‘भाई आतंकी, मैं नहीं, कनेक्शन निकले तो गोली मार दो’:हिजबुल कमांडर के रिश्तेदार पावर प्रोजेक्ट में, क्या पाकिस्तान की साजिश

📅 Published: December 22, 2025 | 📂 Category: India National

‘मैं 4 साल से पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहा हूं। ड्रिलिंग मशीन चलाता हूं। मैं कह रहा हूं कि अगर किसी आतंकी से मेरा लिंक निकले, मेरी कोई संदिग्ध एक्टिविटी मिले, तो मुझे बीच चौराहे पर खड़ा करके गोली मार दी जाए। मैं देश से गद्दारी नहीं कर सकता।’ ये बात कहते हुए शम्सुद्दीन दुख और गुस्से से भर जाते हैं। 50 साल के शम्सुद्दीन जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर बन रहे रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम करते हैं। पुलिस ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें लिखा है कि प्रोजेक्ट में काम कर रहे 29 लोगों का बैकग्राउंड संदिग्ध है। इनमें 5 का कनेक्शन किसी न किसी तरह से आतंकियों से जुड़ता है। शम्सुद्दीन भी इन 5 लोगों में हैं। उनका चचेरा भाई मोहम्मद अमीन उर्फ जहांगीर सरूरी वॉन्टेड आतंकी है। दैनिक भास्कर ने इस लिस्ट में शामिल सभी संदिग्ध नामों और उनके लिंक की पड़ताल की। जिन 5 कर्मचारियों पर आतंकी और ओवरग्राउंड वर्कर यानी OGW से लिंक होने का दावा किया गया है वे मोहम्मद इकबाल, शम्सुद्दीन, तनवीर अहमद, चांद मोहम्मद और मोहम्मद नैर हैं। हमने शम्सुद्दीन और तनवीर अहमद से बात की। इन पांचों में मोहम्मद इकबाल वॉन्टेड आतंकी जहांगीर सरूरी का सगा भाई है। तनवीर अहमद के पिता अब्दुल करीम बट्ट पर आरोप था कि वे जहांगीर सरूरी के मददगार थे, जिन्हें ओवर ग्राउंड वर्कर कहते हैं। अब्दुल करीम पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के मामला दर्ज हुआ। वे कई बार जेल भी गए। हालांकि अब रिहा होकर घर पर हैं। पुलिस बीच-बीच में वेरिफिकेशन के लिए उनके घर आती है। चांद मोहम्मद का पिता भी ओवर ग्राउंड वर्कर थे। मोहम्मद नैर के पिता आतंकी थे, जिन्होंने बाद में सरेंडर कर दिया था। इनके अलावा 22 संदिग्धों पर चोरी और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज हैं। पहले संदिग्ध: शम्सुद्दीन
शक की वजह: आतंकी जहांगीर सरूरी के चचेरे भाई
शम्सुद्दीन कहते हैं, ‘हां, ये सच है कि मेरा चचेरा भाई जहांगीर आतंकी है। वो 1992 में पाकिस्तान चला गया था। मैं तब 17 साल का था। हम उस वक्त आजादी की बातें सुनते थे। बाद में समझ आया कि ये बर्बादी की बात होती थी। जहांगीर को मैंने पाकिस्तान से लौटने के बाद सिर्फ एक बार देखा था। अब इस बात को 32-33 साल हो गए हैं। उसके बारे में आज तक पता नहीं चला।’ ‘ये भी सच है कि मेरे साथ इसी प्रोजेक्ट में जहांगीर सरूरी का सगा भाई मोहम्मद इकबाल भी काम करता है। वो कारपेंटर है। उससे हर हफ्ते या 10 दिन में पूछताछ होती रहती है। उसकी और उसके घर की तलाशी ली जाती है। जांच अधिकारियों को उसे रिपोर्ट करना होता है। ऐसे में उस पर भी लगातार नजर रखी जाती है। हमारा नाम एक फरार आतंकी की वजह से जुड़ा है। हमारी कोई एक्टिविटी गलत नहीं है।’ दूसरे संदिग्ध: तनवीर अहमद
शक की वजह: पिता पर आतंकियों के मदद करने का आरोप
