शादी के कार्ड छपने के बाद भड़क गए थे नीतीश:मंडप में मंजू को देखा, ज्यादा वक्त साथ क्यों नहीं रह सके; जानिए लव स्टोरी

📅 Published: November 20, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

आखिरकार घरवालों को झुकना पड़ा। शादी के नए कार्ड छपे, जिनमें लिखा था- ‘तिलक, दहेज एवं शोषण युक्त कुप्रथाओं से मुक्त’ और ‘पुष्प-माला एवं आशीर्वचन के अतिरिक्त किसी प्रकार के उपहार का आदान-प्रदान नहीं होगा।’ नीतीश कुमार आज 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं। इस स्टोरी में जानेंगे उनकी पूरी लव स्टोरी… बख्तियारपुर में शुरुआती पढ़ाई के बाद नीतीश कुमार ने 1967 में पटना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। बचपन से ही नीतीश पढ़ाई में तेज थे और संपन्न परिवार से आते थे, इसलिए परिवार उन्हें इंजीनियर बनाना चाहता था। इंजीनियरिंग के आखिरी साल में ही परिवार वालों ने नीतीश का रिश्ता मंजू कुमारी सिन्हा से तय कर दिया। उस वक्त मंजू पटना के मगध महिला कॉलेज से सोशियोलॉजी की पढ़ाई कर रही थीं। नीतीश के कॉलेज के दिनों के दोस्त उदय कांत की किताब ‘नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से’ में मंजू के पिता कृष्णनंदन बाबू बताते हैं, ‘मेरे समाज की बात तो छोड़ दीजिए, उस समय पूरे बिहार की किसी भी जाति में, मंजू जैसी बुद्धिमती बेटी के लिए नीतीश जी से अच्छा लड़का मिल ही नहीं सकता था।’ नीतीश कुमार ने शादी के मंडप में पहली बार मंजू को देखा था
जब नीतीश और मंजू की शादी तय हुई तो दोनों पटना में ही पढ़ाई कर रहे थे। नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से में नीतीश के दोस्त कौशल बताते हैं, ‘मंजू को तब तक हममें से किसी ने नहीं देखा था, पर इतना पता था कि वे पटना यूनिवर्सिटी में ही सोशियोलॉजी की पढ़ाई कर रही हैं। हम तीन बदमाश दोस्त, बिना किसी को बताए सोशियोलॉजी विभाग में उन्हें देखने पहुंच गए।’ जब यूनिवर्सिटी में नीतीश के दोस्तों ने मंजू को रोकने की कोशिश की तो वह बस मुस्कुराकर वहां से चली गईं। नीतीश के दोस्तों की हरकतों से वो समझ गईं कि वे लोग उन्हें ही देखने आए हैं, इसलिए वह शर्मा कर भागने लगीं। नीतीश के दोस्तों ने मंजू को पास कर दिया था और नीतीश इस बात से काफी खुश थे। दोस्तों ने भले ही मंजू को देख लिया था, लेकिन नीतीश ने शादी के मंडप में ही पहली बार मंजू को देखा था। नीतीश की शर्तें- दहेज नहीं लूंगा और मंजू की सहमति से होगी शादी नीतीश की शादी परिवार वालों ने ही तय की थी। उन्होंने मंजू से मिले बिना ही विवाह के लिए अपनी सहमति भी दे दी थी। शादी के कार्ड बंट जाने के बाद नीतीश को पता चला कि तिलक में 22 हजार रुपए देने की बात तय हुई है। नीतीश ने बहुत पहले ही शादी में दहेज न लेने की कसम खाई थी और यह बात उनके परिवार को भी पता थी। ऐसे में जब उन्हें तिलक में पैसे लेने की बात पता चली तो वे काफी नाराज हुए। उन्होंने अपने और मंजू के परिवार से साफ कह दिया कि वे तिलक या दहेज के नाम पर कोई पैसे नहीं लेंगे। साथ ही उन्होंने शादी के लिए दो शर्तें रख दीं। पहली- जैसे मंजू के बारे में उनसे सहमति ली गई, वैसे ही मंजू से भी उनके बारे में सहमति ली जाए। दूसरी- अगर मंजू को कोई समस्या न हो तो बिना किसी तामझाम के, पारंपरिक तरीके से बारात निकाले बिना और सिर्फ करीबियों की मौजूदगी में शादी करेंगे। मंजू को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी। इसके बाद शादी के नए कार्ड छपवाए गए। अपनी शादी के समय नीतीश कॉलेज में भी छात्र राजनीति के चलते काफी प्रचलित हो गए थे। उनकी शादी कॉलेज की यादगार शादियों में गिनी जाती है। उदय कांत अपनी किताब में लिखते हैं, ‘मैं किराए की एम्बेसडर गाड़ी पर, सारे विश्वविद्यालय में घूम-घूमकर सभी को एक विद्रोही की शादी का आमंत्रण दे आया था।’ शादी के सालभर में जेल गए नीतीश, जाली से मंजू को देखते नीतीश चाहते थे कि शादी के बाद भी मंजू अपनी पढ़ाई जारी रखें। इसलिए कुछ दिन ससुराल में रहने के बाद वे पटना लौट आईं और जीडी हॉस्टल में रहते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। नीतीश अक्सर मंजू से कॉलेज या हॉस्टल के बाहर मिलने जाते। कई बार रिक्शे पर उन्हें फिल्म दिखाने भी ले जाते। ‘अंतरंग दोस्तों की नजर से’ किताब के मुताबिक, ‘नीतीश उन दिनों कई रोमांटिक गाने गुनगुनाते थे। जैसे- जो बात तुझमें है, तेरी तस्वीर में नहीं… और हमने देखी है उन आंखों की महकती खुशबू…।’ एक तरफ नीतीश दांपत्य जीवन में प्रवेश कर रहे थे, दूसरी तरफ बिहार में जेपी आंदोलन जोर पकड़ रहा था। नीतीश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने से इनकार कर दिया था। वे राजनीति में आना चाहते थे। उनके पिता का भी इसमें समर्थन था। इसी समय छात्र आंदोलन के दौरान नीतीश को जेल जाना पड़ा। मंजू अक्सर उनसे जेल में मिलने आतीं। उस समय की एक घटना याद करते हुए नीतीश बताते हैं, ‘गया सेंट्रल जेल का सुपरिंटेंडेंट बड़ा सख्त था। वह सप्ताह में एक बार ही परिवार से मिलने देता। वह भी जाली के आर-पार से। मंजू मुझसे मिलने आती थी। मगर हमारे दुर्भाग्य से जाली भी इतनी घनी थी कि उससे छोटी उंगली तक न निकल सके।’ पत्नी की सैलरी से घर चलता, लगातार चुनाव हार रहे थे नीतीश नीतीश की राजनीति में व्यस्तता और जेल आने-जाने के क्रम से मंजू परेशान थीं। अपने आप को व्यस्त रखने के लिए BA करने के बाद मंजू ने BEd और फिर MA कर लिया। नीतीश से शादी से पहले मंजू ने कभी पैसों का अभाव नहीं देखा था, लेकिन शादी के 12 सालों तक जब नीतीश ने कोई ढंग की नौकरी नहीं की और लगातार दो चुनाव भी हार गए, तो उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो गया। 1982 में मंजू बिहार सरकार में शिक्षिका बन गईं। उनकी पहली नियुक्ति अपने मायके यानी सेवदह के हाईस्कूल में हुई। मंजू की नौकरी से परिवार चलाने की समस्या तो सुलझ गई, लेकिन नीतीश का परिवार दो हिस्सों में बंट गया। मंजू और बेटा निशांत सेवदह में रहते और नीतीश कभी पटना तो कभी बख्तियारपुर। दोनों लंबे वक्त तक मिल नहीं पाते थे। नीतीश राजनीति छोड़ने वाले थे, मंजू ने ढाई साल की सेविंग दे दी 1985 के विधानसभा चुनाव में नीतीश ने फैसला कर लिया था कि यह आखिरी कोशिश होगी। अगर नहीं जीतते हैं, तो फिर कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे। किताब ‘नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से’ में दोस्त मीता बताते हैं, चुनाव लड़ने के लिए नीतीश के पास पैसे नहीं थे। तब मंजू भाभी ने अपनी ढाई साल की सेविंग्स उठाकर नीतीश को सौंप दी। उस वक्त ये 20 हजार रुपए नीतीश को डूबते के लिए तिनके का सहारा साबित हुए। दो चुनावों में हार के बाद 1985 में नीतीश ने लोकदल की तरफ से हरनौत विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव जीतने के बाद जब