक दिन शोएब ने कहा कि तुम किसी तरह दिल्ली लौट आओ, फिर देखते हैं क्या करना है। अब तक मुझे घर पर रहते हुए एक महीना बीत गया था। मैंने शोएब के बारे में कोई बात नहीं की। मैं बस उन्हें ये समझाने में लगी थी कि नौकरी के लिए वापस जाना है। आखिरकार उन्होंने नौकरी के लिए दिल्ली जाने की इजाजत फिर से दे दी।’ आकांक्षा के बगल में ही उनके पति शोएब बैठे हैं। वो कहते हैं कि ‘आकांक्षा के दिल्ली आते ही हमने कोर्ट मैरिज करने का फैसला कर लिया। हालांकि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने के लिए हमें परिवार और समाज के अलावा कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हम लोग बहुत पढ़े-लिखे हैं, ताकतवर कंपनियों में काम करते हैं। हमें इस तरह की शादियों में कानूनी मदद करने वाली संस्था धनक का सहयोग था, तब भी प्रशासन ने हमारे लिए दिक्कतें पैदा कीं। जब हम लोग शादी करने के लिए एसडीएम ऑफिस पहुंचे तो डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया बहुत लंबी थी। फिर बोला गया कि जहां शादी करनी है, आधार कार्ड में पता भी उसी शहर का होना चाहिए। गवाहों के आधार कार्ड पर भी उसी शहर का पता होना चाहिए। जबकि कानून में ऐसा नहीं है। आकांक्षा जब शादी के लिए सिग्नेचर करने के गईं तो रूम में अकेली थीं। क्लर्क ने पूछा मुस्लिम से शादी क्यों कर रही हो? एकबार फिर सोच लो। आकांक्षा ने जवाब दिया कि कानून ने हक दिया है मुझे शादी करने का। फिर 30 दिन का नोटिस नासूर बन गया। स्पेशल मैरिज एक्ट में 30 दिन तक एसडीएम ऑफिस में नोटिस लगाया जाता है और परिवार वालों को भी नोटिस भेजा जाता है।’ शोएब कहते हैं कि 30 दिन के नोटिस में हमें यह डर था कि हिंदू संगठनों को हमारी शादी के बारे में न पता चल जाए क्योंकि एसडीएम ऑफिस से ऐसी जानकारी लीक हो जाती है। फिर संगठन पीछे पड़ जाते हैं। हालांकि हमारी किस्मत अच्छी थी कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमने घरवालों को बिना बताए चुपचाप शादी कर ली। हालांकि शादी को लेकर जो अरमान थे वो तो पूरे नहीं हुए।’ शोएब इतना कहते ही चुप हो गए, मैंने कुछ देर बाद उनसे पूछा, फिर घरवालों को शादी के बारे में कब बताया? ‘शादी करके जब घर लौटे तो मैंने अब्बू को फोन पर बताया कि आकांक्षा से शादी कर ली है। उन्होंने कहा कि फौरन बैग उठाओ और घर वापस आ जाओ। आकांक्षा के परिवार वाले या हिंदू संगठन वाले लव जिहाद के चलते तुम्हारी हत्या करवा देंगे। हालांकि मैंने घर जाने से साफ इनकार कर दिया। तब घरवालों ने कहा कि अब तुमसे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’ और आकांक्षा के घरवालों ने क्या कहा? ‘आकांक्षा ने भी उसी दिन अपनी मम्मी को फोन पर बताया कि मुझसे शादी कर ली है। उनकी मम्मी ने ये सुनते ही कह दिया कि आज के बाद इस नंबर पर फोन करने की कोई जरूरत नहीं है। अब तुम्हारा यहां कोई नहीं रहता और फोन काट दिया।’ शोएब कुछ सोचते हुए आगे कहते हैं कि ‘शादी को कुछ दिन ही बीते थे कि एक रोज अम्मी-अब्बू मेरे दफ्तर आ गए। हालांकि वो मुझसे नहीं मिले, एचआर और मेरे मुस्लिम बॉस से मिलकर घर चले गए। उन लोगों की आपस में क्या बात हुई, मुझे नहीं पता। इसके ठीक तीन महीने बाद एचआर ने मुझ पर सीओओ को मेल करने का आरोप लगा दिया। तब मेरे बॉस ने कहा कि तुम्हें उसी दिन नौकरी से बाहर कर देना चाहिए था जिस दिन तुम्हारे अम्मी-अब्बू मुझसे मिलकर गए थे।’ शोएब कहते हैं कि ये सुनते ही मैं समझ गया था कि घरवालों को लगता है कि मेरी नौकरी चली जाएगी तो मैं आकांक्षा को छोड़कर घर चला जाऊंगा। इसलिए मैंने उसी दिन इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ दी। कई महीनों तक आंकाक्षा ने अकेले घर की जिम्मेदारी संभाली। आखिरकार मुझे दूसरी नौकरी मिल गई। शादी के पांच साल बाद तक घरवालों ने हमसे बात नहीं की। कुछ सालों बाद एक दिन अचानक आकांक्षा के भाई का फोन आया। उसने हालचाल लिया। आकांक्षा खुश थी, अपना धर्म, तीज त्योहार सब मना रही थी और अच्छी नौकरी भी कर रही थी। जाहिर है कि भाई के जरिए आकांक्षा के माता पिता तक बातें पहुंचीं। शादी के तीन साल के बाद एक दिन दिवाली वाला दिन था। आकांक्षा रंगोली बना रही थी, तभी फोन घनघनाया। देखा तो आकांक्षा की मां का फोन था। मां ने पूछा- कैसी हो? आकांक्षा ने जवाब दिया- ठीक हूं.. क्या कर रही हो? रंगोली बना रही हूं… इतना कहते ही आकांक्षा फफक कर रो पड़ीं। शोएब कहते हैं कि इसके बाद अक्सर फोन पर बात होने लगी। हालांकि संबंध वैसे तो नहीं हैं जैसे होने चाहिए, लेकिन बातचीत जरूर होती है। जब हमारी बेटी हुई तब पहली बार आकांक्षा का परिवार हमारे घर आया था। मेरे अम्मी-अब्बू भी दस साल में केवल एक बार मेरे घर आए। हां, हम आज तक अपने घर नहीं जा पाए। इस बात का बेहद अफसोस है। आकांक्षा और शोएब से मिलने के बाद मैं ऐसे ही एक और कपल शिवा तिवारी और महविश रिजवी के घर पहुंची। शिवा और महविश दोनों बरेली के रहने वाले हैं। इन्होंने पांच साल पहले परिवार के खिलाफ जाकर शादी की थी। महविश से मैं उनकी शादी के बारे में कुछ पूछती, उससे पहले ही वो बोल पड़ीं- ‘शादी की वजह से मां की ममता और अब्बू की मोहब्बत सब पीछे छूट गई। परिवारों के लिए मजहबी पहचान ज्यादा जरूरी हो गई। पांच साल गुजर गए हैं, लेकिन आज भी ऐसा कोई दिन नहीं होता जब मुझे अब्बू की याद नहीं आती।’ शिवा तिवारी और महविश रिजवी बरेली के बिशप कोनराड स्कूल में 11वीं में पढ़ते थे। शिवा एक अनुशासित छात्र और क्लास मॉनिटर थे। महविश उनके उलट क्लास की सबसे शरारती लड़की थीं। महविश के अब्बू आर्मी में थे। घर में भी सख्त कानून लागू थे जैसे- जोर से हंसना नहीं है। जोर से बोलना नहीं है। लड़कियां घर के काम करती हैं। समझदार होती हैं। इस वजह से महविश को लगता था कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहां वह अपनी सारी मनमानी कर सकती हैं। शिवा महविश के पिता से ठीक उलट थे, इसलिए ही