उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 372 दर्ज किया गया है, जो शहरवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सर्दियों की शुरुआत के साथ यह प्रदूषण और भी खतरनाक हो सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरनगर में मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 का स्तर खतरनाक सीमा से काफी ऊपर है। अनुमान है कि PM2.5 का स्तर 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक है, जो फेफड़ों और हृदय को सीधा नुकसान पहुंचा सकता है। जिले में AQI में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। 15 नवंबर को यह 376 तक पहुंच गया था, जबकि 18 नवंबर को 318 दर्ज किया गया था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदूषण का स्तर तेजी से बिगड़ रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह-शाम शहर को धुंध की चादर ढक लेती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि AQI 300 से ऊपर होने पर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगियों को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बच्चे और बुजुर्ग इस प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। मुजफ्फरनगर अपने पेपर मिल और अन्य उद्योगों के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, औद्योगिक इकाइयों में वेस्ट प्लास्टिक और पन्नी कचरा जलाया जाना प्रदूषण बढ़ने का एक मुख्य कारण है। यह भी बताया गया है कि हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों से भारी मात्रा में वेस्ट कचरा और पन्नी मुजफ्फरनगर की औद्योगिक इकाइयों में सप्लाई किया जा रहा है, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जा रहा है। यह लापरवाही जिले में वायु प्रदूषण के संकट को और गहरा कर रही है।
मुजफ्फरनगर में AQI 372, वायु प्रदूषण गंभीर:औद्योगिक इकाइयों में जल रहा वेस्ट कचरा, स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ा
📅 Published: November 21, 2025 |
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