क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था:स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस 'अप्रत्याशित घटना' का संकेत दिया

📅 Published: February 5, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

22 साल बाद प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ। 4 फरवरी को बजट सत्र के 7वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पीएम मोदी नहीं पहुंचे। आज स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि लोकसभा में पीएम मोदी के साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। इसलिए कल उनकी स्पीच टालनी पड़ी। हालांकि आज पीएम राज्यसभा में भाषण देने पहुंचे, जिसके बाद विपक्ष ने वॉक आउट कर दिया। आखिर लोकसभा में ऐसा क्या हुआ कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी और उन्हें क्या होने की आशंका थी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: लोकसभा में क्या हुआ और स्पीकर ने क्या कहा? जवाब: 4 फरवरी को पीएम मोदी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। शाम 5 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी नेताओं की कुर्सियां घेर लीं। इनमें पीएम मोदी की कुर्सी भी थी। हंगामा बढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही स्थगित कर दी गई। आज 5 फरवरी को कार्रवाई फिर शुरू हुई। इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने एक दिन पहले सदन स्थगित करने और पीएम का भाषण टालने का कारण बताया। उन्होंने कहा, ‘जब सदन के नेता पीएम मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था तो विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे।’ बिरला ने आगे कहा, ‘अगर ये घटना हो जाती, तो लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। इसे टालने के लिए मैंने पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया। पीएम ने मेरे सुझाव को माना।’ बिरला ने महिला सांसदों का पीएम की कुर्सी तक जाना मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा, ‘आप पोस्टर लेकर आएंगे तो सदन नहीं चलेगा। जिस तरह से महिला सदस्य पीएम की सीट तक पहुंचीं, उसे देश ने देखा। ये उचित नहीं था। ये सदन की गरिमा के अनुकूल भी नहीं था।’ सवाल-2: विपक्ष ने ऐसा क्या किया कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी? जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने 4 फरवरी को लोकसभा में हुई घटना का जिक्र करते हुए पीएम को भाषण न देने की सलाह दी।
सवाल-3: स्पीकर बिरला को संसद में क्या होने की आशंका थी? जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद में कुछ अप्रत्याशित हो सकता था, जिससे लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। स्पीकर बिरला के मुताबिक, 4 फरवरी को विपक्ष के कई संसदों ने उनके चैंबर का भी घेराव किया था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद में दो तरह की ‘अप्रत्याशित घटना’ हो सकती थी- राजनीतिक विवाद या सुरक्षा पर खतरा। सदन में इससे पहले हुई अप्रत्याशित घटनाओं से समझते हैं कि लोकसभा में राजनीतिक या सुरक्षा की नजर से क्या अप्रत्याशित हो सकता था… सदन में हुई अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाएं 1988: तमिलनाडु विधानसभा में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा 1989: जे. जयललिता की साड़ी खींची 1997: उत्तर प्रदेश में विधायकों ने कुर्सियां और माइक फेंके 2014: कांग्रेस सांसद ने चलाया मिर्ची स्प्रे 2016: विधायक ने मंत्री पर जूता फेंका सदन की सिक्योरिटी अप्रत्याशित घटनाएं 1994: विजिटर गैलरी से एक आदमी कूद गया 2001: संसद भवन पर आतंकी हमला 2002: ओडिशा विधानसभा में बजरंग दल, विहिप का हंगामा 2023: संसद में घुसे 2 युवक, पीले धुएं वाले कैनिस्टर छोड़े सवाल-4: अगर हंगामा बढ़ता या कुछ अप्रत्याशित होता, तो फिर क्या होता? जवाब: संसद में अगर कोई अप्रत्याशित घटना या बहुत ज्यादा हंगामा होता है, तो सिक्योरिटी प्रोसिजर और प्रोटोकॉल तुरंत एक्टिव हो जाता है… 1. सदन की कार्यवाही रोकना 2. सांसदों और मंत्रियों की सुरक्षा 3. सुरक्षा चूक पर लॉकडाउन 4. कानूनी सख्त कार्रवाई ———– ये खबर भी पढ़िए… राज्यसभा में मोदी की स्पीच के दौरान विपक्ष का वॉकआउट:PM बोले- कांग्रेस के पास न सोच न इच्छाशक्ति, इसका परिणाम देश को भुगतना पड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दे रहे हैं। स्पीच के दौरान विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी को बोलने दिया जाए, तानाशाही नहीं चलेगी। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि खड़गेजी की उम्र देखते हुए उन्हें बैठकर नारे लगाने की इजाजत दी जाए। पूरी खबर पढ़िए…

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