चंडीगढ़ में टोयोटा डीलरशिप के नाम पर 54 लाख ठगे:महाराष्ट्र-गुजरात से 4 ठग गिरफ्तार, कई बैंक अकाउंट मिले, दर्जनों सिम-मोबाइल जब्त

📅 Published: November 20, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

चंडीगढ़ साइबर सेल ने टोयोटा डीलरशिप के नाम पर 54 लाख की ठगी करने वाले 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चारों आरोपियों को महाराष्ट्र और गुजरात में छापेमारी कर गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के ठाणे निवासी मुबारक अली गफार अली शाह, अंकित सुरेंद्र झा, धर्मेंद्र कुमार और गुजरात के सूरत निवासी संतोष कुमार यादव के रूप में हुई है। आरोपियों से पुलिस ने बैंक पासबुक, ATM कार्ड, कई मोबाइल फोन और दर्जनों सिम कार्ड बरामद किए हैं। आरोपियों को डीएसपी ए. वेंकटेश की सुपरविजन में साइबर सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर इरम रिजवी की अगुआई वाली टीम ने पकड़ा है। ऐसे की व्यापारी से 54 लाख की ठगी शिकायतकर्ता मनीष अग्रवाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह चंडीगढ़ में स्टील का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने ऑनलाइन टोयोटा डीलरशिप के लिए आवेदन किया था। इसके बाद खुद को टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स का अधिकारी बताकर कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने फर्जी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से बातचीत की और एक नकली LOI (लेटर ऑफ इंटेंट) भेजकर उन्हें भरोसे में लिया। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें दो बैंक खातों में ₹54,16,790 ट्रांसफर करने के लिए कहकर ठग लिया। बाद में टोयोटा कंपनी ने पुष्टि की कि न तो मोबाइल नंबर उनका था और न ही ईमेल आईडी। जांच में म्यूल अकाउंट और फर्जी पहचान का खुलासा बैंक KYC और तकनीकी जांच में पता चला कि ठगी में कई स्तरों पर उपयोग किए गए थे — फर्स्ट-लेयर व सेकेंड-लेयर म्यूल अकाउंट। अपराधियों ने फर्जी पहचान बनाई और अलग-अलग राज्यों से बैंक खाते खुलवाए। इन खातों के जरिए ठगी का पैसा लेन-देन और निकालने की कोशिश की गई। जांच में मिले ट्रांजैक्शन और दस्तावेज आगे की पड़ताल के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। पुलिस अब इन खातों की मनी-ट्रेल और जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जानिए.. गैंग में किसकी क्या भूमिका थी पुलिस जांच में सामने आया कि गैंग में हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। मुबारक अली सेकेंड लेयर के बैंक अकाउंट खोलकर उन्हें बेचता था, जिनमें ठगी का पैसा आता था। अंकित झा मुबारक से ये खाते लेकर आगे एक हैंडलर तक पहुंचाता था। संतोष यादव लोगों से झांसा देकर उनके बैंक खाते और सिम कार्ड लेता और गैंग को बेचता था। वहीं धर्मेंद्र कुमार इन खातों को खरीदकर एटीएम नेटवर्क के जरिए ठगी का पैसा निकलवाने वाले लोगों तक आगे सप्लाई करता था। झारखंड–बिहार से चलता है गैंग पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि इस साइबर ठगी गैंग के कई मुख्य सदस्य झारखंड और बिहार में बैठे हुए पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करते हैं। पुलिस को बैंक की CCTV फुटेज में एक संदिग्ध की पहचान भी मिल चुकी है, जिसके आधार पर आगे की छानबीन तेज कर दी गई है। उधर, पुलिस द्वारा बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच जारी है। ठगी की पूरी मनी ट्रेल, फर्स्ट और सेकेंड लेयर म्यूल अकाउंट की पहचान और गैंग के बचे बाकी सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस ने टीमों को अलग-अलग राज्यों में भेज दिया है।

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