तनवीर अहमद बताते हैं, ‘मैं इस प्रोजेक्ट साइट पर प्लंबर का काम करता हूं। तीन साल हो गए, रोज 12-12 घंटे ड्यूटी करता हूं। 12वीं पास हूं। उम्र 30 साल से ज्यादा है। मेरे चाचा जहांगीर सरूरी आतंकी बने, तब मैं पैदा भी नहीं हुआ था।’ हां, मेरे अब्बू अब्दुल करीम बट्ट को ओवर ग्राउंड वर्कर होने के आरेाप में अरेस्ट किया गया था। वे जेल भी गए। पुलिस वाले उनसे पूछताछ करने आते रहते थे। कोर्ट ने अब्बू को बाइज्जत बरी कर दिया है। फिर भी उन्हें ओवर ग्राउंड वर्कर कहकर मुझे भी टेरर लिंक से जोड़ा जा रहा है।’ ‘मैं कहना चाहता हूं कि अगर मेरी कोई एक्टिविटी संदिग्ध मिले, तो आप मुझे जो सजा देना चाहेंगे, मैं तैयार हूं। बस हमें बेवजह परेशान न किया जाए। हम लोग मजदूरी करके परिवार चला रहे हैं।’ कौन है फरार वॉन्टेड आतंकी जहांगीर सरूरी
मोहम्मद अमीन उर्फ ​​जहांगीर सरूरी को हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बताया गया है। वह 1992 से एक्टिव है। जहांगीर को जम्मू में सबसे लंबे वक्त तक जिंदा रहने वाले आतंकवादियों में से एक माना जाता है। उस पर डोडा-किश्तवाड़ में कई हत्याओं में शामिल होने का केस है। वह नवंबर 2018 में किश्तवाड़ में BJP नेता अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार की हत्या का मास्टरमाइंड था। NIA की चार्जशीट के मुताबिक, जहांगीर ने परिहार भाइयों की हत्या किश्तवाड़ का माहौल बिगाड़ने के इरादे से कराई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2019 में RSS कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा और उनके बॉडीगार्ड की हत्या की साजिश भी जहांगीर ने ही रची थी। जहांगीर ने डोडा–किश्तवाड़ बेल्ट में आतंकवाद को फिर से एक्टिव किया है। उसके नेटवर्क में कई स्थानीय युवक शामिल हैं। भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने जहांगीर को A++ कैटेगरी का आतंकवादी कमांडर घोषित किया है। उस पर पुलिस और NIA की ओर से 30 से 50 लाख रुपए का इनाम रखा है। BJP विधायक ने सबसे पहले जताया टेरर लिंक का शक
रतले पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले लोगों के टेरर लिंक पर सबसे पहले किश्तवाड़ की विधायक शगुन परिहार ने शक जताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रोजेक्ट में काम करने वाले कुछ लोगों के आतंकवादियों से संबंध हैं। इसके बाद किश्तवाड़ के SSP नरेश सिंह ने प्रोजेक्ट के सभी कर्मचारियों का वेरिफिकेशन कराया। कुल 1434 कर्मचारी, सबसे ज्यादा किश्तवाड़ के
पुलिस ने प्रोजेक्ट का काम देख रही कंपनी मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारियों का वेरिफिकेशन और रिकॉर्ड की जांच की। सभी कर्मचारियों की उनके पुलिस थाने में जांच कराई गई। इसमें पता चला कि प्रोजेक्ट में कुल 1434 लोग काम कर रहे हैं। इन सभी के पुलिस वेरिफिकेशन के बाद इंटरनल रिपोर्ट में बताया गया कि 29 लोग संदिग्ध हैं। इनमें से 5 का आतंकवाद से संबंध होने की बात कही गई है। इनमें से एक पर वाटर बॉडी के स्रोत को दूषित करने और दस्तावेजों में हेराफेरी करने का भी मामला है। बाकी 23 लोगों पर क्रिमिनल केस हैं। इन पर कब्जा करने या किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से तोड़फोड़ करने के आरोप हैं। SSP नरेश सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये प्रोजेक्ट पाकिस्तान के सबसे ज्यादा जोखिम वाले टारगेट में होने का खतरे में है। इसलिए ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति पर फिर से विचार करने की जरूरत है। वे कुछ भी कर सकते हैं, जिससे प्रोजेक्ट के लिए खतरा पैदा हो सकता है। SSP ने प्रोजेक्ट का काम देख रही एजेंसी से कहा है कि वे ऐसे कर्मचारियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। अगर इन सभी 29 लोगों को लेकर कुछ भी संदिग्ध बात सामने आती है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। कंपनी के COO बोले- कुछ लोग ब्लैकमेल कर रहे
