चंडीगढ़ में लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) नियुक्त करने की केंद्र सरकार की तैयारी एक बार फिर विवाद खड़ा कर सकती है। 2016 में भी केंद्र सरकार को ऐसा ही फैसला भारी विरोध के चलते वापस लेना पड़ा था। उस समय केंद्र ने पूर्व आईएएस और भाजपा नेता केजे अलफॉस को चंडीगढ़ का अलग एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की घोषणा की थी, लेकिन पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह के कड़े विरोध के बाद केंद्र को यह फैसला रद्द करना पड़ा था। इस बार भी हालात आसान नहीं दिख रहे हैं। चंडीगढ़ पर पंजाब और हरियाणा पहले से ही हक जताते रहे हैं, और अब हिमाचल प्रदेश भी इस मुद्दे में अपनी बात रख रहा है। ऐसे में एलजी नियुक्ति का कदम राजनीतिक रूप से बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। पीयू सीनेट विवाद ने बढ़ाया तनाव पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट मेंबर संख्या 90 से घटाकर 31 करने के फैसले पर भी राजनीति गरमाई हुई है। उपराष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी हुए शिक्षा मंत्रालय के नोटिफिकेशन का पंजाब के सभी राजनीतिक दलों ने विरोध किया। विरोध बढ़ने के बाद केंद्र को यह नोटिफिकेशन वापस लेना पड़ा। पीयू में धरने-प्रदर्शन लगातार जारी हैं, और संगठनों ने 26 नवंबर को बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।2008-09 में भी जब यूपीए सरकार पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस देने जा रही थी, तब पंजाब सरकार ने शुरू में एनओसी दी, लेकिन विरोध बढ़ा तो उसे भी वापस ले लिया गया। पीयू पर हक तो जताता है, पर बजट नहीं देता पीयू को मिलने वाले बजट में 80% केंद्र और 20% हिस्सा पंजाब सरकार को देना होता है।लेकिन पंजाब सरकार कभी भी अपना पूरा 20% हिस्सा रिलीज नहीं करती, जिससे यूनिवर्सिटी की आर्थिक हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। अप्रैल 2022 से चंडीगढ़ में सेंट्रल सर्विस रुल्स लागू किए जा चुके हैं, जबकि पहले यहां पंजाब सर्विस रुल्स लागू होते थे।इस बदलाव के बाद से भी राजनीतिक विवाद जारी है।
चंडीगढ़ में एलजी नियुक्ति का विवाद फिर गर्माएगा:2016 में भी बैकफुट पर आया था केंद्र, विरोध के चलते वापस लिया था फैसला
📅 Published: November 23, 2025 |
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