लखनऊ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज की 350 वीं शहीदी शताब्दी पर कीर्तन का आयोजन हुआ। संघ कार्यालय में श्री गुरु तेग बहादर साहिब सेवा समिति द्वारा गुरु ग्रन्थ साहिब की स्थापना एवं सत्संग-शब्द कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक कौशल ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ऐसे संत-योद्धा थे जिन्होंने न केवल अपने बल्कि दूसरों के धर्म की रक्षा हेतु अपना शीश समर्पित कर दिया । कश्मीरी पंडितों के संरक्षण के लिए गुरु जी ने स्वयं को बलिदान के लिए प्रस्तुत किया। कौशल ने बताया कि 500 कश्मीरी ब्राह्मणों के आग्रह पर गुरु जी दिल्ली पहुंचे जहाँ उन्हें पंच सिखों के साथ कैद किया गया। औरंगजेब द्वारा दिए गए तीन विकल्प इस्लाम स्वीकार करना, चमत्कार दिखाना या मृत्यु । गुरु जी ने धर्म पर अडिग रहते हुए मृत्यु को चुन लिया। उनके सामने ही भाई मतिदास, भाई दयाला और भाई सतिदास को निर्ममता से शहीद किया गया, पर गुरु जी अडिग रहे। 24 नवम्बर 1675 को चांदनी चौक (वर्तमान गुरुद्वारा शीश गंज साहिब) पर उनका शीश काट दिया गया। उनके बलिदान ने जबरन धर्मांतरण के अभियान को रोक दिया, इसी कारण उन्हें ‘हिन्द दी चादर’ कहा जाता है। गुरु ग्रन्थ साहिब को प्रान्त प्रचारक कौशल ने अपने शीश पर उठाकर गुरु स्थान तक पहुँचाया। समिति द्वारा गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर आधारित परिचय पत्रक का वितरण व लंगर का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में अयोध्या के महंत वैदेही बल्लभशरण , महंत ब्रह्मचारी , महंत निराला दास , महंत क्षत्तरदास , महंत रविदास , महंत मनीष दास समेत अनेक संतों ने हिस्सों लिया।
लखनऊ में गुरु तेग बहादुर के कीर्तन का आयोजन:बलिदान-संदेश को किया याद , कौशल बोले- गुरु ने धर्मांतरण को रोकने के लिए बलिदान दिया
📅 Published: November 21, 2025 |
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