बांग्लादेश में चुनाव के पहले राजधानी ढाका करीब-करीब खाली है। सड़कों पर ट्रैफिक न के बराबर है। देशभर से बड़ी तादाद में लोग काम के लिए ढाका आते हैं। वे 12 फरवरी यानी आज होने वाली वोटिंग के लिए लौट रहे हैं। अंतरिम सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को 3 दिन की छुट्टी दे दी है। प्राइवेट वर्कर्स को 4 दिन की छुट्टी दी गई है। ट्रेनें खचाखच भरी हैं। लोग छतों पर बैठकर सफर कर रहे हैं। बांग्लादेश में दो दिन पहले चुनावी प्रचार खत्म हो चुका है। इस बार पूर्व PM खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे है। पार्टी ने पिछली बार 2001 में सरकार बनाई थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP को कुल 300 में से 130-140 सीटें मिल सकती हैं। दूसरे नंबर पर जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन है, जिसे 90 से 100 सीटें मिलने के आसार हैं। लगातार 4 बार से चुनाव जीत रही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार मैदान में नहीं है। दैनिक भास्कर ने चुनाव के मुद्दों और पार्टियों की स्थिति पर आम लोगों के अलावा एक्सपर्ट्स से बात की। 9 घंटे वोटिंग, 13 फरवरी की सुबह तक रिजल्ट
चुनाव के लिए वोटिंग 12 फरवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू होगी और शाम 4:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद काउंटिंग शुरू हो जाएगी। बांग्लादेश में बैलेट पेपर से ही चुनाव होता है। इसलिए वोटों की गिनती में ज्यादा वक्त लगता है। बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 300 सीटों पर वोटिंग के लिए 64 जिलों में 42,761 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ वोटर हैं। पहली बार डाक से वोट देने की सुविधा दी गई है। इसका फायदा करीब 1.5 करोड़ वोटर्स को होगा, जो काम के लिए घर से दूर चले गए हैं। 350 सीटों वाली संसद में 300 सांसदों के लिए चुनाव होता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। रिजर्व सीटें चुनाव के नतीजों के हिसाब से मिलती हैं, जैसे अगर BNP को 120 सीटें मिलती हैं, तो उसे महिलाओं के लिए रिजर्व 20 सीटें मिलेंगी। अवामी लीग के न होने से BNP को फायदा
बांग्लादेश में करीब 10% हिंदू आबादी हैं। हिंदू वोटर अवामी लीग के वोटर रहे हैं। अवामी लीग ने 2024 के चुनाव में 272 सीटें जीती थीं। उसे 30 से 40% वोट मिलते रहे हैं। इस बार ये वोट बैंक किसके हिस्से में जाएगा, यही सवाल है। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध का फायदा BNP को होता दिख रहा है। हिंदू वोटर जमात से दूरी बनाते दिख रहे हैं क्योंकि जमात का नाम अल्पसंख्यकों पर हमले में आता रहा है। ऐसे में उनका झुकाव BNP की ओर दिख रहा है। ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में मिले डॉ. सुनीरमल रॉय कहते हैं, ‘हमें पता है कि जमात-ए-इस्लामी इस्लामिक पार्टी है। BNP लोकतांत्रिक पार्टी है।’ पेशे से बिजनेसमैन मोहम्मद शौकत अजीज BNP के ऑफिस के बाहर खड़े मिले। वे कहते हैं, ‘बांग्लादेश के लोगों ने आजादी के लिए मुक्ति संग्राम लड़ा था। वह संग्राम इसी मतदान के अधिकार और लोकतंत्र के लिए तो था। उम्मीद है कि चुनाव में यही भावना दिखेगी। लोग वोट के जरिए गलत का विरोध करेंगे। जो पार्टियां झूठ बयान देकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लोग उन्हें जवाब देंगे।’
ऑटो रिक्शा चलाने वाले अनवर हुसैन कहते हैं, ‘चुनाव में अच्छा माहौल है। मुझे भरोसा है कि BNP बड़े अंतर से जीतेगी।’ एक्सपर्ट बोले- सबसे बड़ी फिक्र चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं
ढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट सैफुल इस्लाम चौधरी कहते हैं, ‘चुनाव के नतीजे क्या होंगे, मुझे इससे ज्यादा फिक्र इस बात की है कि चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं। लोग खुलकर वोट डाल पाएंगे या नहीं। एक रात पहले ही ढाका के बाहर कई घटनाएं हुई हैं।’ ‘कुछ न कुछ गड़बड़ करने की कोशिशें चल रही हैं। कैंडिडेट धमकी दे रहे हैं कि अगर वे नहीं जीते तो विरोधियों के घरों में तोड़फोड़ करेंगे। इसीलिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। अगर लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं होगा, तो वे डर की वजह से पोलिंग बूथ तक नहीं जाएंगे।’ चौधरी आगे कहते हैं, ‘अगर चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो कहना मुश्किल है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा। मैं इस देश के लोगों के वोटिंग बिहेवियर को जानता हूं। यहां लोग कैंडिडेट की बजाय पार्टी को वोट देते हैं। अवामी लीग इस बार नहीं है। मुझे लगता है कि बहुत से लोग BNP को वोट देंगे। चुनाव में धांधली नहीं हुई, तो हो सकता है कि BNP सत्ता में आ जाए।’ हिंदू और अवामी लीग के वोट किसे वोट देंगे? चौधरी जवाब देते हैं, ‘अगर अवामी लीग के 10% वोटर भी मतदान करें और उनमें से 8 से 9% BNP को वोट दे दें, तो भी BNP आसानी से जीत सकती है। अगर वे जमात को वोट देंगें, तो जमात जीत सकती है। हालांकि, सैफुल इस्लाम चौधरी मानते हैं कि किसी भी पार्टी को बहुमत लायक 151 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। वे कहते हैं, ‘इस स्थिति में शायद जमात और BNP के बीच पर्दे के पीछे समझौता हो सकता है। ये थोड़ा अजीब होगा, लेकिन दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं।’ ‘जनमत संग्रह महज दिखावा, संवैधानिक बदलाव होना तय’
