चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के लिए आज नामांकन होगा। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नामांकन का टाइम तय किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि अभी तक किसी भी पार्टी ने मेयर पद के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। नामांकन के लिए एक ही दिन मिलेगा। सोर्सेज के मुताबिक भाजपा काे टक्कर देने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस में फिर गठबंधन हो सकता है। हाल ही में AAP ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ मिलाकर हंसते हुए फोटो पोस्ट कर सवाल खड़े किए थे। AAP को इस चुनाव में पार्षदों की दलबदली का शक है, इसलिए सभी 11 पार्षदों को रोपड़ के एक होटल में ले जाया गया है। उनके मोबाइल भी बंद करा दिए गए हैं। आज दोपहर के समय महज उन पार्षदों को ही लाया जाएगा, जिनकी तरफ से नामांकन या फिर प्रस्तावित पार्षदों को लाया जाएगा। चुनाव तक इन सभी को शहर से बाहर रखने की तैयारी है। वहीं कांग्रेस की तरफ से इस मामले में AAP से गठबंधन की उम्मीद है। इसको लेकर चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की लगातार पार्षदों से मीटिंग कर रहे हैं। एचएस लक्की ने साफ किया कि AAP से गठबंधन नहीं सिर्फ अंडरस्टैंडिंग होगी। इसमें मेयर पद AAP और सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर पद कांग्रेस के खाते में जाएंगे। पहली बार मेयर का चुनाव हाथ खड़े कर होगा। अब तक सीक्रेट बैलेट से वोटिंग होती थी। हालांकि हाथ हाउस में खड़े कराए जाएंगे या बंद कमरे में, इसको लेकर अभी स्थिति क्लियर नहीं है। निगम में मेयर चुनाव का गणित क्या?
नगर निगम में मेयर चुनाव के लिए कुल 35 पार्षदों और 1 सांसद की वोट मान्य होती है। मेयर बनाने के लिए 19 पार्षदों का समर्थन चाहिए। मौजूदा वक्त में भाजपा के पास 18 पार्षद हैं। वहीं AAP के पास 11 पार्षद हैं। कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं जबकि सांसद भी कांग्रेस का है। ऐसे में अगर AAP और कांग्रेस साथ आए तो दोनों तरफ की वोटें 18-18 यानी बराबर हो जांएगी। इसी वजह से ये चुनाव दिलचस्प बना हुआ है। भाजपा कैसे बना सकती है मेयर, 3 सिनेरियो… 1. भाजपा के पास 18 पार्षद हैं, अभी भी भाजपा विपक्षी दलों के पार्षदों से संपर्क कर रही है। अगर कोई पार्षद उनके साथ आता है तो भाजपा के वोट 19 और विपक्ष के 17 रह जाएंगे, ऐसे में भाजपा मेयर बना सकती है। 2. दूसरा सिनेरियो ये है कि अगर विपक्ष का कोई पार्षद वोटिंग के वक्त गैरहाजिर हो जाता है और भाजपा के सभी पार्षद वोटिंग करते हैं तो फिर इससे भी भाजपा का मेयर बन सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मेयर के साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद भी भाजपा कब्जा सकती है। 3. कांग्रेस में खींचतान चल रही है। कांग्रेस के पास अभी 6 पार्षद बचे हैं। जिनमें सभी सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर दावेदारी ठोक रहे हैं। अगर उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया जाता तो वह बगावत कर सकते हैं। वह भाजपा के हक में वोटिंग कर सकते हैं या वोटिंग से गैरहाजिर भी रह सकते हैं। निगम में अब तक 4 मेयर कैसे बने? चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद चुनाव की टर्म 5 साल की होती है। हालांकि मेयर का चुनाव हर साल होता है। इस लिहाज से 5 साल में 5 मेयर बनते हैं। लेकिन पार्षद वही रहते हैं। निगम में कुल 35 पार्षद हैं। चंडीगढ़ के सांसद को एक्स ऑफिशियो मेंबर माना जाता है। उन्हें मेयर चुनाव में वोटिंग का भी अधिकार होता है। पहले चुनाव गुप्त मतदान यानी सीक्रेट बैलेट से होता था। जिसमें अक्सर क्रॉस-वोटिंग या विवाद होते हैं। इसलिए इस बार वोटिंग हाथ खड़े करवाकर होगी।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव- नामांकन आज:AAP ने 11 पार्षद रोपड़ भेजे, कांग्रेस से गठबंधन संभव; BJP और विपक्ष के पास 18-18 वोटें
📅 Published: January 22, 2026 |
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