कोलोनाइजर महेंद्र के हत्यारे बनारसी को STF ने मार गिराया:वाराणसी में 1 लाख इनामिया को मारी गोलियां, 50 करोड़ की जमीन के विवाद में भेजे थे शूटर

📅 Published: February 3, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

वाराणसी के सारनाथ निवासी कोलोनाइजर महेंद्र गौतम के हत्यारे हिस्ट्रीशीटर बनारसी यादव को मंगलवार रात एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। एसटीएफ और बनारसी यादव के बाद कई राउंड फायरिंग हुई, एसटीएफ के इंस्पेक्टर ने उसे सरेंडर करने की चेतावनी दी लेकिन बनारसी अंधाधुंध फायरिंग करता रहा। टीम के दो सिपाही भी उसकी गोलियों से बाल-बाल बचे। इसके बाद टीम ने बनारस के लिए चक्रव्यूह बनाया और बैकअप फायरिंग के बीच दो एसटीएफ के जवान उसकी ओर बढ़े। बनारसी और जवानों में आमने सामने 5 राउंड फायरिंग हुई। इसमें दो गोलिया बनारसी यादव को लगी और वह ढेर हो गया। आनन फानन में लहूलुहान हालत में उसे अस्पताल लाया गया जहां पुलिसने मृत घोषित कर दिया। उसके पास से पुलिस ने दो पिस्टल और बड़ी संख्या कारतूस बरामद किया है। कारोबारी की हत्या 50 करोड़ की जमीन के लिए बनारसी यादव ने गाजीपुर के शूटरों से कराई थी। मर्डर के लिए 5 लाख रुपए सुपारी दी गई थी। इसके बाद बनारसी पर पुलिस ने एक लाख का इनाम घोषित किया था। पुलिस ने अब तक केस में 4 लोगों जोगेंद्र, संपूर्णानंद शुक्ला, चंदना शुक्ला, श्यामप्रकाश राजभर को अरेस्ट किया था। उसके शूटरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस-एसटीएफ समेत कई टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं। बता दें कि सारनाथ थाना क्षेत्र (अरिहंत नगर कॉलोनी) में 21 अगस्त 2025 की सुबह बाइक सवार बदमाशों ने कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम (54 वर्ष) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने साजिशकर्ता योगेंद्र यादव सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर खुलासा किया है कि जमीन विवाद और कर्ज के चलते ₹5 लाख की सुपारी देकर यह हत्या कराई गई थी। इसमें गाजीपुर के करंडा निवासी बनारसी यादव का नाम भी सामने आया। 3 जनवरी 2026 को पुलिस मुठभेड़ में मुख्य शूटर अरविंद यादव उर्फ फौजी को गिरफ्तार किया था, जिस पर एक लाख का इनाम था। उसके शूटरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस-एसटीएफ समेत कई टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं। मंगलवार को जब एसटीएफ को उसकी लोकेशन चौबेपुर रोड पर मिली, जिसके बाद टीम ने रिंग रोड पर घेराबंदी की तो दोनों ओर से अंधाधुंध फायरिंग हुई। इसमें बनारसी को एसटीएफ ने मार गिराया। बनारसी पर गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली में कई केस दर्ज थे। तस्वीरों में देखिए मुठभेड़ के बाद अस्पताल में बनारसी का शव प्रॉपर्टी डीलर के हत्यारे प्रोफेशनल शूटर्स को लगाया
प्रॉपर्टी कारोबारी महेंद्र गौतम बुद्धा सिटी के रहने वाले थे। उनके पिता श्यामनाथ आरटीओ अफसर थे। महेंद्र ने अपने घर से 2 किमी दूर अरिहंत नगर इलाके में ऑफिस बना रखा है। गुरुवार वह सुबह साढ़े 8 बजे वह ऑफिस जाने के लिए घर से निकले। वह गलियों से होते हुए जा रहे थे। ऑफिस से 150 मीटर पहले ही एक बाइक पर सवार 3 शूटर आए। तीनों के चेहरे कवर थे। बाइक चला रहा शूटर हेलमेट पहने था, बाकी 2 बदमाशों ने गमछे से चेहरा बांध रखा था। सीसीटीवी में दिख रहा है कि महेंद्र फोन पर बात करते हुए बाइक चला रहे थे। इसी बीच महेंद्र की बाइक को शूटरों ने ओवरटेक किया। फिर बमुश्किल 10 फीट की दूरी से चलती बाइक से फायरिंग की। गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े, लेकिन शूटर पिस्टल लहराते हुए मौके से भाग गए। वो कॉलोनी से रिंग रोड की तरफ निकल गए। मौके पर पहुंची सारनाथ पुलिस महेंद्र गौतम को मलदहिया स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गई। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- सुबह 9 बजे महेंद्र बाइक से मोबाइल पर बात करते हुए जा रहे थे। स्पीड ब्रेकर के चलते बाइक की स्पीड धीमी की। इसी बीच, वारदात हुई। सभी शूटर्स के चेहरे कवर थे।
कई गैंग और माफियाओं के साथ जुड़ा था गाजीपुर का बनारसी गाजीपुर के करंडा इलाके का निवासी बनारसी यादव पूर्वांचल के बड़े और शातिर शूटरों में गिना जाता था। सामान्य कद काठी का बनारसी आपराधिक इतिहास में लंबे समय तक रहस्य बना रहा। सुपारी लेकर हत्याएं करने वाले इस शूटर को पुलिस नाम से तो जानती थी, लेकिन उसका चेहरा और तस्वीर किसी के पास नहीं थी। यही वजह रही कि कई घटनाओं को अंजाम देने के बाद भी बनारसी वर्षों तक कानून की पकड़ से दूर रहा। सारनाथ में कॉलोनाइजर महेंद्र की हत्या के बाद जब बनारसी यादव का नाम सामने आया, तब पुलिस को उसकी मौजूदगी का ठोस सुराग मिला। बनारसी यादव कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और न ही एक जगह टिककर रहता था। ठिकाने बदलते रहना और संपर्क के पारंपरिक तरीकों से दूरी बनाए रखना उसकी पहचान थी। बनारसी पूर्वांचल के कई माफियाओं के इशारे पर सुपारी किलिंग को अंजाम दे चुका था। बदमाशों ने कैसे हत्या की, 2 तस्वीरें में देखिए…

महेंद्र इकलौते बेटे थे, पिता जेल गए थे
महेंद्र के पिता श्यामनाथ गौतम आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल गए थे। इसके बाद विभाग ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर उनकी बहाली हुई थी। सोनभद्र RTO से रिटायर हुए थे। महेंद्र उनके इकलौते बेटे थे। घर में पत्नी और एक 10 साल का बेटा अरिहंत है। महेंद्र अपने बेटे के नाम पर रिंग रोड के करीब कॉलोनी बसा रहे थे। पहले फेज में 127 मकानों की रजिस्ट्री भी हो चुकी है। सेकेंड फेज की प्लॉटिंग चल रही थी। महेंद्र की बहन की कुछ साल पहले हादसे में मौत हो चुकी है।

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