महविश को शिवा से प्यार हो गया। महविश कहती हैं कि ‘हम तीन बहन एक भाई हैं। मैं घर में सबसे बड़ी थी। किसी हिंदू से शादी करना तो दूर, कभी दोस्ती करने के बारे में भी नहीं सोच सकती थी। अब्बू इतने सख्त मिजाज के थे कि किसी भी बात पर बेटियों की पिटाई कर देते थे। गुस्सा ज्यादा आ जाए तो बूट तक से मारते थे। अक्सर कहते थे कि इनकी शादी कर दो, शौहर दिन रात मारेगा न तो अक्ल ठिकाने आ जाएगी। भाई को हमेशा तवज्जो देते थे।’ महविश कहती हैं कि अब्बू के इस मिजाज को देखते हुए मैंने शिवा से शादी करने का फैसला कर लिया था। दस जनवरी साल 2010 को मैंने शिवा से कह दिया था कि उसे पसंद करती हूं। हालांकि शिवा इस पर राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि वह पंडित परिवार से हैं और उनका परिवार इस शादी के लिए कभी राजी नहीं होगा। एक साल तक बात करते-करते शिवा भी शादी के लिए राजी हो गए।’ जब शिवा के परिवार को भनक लगी कि हम दोनों रिलेशन में हैं तो उनकी बहन ने मुझे फोन करके खूब बुरा-भला कहा। कहने लगी कि मैंने उनके भाई को फंसा लिया है। हालांकि मैं ये समझती थी कि सब हमें अलग करना चाहते हैं, लेकिन हमने किसी की नहीं सुनी। जब शिवा ने अपनी मां को पहली बार बताया कि मुझसे शादी करना चाहते हैं तो उनका पहला शब्द यही कहा कि पागल हो गए हो क्या। महविश मुसलमान है। तुम्हारे पापा दिल के मरीज हैं। अभी-अभी ठीक हुए हैं। ये सब सुन लिया तो घर में आफत आ जाएगी। जब मैंने अपनी अम्मी से शिवा के बारे में बात कि तो उन्होंने कहा कि शिवा हिंदू लड़का है। हम तुम्हारी शादी किसी भी मुसलमान लड़के से करवा देंगे, लेकिन शिवा से नहीं। अम्मी ने ये बात अब्बू को नहीं बताई। उन्हें लगता था कि मैं शिवा को भूल जाऊंगी, लेकिन मैं जिद पर अड़ी रही। अम्मी ने कहा कि शिवा से शादी हो गई तो तुम अपने रोजे कैसे रखोगी? जब मरोगी तो कैसे होगा? कौन तुम्हें दफनाएगा? मैं उन्हें बार-बार एक ही बात कहती कि जैसे बाकी मुस्लिम के साथ होता है वैसे ही मेरा भी सब होगा।’ महविश पुराने दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि आखिर एक दिन घर के माहौल से तंग आकर साल 2014 में दिल्ली आ गई और यहां आकर पॉलिसी बाजार में नौकरी ढूंढ ली। कुछ दिन बाद शिवा ने कहा कि अब शादी कर लेनी चाहिए। तब मैंने अब्बू को शिवा के बारे में एक लंबा वॉट्सऐप मैसेज किया कि शिवा से शादी करना चाहती हूं, लेकिन उनकी रजामंदी के साथ। अब्बू ने मैसेज देख भी लिया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। अम्मी ने फौरन फोन किया और कहने लगीं कि शिवा तुम्हारा धर्म बदलवा देगा। तुम काफिर हो गई हो। अब्बू कह रहे हैं कि तुमने हमारी नाक कटवा दी है। अगर तुमने शिवा से शादी कर ली तो उसी दिन से तुम हमारे लिए मर जाओगी।’ ये कहते हुए महविश की आंखें भर आईं। खुद को संभालते हुए बोलीं- आखिरकार दोनों परिवारों की सहमति के बिना ही हम लोगों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली। शादी के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने मुझसे कॉन्टैक्ट किया और कहने लगे कि आपकी घर वापसी हुई है। हम आपको दहेज देना चाहते हैं। घर का सारा सामान और कुछ नकदी। हालांकि मैं और शिवा इसके लिए राजी नहीं थे। शिवा के घरवालों ने भी मुझे बहू मानने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कह दिया था कि महविश के साथ कभी घर नहीं आना। अब तुम्हारा इस घर में कोई हक नहीं। शिवा के परिवार ने महविश के सरनेम को लेकर भी आपत्ति जताई कि शादी हो गई है तो रिजवी क्यों लिखती है। लगभग दो साल पहले एक बार बहन का फोन आया था। पता नहीं कैसे ये बात अब्बू को पता लग गई। तब अब्बू ने साफ शब्दों में कह दिया कि जो भी मुझसे मतलब रखेगा, उसे घर छोड़कर जाना होगा। इसके बाद अम्मी का आखिरी फोन आया। उन्होंने कहा कि तुम हमारे लिए मर चुकी हो। इसके अलावा बददुआएं भी दीं। यहां तक कह दिया कि जब तुम्हारी बेटी घर से भागेगी तब पता लगेगा। उस दिन के बाद से मैंने अपने घरवालों का नंबर ब्लॉक कर दिया। शिवा कहते हैं कि मेरे बड़े भाई ने घर में कह रखा है कि अगर कोई महविश से बात करेगा तो वह घर छोड़कर चला जाएगा। परिवार के अलावा हमें तो दोस्तों से भी काफी कुछ सुनना पड़ा। लोग मजाकिया अंदाज में कह देते हैं शादी तो कर ली, अब निकाह भी कर लो। हिंदू दोस्त कहते हैं कि फेरे ले लो। उन्हें तो महविश के सिंदूर न लगाने से भी आपत्ति है। शिवा आगे कहते हैं कि किसी की तबीयत खराब होने पर कभी कभार घर जाता हूं तो बातें सुनने को मिलती हैं। पापा मेरे साथ घर के बाहर नहीं जाते। मुझे प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया गया। एक दफा मुझे मेरी बहन और जीजा ने अपने घर खाने पर बुलाया। जीजा मुझे समझाने लगे कि महविश को छोड़ दो, पुलिस का मामला मैं देख लूंगा। मैंने मना कर दिया तो प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया गया। हमारी शादी को पांच साल हो गया है, लेकिन आज भी हम कहीं जाते हैं तो मैरिज सर्टिफिकेट साथ रखते हैं। एक दफा हम हरिद्वार गए थे। फोर स्टार होटल में ऑनलाइन रूम बुक किया था। होटल पहुंचे तो उसने हिंदू-मुस्लिम जानकर कमरा देने से मना कर दिया। उसने कहा कि आप लोग पति-पत्नी नहीं हैं। अगर किसी को पता लगेगा कि हिंदू लड़का और मुस्लिम लड़की एक साथ यहां रुके हैं तो बवाल हो जाएगा। होटल वाले ने शिवा से बहुत बहस की। तब होटल वाले ने कहा रात बहुत ज्यादा हो गई है इसलिए सिर्फ एक रात के लिए कमरा मिलेगा, अगले दिन होटल छोड़ना होगा। इस हादसे के बाद से शिवा और महविश दोनों शादी का सर्टिफिकेट साथ लेकर चलते हैं। सर्टिफिकेट देखकर भी कई होटल वाले कमरा नहीं देते।
ब्लैकबोर्ड-हिंदू लड़के से शादी की तो अम्मी बोली तुम काफिर:पति को मैरिज सर्टिफिकेट लेकर चलना पड़ता है, मां कहती है- तेरी बेटी भागेगी तब पता चलेगा
📅 Published: January 1, 2026 |
📂 Category: India National
