बोस्टन से पहुंचे डॉक्टर्स ने मेरठ में लगाए पेसमेकर:जसवंत राय अस्पताल में डॉ राजीव अग्रवाल के नेतृत्व लगाया गया 28 वा कैंप

📅 Published: February 9, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

मेरठ के जसवंत राय स्पेशलिटी अस्पताल में कार्डियो चैरिटी एवं बोस्टन कार्डियक फाउंडेशन के सहयोग से 28वां निशुल्क स्थाई पेसमेकर (Permanent Pacemaker) कैंप सोमवार को आयोजित किया गया। दो दिन चलने वाले इस कैंप में 14 आर्थिक रूप से कमजोर हृदय रोगियों को पूरी तरह मुफ्त पेसमेकर लगाए जाएंगे।
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल (कार्डियो चैरिटी) ने बताया कि एक पेसमेकर लगाने की सामान्य लागत 1.50 लाख से 2 लाख रुपये तक आती है, लेकिन इस कैंप के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को यह सुविधा बिना किसी खर्च के उपलब्ध कराई गई। उन्होंने बताया कि जसवंत राय स्पेशलिटी अस्पताल में अब तक कुल 735 से अधिक मरीजों को निशुल्क पेसमेकर लगाए जा चुके हैं, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने आप में एक रिकॉर्ड और बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली के कारण हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पेसमेकर लगाने की प्रक्रिया में लगभग 30 मिनट का समय लगता है, जिसके बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। एक पेसमेकर 10 से 15 वर्षों तक कार्य करता है और आवश्यकता पड़ने पर उसकी बैटरी या उपकरण बदला भी जा सकता है। सभी मरीजों को भविष्य में दवाइयां, अस्पताल सेवाएं और मेडिकल फॉलोअप भी निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। पेसमेकर लगाने की प्रक्रिया वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. राकेश मौर्या, बोस्टन से आए बोस्टन कार्डियक फाउंडेशन के प्रेसिडेंट डॉ. सलिल मिड्डा और उनकी टीम द्वारा संपन्न कराई गई।
बोस्टन से आए बोस्टन कार्डियक फाउंडेशन के प्रेसिडेंट डॉ. सलिल मिड्डा ने बताया कि इस साल मेरे साथ पांच लोगों की टीम आई है जिसमें दो डॉक्टर, एक नर्स, एक कंपनी का टेक्नीशियन और एक रेडियोलोजिस्ट रहता है। इसके साथ साथ डॉ राजीव अग्रवाल और उनकी पूरी टीम का हमे पूरा सहयोग इस कार्य के दौरान मिलता है।
मेरठ की रहने वाली शीला ने बताया कि पहली बार 2007 में मैं जसवंत राय अस्पताल में आई थी। उस समय डॉक्टर राजीव अग्रवाल ने मेरा इलाज कर मेरी जान बचाई और मुझे पेसमेकर लगाया। इसके 10 साल बाद मुझे दूसरा पेसमेकर भी लगाया गया, इतना ही नहीं अगले साल तक अगर मैं जीवित रही तो निश्चित रूव से तीसरा पेसमेकर भी यहीं लगेगा। मेरी जान बचाने वाले इन डॉक्टर के लिए मैं हर साल कैंप में फूल या अन्य उपहार लेकर पहुंचती हूं क्योंकि इन सभी की वजह से ही मुझे दूसरा जीवन मिला है।

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