संडे जज्बात- किन्नर हूं, लड़के ने मेरी मांग भर दी:पिता ने बाजार में पीटा, बाल कट डाले, लेकिन लड़का पीछे नहीं हटा- मुझे दुल्हन बनाया

📅 Published: January 11, 2026 | 📂 Category: India National

मेरा नाम सोनी है। पश्चिम बंगाल के बनगांव की रहने वाली हूं। मैंने खुद को हमेशा एक लड़की ही माना, लेकिन लोगों ने मुझे पहचान दी- किन्नर, हिजड़ा जैसे शब्दों से। लोग कहते थे, ‘न मां बन पाएगी, न किसी की दुल्हन… फिर इसके जीने का क्या मतलब?’ उन बातों को सुनते-सुनते मैं जी तो रही थी, लेकिन अंदर से लाश बन गई थी। पेट भरने के लिए ऑर्केस्ट्रा में नाचती थी। छपरा के जनता बाजार की एक दवा दुकान से शुरू हुई मेरे प्यार की कहानी। प्रेमी आदर्श को नहीं पता था कि मैं किन्नर हूं- फिर भी मुझे इंसान समझकर पास आया। वीडियो वायरल होते ही परिवार में बवाल मच गया। मां ने कहा- ‘किन्नर से शादी की तो बहनों का ब्याह नहीं होगा।’ मैं दो भाई, दो बहनों में सबसे छोटी हूं। पैदा होने पर जैसे एक लड़की होती है, मैं भी वैसे ही थी। जब थोड़ी बड़ी हुई, तो मेरे शरीर में अलग तरह के बदलाव दिखने शुरू हुए। 12-13 साल की उम्र के बाद जो बाकी लड़कियों में होता है, मेरे शरीर में नहीं हुआ। मुझे पीरियड्स नहीं आए। शरीर और मेरे हाव-भाव देखकर आस-पास के लोग कहने लगे- ये तो किन्नर पैदा हो गई है। अब तो इसे किन्नर लोग उठाकर ले जाएंगे। मैं उनकी बातें सुनकर डर के मारे कांपने लगती थी। मां पलटकर जवाब देती- मेरी बेटी है। मैंने पैदा किया है। अब वो जो भी है, जैसी भी है, मेरे ही साथ रहेगी। मेरे पापा खेती-बाड़ी और मछली-पालन करते हैं और मां घर संभालती हैं। 2019 की बात है। बीए दूसरे साल में थी। घर पर पैसे की दिक्कत थी तो मेरी एक सहेली ने मुझसे कहा- बिहार चलोगी। वहां पर काम है। पैसे मिलेंगे। मैंने पूछा- क्या काम है? सहेली बोली- वहां अलग-अलग कार्यक्रमों में डांस करना होगा। फिर मैंने सकुचाते हुए कहा- मुझे तो डांस नहीं आता। घूमने-फिरने का शौक है। घर पर पूछकर बताऊंगी। मैंने घर आकर मां को बताया कि बिहार जा रही हूं। एक महीने बाद घूमकर चली आऊंगी। मां ने इजाजत दे दी। मैं पश्चिम बंगाल से बिहार के छपरा आ गई। वहां मेरे ग्रुप में कई लड़कियां थीं। वे सभी मेरे पास के एक गांव की थीं। उस गांव की अमूमन लड़कियां दूसरे राज्यों में जाकर इसी तरह डांस करती हैं। उनके साथ मुझे भी ठेकेदार छपरा-सीवान के आस-पास जहां भी कार्यक्रम होता, साथ लेकर जाता था। स्टेज पर जब डांस होता तो मैं खड़ी की खड़ी रह जाती। मुझे डांस नहीं आता था। सामने भीड़ चिल्लाने लगती। भोजपुरी में कहती- इसे हटाओ, कहां से उठाकर ले आए हो। डांस नहीं करने आता, तो क्यों चली आती हैं। उस वक्त मुझे हिंदी, भोजपुरी नहीं समझ में आती थी। उसके बाद धीरे-धीरे डांस सीखना शुरू किया। एक महीना हुआ तो वापस घर आ गई। उस वक्त तक मैं आदर्श से नहीं मिली थी, न कभी देखी थी। 