पुलिस की इस जानकारी के बाद एजेंसी मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हरपाल सिंह ने कहा है कि हमारी तरफ से उन पर नजर रखी जा रही है। अगर कोई संदिग्ध एक्टिविटी नजर आती है, तो हम तुरंत सूचना देंगे। हरपाल सिंह ने दैनिक भास्कर को वीडियो भेजकर पूरे मामले पर जानकारी दी। वे कहते हैं, ‘मैं रतले डैम का प्रभारी हूं। पिछले कुछ दिनों से कुछ पॉलिटिकल लीडर और उनके लोकल सपोर्टर कोशिश कर रहे हैं कि प्रोजेक्ट के अधिकारी-वर्कर्स को डराया धमकाया जाए। गलत काम पूरे कराए जाएं। उनका मोटिव कंपनी में ठेका लेने का है। वे चाहते हैं कि बिना वैकेंसी के भर्ती हो जाए।’ 4 दिसंबर को हमारी एजेंसी के एचआर हेड पर घर लौटते समय अटैक हुआ। इस वजह से डर का माहौल बन गया। मेरे पास इस समय कोई भी वैकेंसी खाली नहीं है। कोई भी भर्ती नहीं हो सकती है। ‘यहां 133 मीटर का डैम बनाना है। कुछ लोग कंपनी को ब्लैकमेल कर रहे हैं। काम बंद कराना चाहते हैं। हमने देखा कि 300 लोग ज्यादा थे। सितंबर महीने में हमने लेबर कमिश्नर से परमिशन ली। हमने कहा कि इन्हें निकालने की परमिशन दी जाए। हमें परमिशन मिल गई है। हमने 200 लोगों को हटा दिया। साथ में ये भी कहा कि जब हमें जरूरत होगी, तो इन्हीं 200 लोगों में से भर्ती करेंगे।’ ‘कुछ लोग प्रेशर बना रहे हैं। हमारे कर्मचारी और अधिकारियों को डरा-धमका रहे हैं। ये गलत है। अगर हमें काम नहीं करने दिया जाएगा, तो ये प्रोजेक्ट हमें छोड़ना होगा। अगर ऐसा हुआ तो बहुत नुकसान होगा। हम लगातार पुलिस की जांच में सहयोग कर रहे हैं।‘ मुद्दा उठाने वालीं विधायक बोलीं– प्रोजेक्ट की सुरक्षा खतरे में
पावर प्रोजेक्ट में टेरर लिंक का मुद्दा उठाने वाली किश्तवाड़ से BJP विधायक शगुन परिहार पॉलिटिकल फैमिली से आती हैं। शगुन परिहार के पिता अजीत परिहार और चाचा अनिल परिहार BJP से जुड़े थे। 1 नवंबर, 2018 को जम्मू-कश्मीर के पंचायत चुनावों से पहले किश्तवाड़ शहर में घर के पास आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी थी। इसका आरोप आतंकी जहांगीर सरूरी पर लगा था। शगुन कहती हैं, ‘वे लोग हिजबुल मुजाहिदीन से लिंक रखते हैं। पाकिस्तान में 10 साल रहकर आए हैं। ऐसे आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों को प्रोजेक्ट में शामिल किया जाए, तो हमारे लोगों की सिक्योरिटी खतरे में होगी। कल को कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। कौन कह सकता है कि प्रोजेक्ट का मैप पाकिस्तान में पहुंचा होगा। इसकी जिम्मेदारी CM उमर अब्दुल्ला लेते हैं या महबूबा मुफ्ती लेती हैं।’ उमर बोले- विपक्ष के दो विधायक प्रोजेक्ट में दखल दे रहे
CM उमर अब्दुल्ला ने इस मसले पर कहा कि पावर कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी चुनी हुई सरकार के पास नहीं है। ये इल्जाम अगर मेरे किसी मंत्री पर होता, तो जांच शुरू हो जाती। ये प्रोजेक्ट सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं है, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए है। विपक्षी पार्टी के दो विधायक इसमें दखल दे रहे हैं।’ वहीं, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी पावर प्रोजेक्ट के कर्मचारियों की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना सबूत और कथित आतंकवादी संबंधों के आधार पर गरीब कर्मचारियों को निशाना बना रही है। कथित आतंकी संबंधों के आधार पर कर्मचारियों को मनमाने ढंग से निकालना खतरनाक तरीके से सामान्य हो गया है। अब इसे रतले पावर प्रोजेक्ट तक बढ़ाया जा रहा है।

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