पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन की हलचल तेज:गवर्नर की यात्रा में सीक्रेट मीटिंग, इसमें डेरा ब्यास मुखी भी; कांग्रेस ने समझौता एक्सप्रेस बताया

📅 Published: February 10, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल और BJP के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार को फिरोजपुर में पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने नशामुक्ति को लेकर पदयात्रा निकाली। इसमें BJP के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा के साथ अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल भी शामिल हुए। 2020 में गठबंधन टूटने के बाद यह पहला मौका है, जब दोनों दलों की लीडरशिप ने सार्वजनिक कार्यक्रम में एक साथ हिस्सा लिया। इसके अलावा यात्रा के दौरान स्कूल के बंद कमरे में डेरा मुखी, गवर्नर और भाजपा नेताओं की मीटिंग हुई। जिसको लेकर पॉलिटिक्स में हलचल मच गई। कांग्रेस ने गवर्नर की यात्रा को समझौता एक्सप्रेस कहा तो AAP बोली कि गवर्नर की यात्रा से पॉलिटिक्स की स्मैल आ रही है। इस यात्रा में डेरा ब्यास के बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो भी शामिल हुए। इसके बाद शाम को हाल ही में जेल से बाहर आए पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया भी डेरा मुखी से मिलने ब्यास पहुंचे। मजीठिया लगातार गठबंधन की पैरवी कर रहे हैं। दूसरी तरफ विरोधी दल गवर्नर के नशा मुक्ति कार्यक्रम में एक मंच पर भाजपा और अकाली दल के नेताओं के आने को लेकर कह रहे हैं कि इन्हीं दोनों की वजह से पंजाब में नशा पहुंचा है। डेरा मुखी और गवर्नर में बंद कमरा मीटिंग
फिरोजपुर में नशामुक्ति की पदयात्रा के बाद डेरा ब्यास मुखी बाबा गुरिंदर ढिल्लो और गवर्नर गुलाब चंद कटारिया के बीच बंद कमरे में 22 मिनट की मीटिंग हुई। सरकारी स्कूल में हुई इस मीटिंग में भाजपा के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा और राणा गुरमीत सोढ़ी भी मौजूद रहे। मीटिंग में क्या चर्चा हुई, इसके बारे में तो कुछ पता नहीं चल पाया लेकिन राजनीतिक तौर पर इसे गठबंधन की चर्चा से ही जोड़कर देखा जा रहा है। डेरा ब्यास की भूमिका चर्चित क्यों
अकाली दल और भाजपा के बीच 2027 से पहले गठबंधन में डेरा ब्यास मुखी की भूमिका को विरोधी अहम तौर पर देख रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि 7 महीने से जेल में बंद अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से सुबह उनकी मुलाकात हुई और दोपहर तक मजीठिया को जमानत मिल गई। मुलाकात के बाद उन्होंने मजीठिया पर दर्ज हुए केस को भी गलत करार दे दिया था। इसके बाद CM भगवंत मान ने नाम लिए बगैर डेरा मुखी पर तंज कस दिया था कि मुलाकाती ही जज बन गए। ऐसे में अब डेरा मुखी की राजनीतिक सिनेरियो में बढ़ी सक्रियता पर विरोधियों की नजर टिकी हुई है। सीक्रेट मीटिंग पर किसने क्या कहा.. गठबंधन पर मजीठिया की 3 अहम बातें… कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा था गठबंधन
अकाली दल और भाजपा का गठबंधन 2020 में केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों के मुद्दे पर टूटा। अकाली दल ने कहा कि ये कानून पंजाब के किसानों के हितों के खिलाफ हैं, जबकि भाजपा ने केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया। किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इसे देखते हुए भारी विरोध और दबाव के कारण अकाली दल ने NDA से बाहर होने का फैसला लिया। इसके बाद 2022 के चुनाव में भाजपा सिर्फ 2 और अकाली दल महज 3 ही सीट जीत सका।

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