2021-22 की बात है। मेरे बड़े भाई तीन मंजिला बिल्डिंग से नीचे गिर गए। उनके शरीर की कई जगह से हड्डियां टूट गईं। वह महीनों बेड पर चले गए। उन्हीं की कमाई से घर चलता, जो कि मुश्किल हो गया था। मैंने सोचा- अब तो डांस सीख ही लिया है। बिहार जाकर ऑर्केस्ट्रा में नाचूंगी तो घर की हालत संभल जाएगी। फिर से वापस बिहार चली गई। वहां एक ठेकेदार के यहां रहने लगी। वह हमें कार्यक्रमों में नाचने के लिए ले जाता। इस समय तक मैं नाचना सीख गई थी। इतना अच्छा कि भीड़ मेरा ही डांस देखने के लिए बार-बार स्टेज पर बुलाती। मैं भी खूब नाचती थी। करीब 7 महीने डांस किया, लेकिन ठेकेदार ने पैसा नहीं दिया। मैं परेशान होने लगी। उसके साथ मेरी मार-पिटाई हो गई। उसके बाद मैं और बाकी लड़कियों को साथ लेकर छपरा के जनता बाजार आ गई। वहीं पर आदर्श की एक दवा की दुकान थी। उसकी परिवार को यह स्टोर खोले हुए कुछ ही महीने हुए थे। वह हर रोज दवा की दुकान पर सुबह से शाम तक बैठता था। मेरी टीम की कुछ लड़कियों की तबीयत खराब थी। सर्दी-खासी, बदन दर्द की दवा लेनी थी। मैं दवा लाने गई। आदर्श उस वक्त दुकान बंद कर रहा था। मैंने दवा का नाम बताया, तो उसने बोला- कुछ दवाइयां हैं। कुछ नहीं…। कल मंगवा दूंगा। मैंने अपना पता और मोबाइल नंबर दिया और कहा कि- वह मेरे कमरे पर पहुंचा दें। दूसरे दिन आदर्श दवा लेकर मेरे कमरे पर आया। उस दिन से वह अक्सर मुझसे बात करने लगा। उस वक्त तक उसे नहीं पता था कि मैं किन्नर हूं। करीब 6 महीने बाद आदर्श ने एक दिन मुझसे कहा कि वह मुझसे प्यार करता है। मैं मुस्कुराते हुए बोली- लोग ऐसे ही बोलते हैं। मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। अमूमन हर लड़के मुझसे यही कहते हैं। जब डांस करने जाती हूं तो वे मेरा फोन नंबर मांगते हैं। कहते हैं कि वह मुझसे शादी करना चाहते हैं। आदर्श शर्माते हुए बोला- मैं सच में प्यार करता हूं। मैंने उसे अपने पास बैठाया और समझाया- मैं किन्नर हूं। मैं सामान्य लड़की नहीं हूं। मैं कभी मां नहीं बन सकती। आदर्श सुनते ही बोला- … तुम मां नहीं बन सकती हो, तो क्या हुआ। हम दोनों साथ तो रह सकते हैं न ! मैं उसे डांटते हुए बोली- हर लड़का यही कहता है। बाद में धोखा देकर चला जाता है। मैं नाचने वाली हूं। किन्नर हूं। तुम्हारे घर वाले मुझे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। नाचती हूं, तो सिर्फ पेट की खातिर। यदि सच में मुझसे प्यार करते हो, तो अपने घर वालों को बताओ। दुनिया के सामने मुझे इज्जत देनी पड़ेगी। आदर्श हर बात के लिए तैयार हो गया। आखिर में हम दोनों ने एक साथ वीडियो बनाया, जो कि वायरल हो गया। आदर्श के घर वालों को पता चल गया कि वह एक किन्नर से प्यार करता है। उसने अपनी मां को बताया, तो मां फटकारते हुए बोलीं- नाचने वाली छक्का, हिजड़ा से ब्याह करोगे? पगला गए हो? करीब डेढ़-दो महीने तक ये सब चलता रहा। उसके घर वाले बहुत परेशान थे। एक दिन आदर्श के पिता ने भरे बाजार में लोगों के सामने उसकी खूब बेइज्जती की। खूब मारा-पीटा। उसके बाल कटवा दिए, ताकि वह मुझे अच्छा न लगे। लेकिन वह पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।। उस दिन आदर्श की मां ने उसे समझाते हुए कहा था- तुम घर में सबसे बड़े हो। तुम नचनिया, किन्नर से शादी करोगे, तो बाकी बच्चों का क्या होगा? कोई तुम्हारी बहन से ब्याह नहीं करेगा। पिता ने सालों विदेश में नौकरी की। सारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। लेकिन आदर्श ने कुछ नहीं माना। उसने खाना-पीना छोड़ दिया। उसकी मां परेशान होकर मुझे फोन करके कहतीं- बेटे ने अभी तक खाना नहीं खाया है। तुम बोलोगी, तो खा लेगा। लेकिन आदर्श जिद पर अड़ा था। करीब दो महीने बाद आदर्श ने मुझसे कहा- वह भी बंगाल आना चाहता है। आखिर मैंने उसे अपने पास बुला लिया। जिस दिन वह मेरे घर आया, उस दिन गांव के लोग