चीन वैज्ञानिकों का दावा-अल्ट्रासाउंड से डिप्रेशन-अल्जाइमर का इलाज:बिना सर्जरी पढ़ा जा सकेगा इंसानी दिमाग, चिप लगाने की जरूरत नहीं

📅 Published: January 31, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

अभी तक ‘न्यूरालिंक’ जैसी कंपनियां दिमाग में चिप लगाने की बात कर रही हैं, लेकिन चीन का नया स्टार्टअप ‘गेस्टाला’ एक कदम आगे निकल गया है। कंपनी का दावा है कि वह बिना किसी सर्जरी या चिप के, सिर्फ अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए इंसानी दिमाग को पढ़ सकेगी।
दो डिवाइस, जो लाएंगी बदलाव:

पहला क्लिनिक मशीन है। यह दिमाग के उस हिस्से को टारगेट करेगी जो ‘दर्द’ महसूस करता है। ट्रायल में पाया गया कि इससे मरीजों को एक हफ्ते तक दर्द से राहत मिली। दूसरा स्मार्ट हेलमेट, यह एक पहनने योग्य डिवाइस होगी। मरीज इसे घर पर पहनकर डॉक्टर की निगरानी में डिप्रेशन, अल्जाइमर और नींद की बीमारियों का इलाज कर सकेंगे।
मस्क की चिप वर्सेस चीन का अल्ट्रासाउंड
विशेषता: न्यूरालिंक चिप तकनीक है, वहीं जेस्टाला अल्ट्रासाउंड तकनीक है।
प्रक्रिया: मस्क की चिप में सर्जरी करके दिमाग में चिप लगानी पड़ती है। ‘जेस्टाला’ की तकनीक में बिना सर्जरी करके दिमाग में चिप लगाई जाएगी। इसमें बाहरी तरंगों का उपयोग होगा।
पहुंच: मस्क की चिप सिर्फ मोटर कॉर्टेक्स (सीमित हिस्सा) तक सीमित, चीनी तकनीक में दिमाग के गहरे और पूरे हिस्सों तक पहुंच।
उद्देश्य: मस्क की चिप का उद्देश्य मशीनों को कंट्रोल करना, सुपरह्यूमन बनाना है। वहीं, गेस्टाला का उद्देश्य ब्रेन को हेल्दी रखना और बीमारियों का इलाज है।

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