आंखों देखे गवाह पर सुनाया चंडीगढ़ कोर्ट ने फैसला:नहीं चली ब्रेक फैल होने की दलील, परिजनों को 16.44 लाख मुआवजा देने के आदेश

📅 Published: January 18, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में हुए सड़क हादसे में सागर की मौत के मामले में चंडीगढ़ कोर्ट ने आंखों देखे गवाह के बयान, एफआईआर और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर माना कि यह हादसा पूरी तरह चालक की लापरवाही का नतीजा था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर सिर की चोट बताया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि सागर की मृत्यु सीधे तौर पर हादसे में लगी चोटों के कारण हुई। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने मृतक के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने हादसे को तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का नतीजा मानते हुए कुल 16 लाख 44 हजार रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यह राशि वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से अदा करनी होगी। मुआवजे पर दावा दायर करने की तारीख से अदायगी तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। जानिए कैसे हुआ हादसा कोर्ट के अनुसार, 26/27 अक्टूबर 2024 की रात सागर मारुति टूर कार में सवार होकर बारोट से गलासियानी की ओर जा रहा था। यह वाहन पुलिस स्टेशन टिक्कन, जिला मंडी के अधिकार क्षेत्र में लिंक रोड पर चल रहा था। वाहन चालक ने कार को तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाया। मोड़ पर चालक का नियंत्रण हट गया, कार सड़क की पैरा पेट से टकराई और करीब 80 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में वाहन में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। ब्रेक फेल होने की दलील खारिज वाहन मालिक की ओर से ब्रेक फेल होने की दलील दी गई, लेकिन कोर्ट ने इसे बिना सबूत की दलील मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की मैकेनिकल खराबी साबित करने के लिए कोई तकनीकी या विशेषज्ञ रिपोर्ट पेश नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि मृतक की आमदनी से जुड़े कोई दस्तावेज पेश नहीं किए गए। इसलिए उसकी आय 10 हजार रुपए महीने मानकर मुआवजे की गणना की गई। इसमें भविष्य में आय बढ़ने की संभावना भी जोड़ी गई। तय नियमों के अनुसार गुणक लगाकर कुल मुआवजा तय किया गया। इसके साथ ही अंतिम संस्कार का खर्च, संपत्ति की हानि और माता-पिता को बेटे के निधन से हुई भावनात्मक क्षति (फीलियल कंसोर्टियम) के लिए भी अलग-अलग राशि दी गई। नहीं कम होगी सरकार से मिली सहायता बीमा कंपनी की ओर से यह दलील दी गई कि परिजनों को सरकार की ओर से 4 लाख रुपए की सहायता मिली है, जिसे मुआवजे से घटाया जाए। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सरकारी सहायता सामाजिक कल्याण के तहत दी जाती है और इसे मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले मुआवजे से घटाया नहीं जा सकता।

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