मेरे दरवाजे पर जमा हो गए। कहने लगे- बिना शादी के अनजान लड़का कैसे किसी एक लड़की के साथ रह सकता है? पहले शादी करनी होगी, फिर दोनों साथ रह पाओगे। उसके बाद सारी रस्म-रिवाज के साथ हम दोनों पास के एक मंदिर में गए और शादी कर ली। क्या ही बताऊं। उस दिन जब आदर्श ने मेरी मांग भरी, तो ऐसा लगा जिंदगी की सारी मुराद पूरी हो गई। मुझे आज भी याद है- जब पहली बार पता चला था कि मैं किन्नर हूं, तो लगा था कि अब किसी की बहू नहीं बन पाऊंगी, न दुल्हन। उस वक्त किसी की मांग में सिंदूर देखती, तो लगता कि काश मैं भी ये सिंदूर, बिंदी बड़ी होकर किसी के नाम की लगा पाती! इस तरह आदर्श से मेरी शादी हो गई थी। आदर्श ने एक रोज कहा- तुम ऑर्केस्ट्रा में नाचना छोड़ दो। नाचती हो, तो मुझे अच्छा नहीं लगता। मैंने उसकी बात मान ली। अब हम दोनों मिलकर सोशल मीडिया पर ब्लॉगिंग करते हैं। वीडियो बनाते हैं। उससे कमाई अच्छी हुई है। उसी से अब अपना घर बनाने जा रही हूं। आदर्श अब भी अपने गांव जाता है। वह पटना से फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रहा है। वह अक्सर अफसोस जताता है कि- मेरा किन्नर पैदा होना गुनाह था क्या, जो इस समाज या उसके घर वालों ने नहीं अपनाया। उसे आज भी डर है कि अगर मैं उसके घर गई, तो घर और गांव वाले, बाहर कर देंगे। आदर्श के घर वालों का यही कहना है कि मुझसे शादी करने के बाद अब उनकी बेटियों की शादी नहीं हो पाएगी। उन्होंने हम दोनों को अपनाने से साफ-साफ इनकार कर दिया है। उनकी मां ने कहती हैं- यदि तुम लोग इस घर में आओगे, तो लोग हमें गांव से निकाल देंगे। उसके गांव के लोग कहते है- किन्नर ने मासूम से लड़के पर बंगाल का काला जादू कर दिया है। हिजड़ा कहीं का, अब किन्रर भी शादी करने लगी हैं भला, वो भी एक नॉर्मल लड़के से। लेकिन उन्हें क्या पता कि हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। लेकिन सोचती हूं कि आखिर मैं भी तो एक लड़की ही हूं न। शरीर, आत्मा सब लड़की का है। मेरी भी तो बाकियों की तरह जिंदगी है। बस मां नहीं बन सकती। इसके लिए भी मैं डॉक्टर से दिखवा रही हूं। यदि मां नहीं बनी तो क्या हुआ, कोई बच्चा गोद ले लूंगी। नहीं तो IVF करवाऊंगी। अब लोग मेरे पति आदर्श से पूछते हैं- किन्नर से शादी किया है, खुश कैसे रहते हो? उन्हें क्या पता कि जो संबंध एक लड़की और लड़के के बीच होता है। वही पति-पत्नी के बीच भी हो सकता है। हमारे बीच वैसा ही संबंध है। अब तो मैंने लोगों को जवाब देना ही छोड़ दिया है… (सोनी ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए हैं) —————————————————– 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया- 5 साल जेल रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी खबर यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-रिश्तेदार की लाश लेकर आया, मेरे गाल छूने लगा:लाशें जलाने के कारण शादी नहीं हुई- पति के बिना जी लूंगी, लाशों के बिना नहीं मैं टुम्पा दास- पश्चिम बंगाल में डोम समुदाय की पहली महिला हूं, जो पिछले कई सालों से कोलकाता के बड़िपुर गांव के श्मशान में लाशें जला रही हूं। पता नहीं भारत में कोई और महिला यह काम करती है या नहीं, पर मैंने यही रास्ता चुना… और यह रास्ता आसान नहीं था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

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