नगर कीर्तन में दिखा खालसा का रौब:गुरु तेगबहादुर के शहीदी पर्व के उपलक्ष्य पर निकला नगर कीर्तन, मुगलों के अत्याचार की झांकी देख आंखें हुई नम

📅 Published: November 23, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

अद्भुत शौर्य और लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर करने वाला साहस। नन्हे सिखों की तलवारबाजी का जौहर और छाती पर हथौड़े का वार सहता खालसा। सवा लाख से एक लड़ावा के गुरु कथन को साबित करता सिखों का जज्बा। यह नजारा था रविवार को निकले नगर कीर्तन का। सिखों के 9वें गुरु तेग बहादुर का तीन दिवसीय शहीदी पर्व रविवार से शुरू हुआ। श्रीगुरु सिंह सभा कानपुर महानगर की ओर से शुरू हुए शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में रविवार को नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें गतका दल ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया और सभी को चौंकाकर रख दिया। शहर भर में यह नगर कीर्तन निकला, जिसका फूल बरसाकर स्वागत किया गया। मुगलों के अत्याचार याद का भीगी आंखे पंच प्यारों की अगुवाई में रविवार को नगर कीर्तन निकाला गया। सबसे आगे पंच प्यारे चल रहे थे, जिसके बाद गुरु की झांकी थी। इस दौरान विभिन्न झांकियां सजाई गई थी, जिसमें मुगलों के जुल्मो सितम की झांकियां भी शामिल थी। झांकियों के माध्यम से बताया गया कि मुगल शासकों ने किस तरह से गुरुओं और उनके परिवार पर अत्याचार किए। लेकिन मानवता की रक्षा के लिए गुरुओं ने हंसते-हंसते अपना और अपने परिवार का बलिदान दे दिया, लेकिन अत्याचारियों के सामने झ़ुके नहीं। इस बलिदान को याद कर सभी की आंखें नम हो गई। फूल बरसाकर हुआ नगर कीर्तन का स्वागत शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में निकाले गए नगर कीर्तन की शुरूआत गुरुद्वारा बाबा श्रीचंद्र दरबार से हुई। सबसे आगे पंच प्यारे थे और पीछे हजारों की संख्या में सिख समाज के लोग नगर कीर्तन के साथ मौजूद थे। नगर कीर्तन शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा। जहां लोगों ने फूल बरसाकर नगर कीर्तन का स्वागत किया। नगर कीर्तन में एक ओर रागी जत्था गुरु महिमा का बखान कर रहा था, वहीं गतका दल खालसा के शौर्य और साहस का प्रदर्शन कर रहा था। नगर कीर्तन में दशमेष शस्त्र दल के सदस्य पंजाबी युद्धकला गतका का प्रदर्शन किया। तीर, तलवार, भाले का वार सहता हुआ खालसा और दुश्मनों के दांत खट्‌टे करने वाले सिखों की वीरता सभी ने देखी। शाही सवारी के आगे करते रहे सफाई नगर कीर्तन के दौरान नगाड़ा बजाकर लोगों को सावधान किया जा रहा था कि गुरु महाराज की सवारी आ रही है। गुरु महाराज की पालकी के आगे-आगे सिख समाज के लोग चल रहे थे, जो झाडू लगा रहे थे और पानी डालकर सड़क को साफ करते चल रहे थे। अमृतसर दरबार साहिब के दरबारी बिगुल बजा रहे थे।जिन्हें विशेष रूप से अमृतसर से बुलाया गया था।विशेष सजे हुऐ रथ पर गुरु महाराज की शाही सवारी थी।इनके पीछे शबद कीर्तन करती महिलाएं चल रही थीं। जगह-जगह फूलों की वर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया गया। गुब्बारे उड़ाकर दिया विश्व शांति का संदेश श्रीगुरु सिंह सभा के चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह व प्रधान सिमरनजीत सिंह ने हरी झंडी दिखाकरनगर कीर्तन को रवाना किया। नगर कीर्तन की अगुवाई पंज प्यारों ने की, जो गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया में तलवारें लिए आगे चल रहे थे। वाहे गुरु का जाप भी हो रहा था। नगर कीर्तन के दौरान सफेद गुब्बारे उड़ाकर विश्व शांति का संदेश दिया गया। 10 गुरु साहिबान की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। इसमें गुरु नानकदेव, गुरु अंगददेव, गुरु अमरदास, गुरु रामदास, गुरु अर्जुन देव, गुरु हरिगोबिंद, गुरु हरिराय, गुरु हरिकृष्ण, गुरु तेग बहादु, गुरु गोबिंद सिंह की झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। पालकी साहिब को कंधे में लेकर पहुंचे पांडाल नगर कीर्तन गोविंदनगर, बाटा चौराहा, चावला मार्केट, कबाड़ी मार्केट, संत नगर चौराहा, गुरुद्वारा कीर्तनगढ़, अशोक नगर होते हुए गुरु गोविंद सिंह द्वार पर पहुंचा। यहां हजारों श्रद्धालु गुरु साहिब के सवारी का आगमन का इंतजार कर रहे थे। सभी सावधानी से अदब में खड़े हो गए। गुरु गोबिंद सिंह द्वार पर रथ से उतार कर गुरु साहिब की पावन बीड़ साहिब को पालकी साहिबजी में सजाया गया, जहां पर सिख नौजवान वीरों ने पालकी साहब को कंधों में उठाकर पंडाल तक पहुंचाया। इस दौरान सिख संगत सड़क के दोनों तरफ खड़े होकर पुष्प वर्षा कर रही थी। गुरु का शहीदी पर्व तीन दिन तक चलेगा और विभिन्न धार्मिक आयोजन जारी रहेंगे।

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