जालंधर में हनुमान चालीसा पढ़ते महिला का ऑपरेशन:डॉक्टरों ने बिना बेहोश किए ब्रेन ट्यूमर निकाला, 3 घंटे तक चली सर्जरी

📅 Published: January 24, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

जालंधर के प्राइवेट अस्पताल ने महिला का बिना बेहोश किए ब्रेन ट्यूमर निकाला। ऑपरेशन के दौरान महिला को डॉक्टरों ने कुछ न कुछ बोलते रहने के की सलाह दी थी। डॉक्टरों के अनुसार महिला के ब्रेन में बोलने वाले सिग्नल की जगह ट्यूमर था। सिग्नल का पता लगाने के लिए उसे बोलने की सलाह दी थी। इससे पूरे ऑपरेशन के दौरान महिला हनुमान चालीसा का पाठ करती रही।हनुमान चालीसा पढ़ते हुए महिला का डॉक्टरों ने ब्रेन ट्यूमर निकाल दिया है। इस दौरान महिला को डॉक्टरों ने गिनती सुनाने के लिए भी कहा। महिला नवांशहर की रहने वाली है। 42 साल की महिला की ब्रेन सर्जरी कठिन थी। डॉक्टरों का कहना है कि बिना बेहोश किए सर्जरी करना काफी रिस्की रहता है। लेकिन इस मामले में ये जरूरी था। ये ऑपरेशन 17 जनवरी को किया गया था। शनिवार को उसे छुट्‌टी दी गई। कैसे हुआ ऑपरेशन, डॉक्टर ने बताई पूरी कहानी… बोलने-भाषा समझने की शक्ति को कंट्रोल करने वाले हिस्से में था ट्यूमर
प्राइवेट अस्पताल के न्यूरो और स्पाइन सर्जन डॉ. मनबचन सिंह ने बताया कि यह ट्यूमर दिमाग के उस हिस्से में था जो इंसान के बोलने और भाषा समझने की शक्ति को कंट्रोल करता है। अगर ऑपरेशन के दौरान जरा सी भी चूक होती, तो महिला हमेशा के लिए अपनी आवाज खो सकती थी। बोलने की शक्ति पर असर जांचने के लिए नहीं किया बेहोश
डॉक्टर ने बताया कि अगर महिला को पूरी तरह बेहोश करके सर्जरी की जाती, तो यह पता लगाना नामुमकिन होता कि उसके बोलने की शक्ति पर क्या असर पड़ रहा है। इस खतरे को टालने के लिए ‘अवेक ब्रेन सर्जरी’ तकनीक का फैसला लिया। इसमें मरीज को बेहोश नहीं किया जाता ताकि वह डॉक्टरों से बात कर सके। आधुनिक मशीनों का हुआ इस्तेमाल
ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए एनेस्थीसिया टीम के डॉ. यासिर रजक और डॉ. सौरव भटेजा ने सहयोग दिया। न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम की मदद से ट्यूमर की सटीक जगह का पता लगाया गया। सीयूएसए मशीन के जरिए ट्यूमर को बहुत सावधानी से धीरे-धीरे हटाया गया ताकि बोलने वाली नसें सुरक्षित रहें। तीन घंटे तक हनुमान चालीसा पढ़ती रही महिला
करीब तीन घंटे चली इस सर्जरी के दौरान महिला लगातार डॉक्टरों के सवालों के जवाब देती रही। हिम्मत बनाए रखने के लिए वह हनुमान चालीसा पढ़ती रही। इससे डॉक्टरों को हर पल यह फीडबैक मिलता रहा कि दिमाग का वह हिस्सा सही काम कर रहा है। अब महिला पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी बोलने व समझने की शक्ति सुरक्षित है।

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