नीतीश बख्तियारपुर अपने घर पहुंचे तो खूब धूम-धाम से उनका स्वागत हुआ, लेकिन उनकी आंखें पत्नी मंजू को खोज रही थीं जो इस वक्त अपने मायके सेवदह में थीं। पत्नी से मिलने आधी रात मोटरसाइकिल से निकल पड़े नीतीश पत्नी से मिलने को आतुर नीतीश रात में ही एक साथी के साथ मोटरसाइकिल पर सेवदह के लिए निकल गए। वह होली के एक दिन पहले की रात थी। हुड़दंग के डर से कई लोगों ने नीतीश को जाने से मना भी किया, लेकिन वे नहीं माने। नीतीश के साथ सेवदह पहुंचे दोस्त मुन्ना सरकार के मुताबिक, भाभी जी रात से ही नेताजी की प्रतीक्षा कर रही थीं। जैसे ही नेताजी घर पहुंचे उन्हें देखकर भाभी जी पहले मुस्कुराईं, फिर अचानक शरमाती हुई हमारी आवभगत की तैयारी में लग गईं। विधायक बनने के बाद नीतीश को पटना में रहने के लिए फ्लैट मिला। तब मंजू ने भी अपना ट्रांसफर पटना करा लिया। शादी के इतने सालों बाद नीतीश, मंजू और उनका बेटा निशांत साथ रहने लगे। नीतीश हर दिन व्यस्त होने के बावजूद खुद मंजू को स्कूल छोड़ने जाते। पत्नी को दिल्ली में नौकरी दिलाने में गड़बड़ी के आरोप लगे उदय कांत अपनी किताब ‘नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से’ में लिखते हैं- ‘5 साल साथ रहने के बाद नीतीश और मंजू को फिर एक-दूसरे से दूर रहना पड़ा। दरअसल, 1989 में नीतीश लोकसभा का चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंच गए। मंजू ने भी बिहार सूचना केंद्र, नई दिल्ली में अपनी प्रतिनियुक्ति करवा ली। यह खबर बिहार के अखबारों में छप गई और नीतीश पर पत्नी को दिल्ली बुलाने के लिए नियम तोड़ने के आरोप लगे। इन आरोपों से परेशान होकर नीतीश ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर मंजू की प्रतिनियुक्ति रद्द करने की विनती की। मंजू फिर पटना लौट गईं। नीतीश को जब भी दिल्ली के काम से फुरसत मिलती, पत्नी और बेटे से मिलने पटना चले जाते। जब मंजू की छुट्टियां होतीं, वो बेटे को लेकर दिल्ली चली जातीं। नीतीश के काम के चलते बार-बार घर बदलने और फिर से गृहस्थी जमाने से मंजू हमेशा परेशान रहती थीं। साल 2005 में नीतीश मुख्यमंत्री बने, लेकिन मुख्यमंत्री आवास चार महीने बाद मिला। तब तक मंजू अपने बेटे निशांत के साथ मायके में रहती थीं और नीतीश सरकारी इंतजाम वाले घर में अकेले रहते थे।’ मंजू ने कहा था- रिटायरमेंट के बाद साथ रहेंगे, लेकिन ऐसा हो न सका 2007 में जब मंजू को निमोनिया हुआ, तो नीतीश उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल इलाज के लिए ले गए। यहां पूरे समय नीतीश, मंजू के साथ ही रहते थे। अस्पताल में नीतीश अक्सर मंजू के पास बैठकर उनके साथ समय न बिता पाने का अफसोस करते। तब मंजू कहतीं कि मेरे रिटायरमेंट के बाद हम सभी साथ रहेंगे। उस समय मंजू के रिटायरमेंट में पांच साल बाकी थे। वे 2012 में रिटायर होने वाली थीं, लेकिन रिटायरमेंट से पहले ही 14 मई, 2007 को मंजू ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। पत्रकार अरुण पांडे के मुताबिक, ‘अपनी पत्नी की मौत पर नीतीश कुमार फूट-फूटकर रोए थे।’ बाद में नीतीश ने मंजू के नाम पर पटना के कंकड़बाग में मंजू कुमारी स्मृति पार्क और स्मारक बनवाया। अब हर साल नीतीश अपनी पत्नी की पुण्यतिथि पर इस स्मारक पर जाते हैं और फूल चढ़ाते हैं। —————- ये स्टोरी भी पढ़िए… शाहनवाज की हिंदू प्रेमिका से साध्वी 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