बांग्लादेश में चुनाव के साथ संविधान में सुधार के लिए जनमत संग्रह भी होना है। डॉ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने खुलकर इसके पक्ष में वोट करने के लिए कहा है। चुनाव की कवरेज करते हुए हमने देखा कि सरकारी कर्मचारी भी जनमत संग्रह के पक्ष में वोट करने की अपील करते हुए दिखे। चौधरी कहते हैं, सरकार खुद पक्ष लेती है, तो विपक्ष के जीतने की संभावना नहीं रहती। इसलिए लग रहा है कि संविधान में बदलाव के पक्ष में ज्यादा वोट आएंगे। ‘जनमत संग्रह दिखावा लगता है। सरकार पहले ही संविधान में बदलाव के पक्ष में है। बांग्लादेश जैसे देश में सरकार की इच्छा के खिलाफ रिजल्ट आना बहुत मुश्किल है। मान लीजिए एक हजार वोटर हैं, तो सरकार 900 वोट ‘हां’ के वोट दिखा सकती है। यह एक तरह का खेल है, पैसों की बर्बादी है। सरकार चाहे तो अध्यादेश के जरिए भी फैसला कर सकती है। जनमत-संग्रह की जरूरत नहीं है।’ ‘धांधली हुई, तभी जमात सत्ता में आएगी’
सीनियर जर्नलिस्ट मोन्जुरुल आलम पन्ना का मानना है कि पहले के मुकाबले जमात के वोटर और समर्थक बढ़े हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि उन्हें अपने दम पर सरकार बनाने लायक समर्थन मिल गया है। अगर चुनाव निष्पक्ष हुए, तो BNP काफी आगे रहेगी। वे इतनी सीटें जीत सकते हैं कि सरकार बना सकें। अगर कोई हेरफेर हुआ, तो हालात अलग हो सकते हैं। ऐसे में जमात भी आगे आ सकती है। इस बार बांग्लादेश चुनाव में कौन से मुद्दे हावी रहे? मोन्जुरुल बताते हैं, ‘पार्टियों ने एक करोड़ नौकरियां, फैमिली कार्ड, 5 करोड़ पेड़ लगाने जैसे वादे किए हैं। चाहे BNP हो या जमात, उनके वादे सुनने में अच्छे लगते हैं। अनुभव बताता है कि सत्ता में आने के बाद पार्टियां मुश्किल से 10 से 20% वादे ही पूरे करती हैं। वादा करने में कोई खर्च नहीं होता। इसलिए इन घोषणाओं को ज्यादा महत्व नहीं देता। मेरे लिए ज्यादा अहम उनका पिछला रिकॉर्ड है।’ ‘5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 18 महीनों में BNP पर वसूली, बदले और दमन के आरोप लगे हैं। इससे उनकी छवि को नुकसान हुआ है। जमात ने सीधा टकराव कम किया है, हालांकि उन पर भी टोकन के जरिए चंदा वसूली और जमीन कब्जाने के आरोप हैं। फिर भी ऐसे मामले कम हैं।’ अवामी लीग के कोर वोटर्स क्या करेंगे? मोन्जुरुल का मानना है कि अवामी लीग के कुछ वोटर वोट डालने न जाएं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि कोई भी नहीं जाएगा। अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा?
मोन्जुरुल कहते हैं, ‘त्रिशंकु संसद की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मान लीजिए BNP को 125–130 सीटें मिलती हैं और जमात को 120–125। तब गठबंधन की राजनीति के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। अगर BNP दूसरी पार्टियों से समझौता नहीं कर पाती, तो उसे जमात पर निर्भर होना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मिली-जुली सरकार भी बन सकती है। फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।’ सीटें, जिन पर नजर रहेगी बांग्लादेश से ये स्टोरी भी पढ़ें
1. हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे
बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक राज चाहता है। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। संगठन के लीडर अजीज-उल-हक कहते हैं अगर जमात देश में इस्लामिक शासन नहीं लाता है तो हम उसके भी खिलाफ हो जाएंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… 2. जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे, पैसे बांटते कैमरे में कैद बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि, इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। खुलना जिले की दाकोप सीट से लड़ रहे कृष्णा नंदी दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। पढ़िए पूरी खबर…
25 साल बाद BNP सरकार के आसार, लेकिन बहुमत नहीं:कट्टरपंथी जमात भी बहुत पीछे नहीं; हिंदू वोटों के बिना सरकार नहीं
📅 Published: February 12, 2026 |
📂 Category: Uncategorized
