शेख हसीना के तख्तापलट के करीब डेढ़ साल बाद हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP बहुमत के साथ जीत गई। रिकॉर्ड जीत के बावजूद न जश्न मना, न जीत के जुलूस निकले। ढाका की सड़कें सूनी ही रहीं। BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने पार्टी वर्कर्स से कहा कि जुमे की नमाज के बाद पूरे देश में खास दुआ करें और अल्लाह को शुक्रिया कहें। इसके बाद लोग घरों से निकले, मस्जिदों में नमाज अदा की और लौट गए। ढाका समेत पूरे बांग्लादेश में शांति रही। बांग्लादेश में चुनाव के रिजल्ट से तीन बातें साफ हो गईं। तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कट्टरपंथी मानी जाने वाली पार्टी जमात की धर्म की राजनीति नहीं चली और शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले स्टूडेंट्स को अपनी जगह बनाने में बहुत मेहनत करनी होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP की जीत के पीछे हिंदू वोटर, शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के सपोर्टर और महिलाएं हैं। दैनिक भास्कर ने चुनाव नतीजों पर अलग-अलग तबके के लोगों से बात की। उनसे समझा कि BNP के जीतने की क्या वजहें रहीं, लोगों ने उसे क्यों वोट दिया और आखिरकार वे नई सरकार से क्या चाहते हैं। पढ़िए रिपोर्ट… जमात सपोर्टर: शेख हसीना के वक्त धांधली होती थी, इस बार भी हुई
ढाका में जमात के ऑफिस में मौजूद समर्थक मायूस दिखे। उन्हें लग रहा है कि चुनाव में धांधली हुई है। ऑफिस में मिले रेजा अल करीम खुद को जमात-ए-इस्लामी का कट्टर समर्थक बताते हैं। वे ऑफिस के बाहर बैठकर जमात चीफ शफीकुर रहमान से मिलने का इंतजार कर रहे थे। करीम कहते हैं, ‘लोगों में चुनाव के लिए सुबह से उत्साह था। वोटिंग के आखिर तक हमें उम्मीद थी कि चुनाव सही तरह से होंगे। शेख हसीना के वक्त भी हमने इलेक्शन देखा है कि कैसे रात में वोट डालकर धांधली होती थी। लोगों को वोट तक डालने नहीं देते थे। इस बार कम से कम हम वोट डाल पाए। इस बार भी बैलेट बॉक्स छीनने और फर्जी वोट डालने की कोशिश की गई। हमें शक है कि रिजल्ट में धांधली हुई है।’ ‘हम जीत रहे थे, रात 11 बजे के बाद रिजल्ट बदला’
ऑफिस में बैठे मुफज्जल हुसैन पेशे से कारोबारी हैं। वे कहते हैं, ‘वोटिंग की शाम तक आ रहे रुझान के हिसाब से जमात-ए-इस्लामी आगे चल रही थी। रात 11 बजे के बाद अचानक नतीजे बदल गए। अब जो भी सत्ता में आ रहा है, उसे करप्शन और बिजनेस सिंडिकेट खत्म करने, नौकरियां पैदा करने, विदेश में काम करने वालों को सुविधाएं देने पर काम करना चाहिए।’ हमारे यहां बहुत सारे लोग पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उनके पास काम या नौकरी नहीं है। सरकार को इकोनॉमी के लिए बड़े कदम उठाने चाहिए। आम लोग: रहमान का जीतना बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी
जमात समर्थकों के बाद हमने कुछ आम लोगों से बात की। वे चुनाव नतीजों से खुश नजर आए। मोहम्मद सुहैल ढाका में रिक्शा चलाते हैं। वे कहते हैं, ‘BNP को पूरे देश में सपोर्ट मिल रहा था। चुनाव के रिजल्ट में यही दिखा है। BNP का जीतना बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी था। मैं भी यही चाहता था।’ ‘बांग्लादेश में BNP को खत्म करने की कोशिश की गई। फिर भी लोगों ने उसे वोट दिया और सत्ता में लाकर खड़ा कर दिया। देश में कानून-व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। अगर कोई सड़क पर चले तो सुरक्षित महसूस करे। सरकार कानून-व्यवस्था ठीक करती है, तो लोग उसके साथ रहेंगे।’ अवामी लीग के समर्थक: जमात पसंद नहीं, BNP का जीतना अच्छा
ई-रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद सबुज भुइया अवामी लीग के समर्थक रहे हैं। अवामी लीग और BNP धुर विरोधी पार्टियां रही हैं। फिर भी मोहम्मद सबुज BNP की जीत से खुश हैं। वे कहते हैं, ‘तारिक रहमान चुनकर आए हैं। वे अच्छे से देश चलाएं, ज्यादा उत्साह ना दिखाएं। वे प्रधानमंत्री बनेंगे, ये सुनकर अच्छा लग रहा है।’ मोहम्मद सबुज आगे कहते हैं, ‘मुझे जमात के लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। कुछ वक्त से ऐसा माहौल बना दिया गया कि मैं खुद को अवामी लीग का समर्थक बताने में भी डरने लगा था। उम्मीद है अब ये डर कम होगा। मैंने इस बार वोट नहीं दिया। अगर अवामी लीग का कैंडिडेट चुनाव लड़ता, तो मैं वोट देता। अब देश ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री चुन लिया है। हमारे लिए भी ये अच्छा है।’ हिंदू वोटर: जमात की हार ने बताया, धर्म की राजनीति नहीं चलेगी
ढाका यूनिवर्सिटी में हमें दीपांकर चंद्र शील मिले। वे स्टूडेंट लीडर होने के साथ बांग्लादेश हिंदू बौद्ध छात्र एकता परिषद के सेक्रेटरी भी हैं। वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए काम करते हैं। दीपांकर कहते हैं, ‘बांग्लादेश सेक्युलर देश है। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले होते रहे। पूरा समुदाय डरकर रहता था। बीते डेढ़ साल में हमने बहुत जुल्म सहा है। चुनाव के नतीजों ने बता दिया कि जमात जैसी पार्टी हमें धर्म के आधार पर नहीं बांट सकती।’ ‘तारिक रहमान बांग्लादेश के लिए सबसे अच्छे लीडर हैं। वे हमारे गार्जियन की तरह हैं। तारिक रहमान से हमारी मांग है कि पिछले दिनों अल्पसंख्यकों पर जो जुल्म हुआ है, उसकी जांच कराएं। बांग्लादेश के सभी लोग बिना डरे रह सकें, ऐसा माहौल बनाना बहुत जरूरी है।’ स्टूडेंट: ‘तारिक रहमान जेंटलमैन, स्टूडेंट लीडर अपने स्वार्थ में हारे
ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले फाहिम मसूम शेख हसीना के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन में शामिल थे। शेख हसीना सरकार गिरने तक वे सड़कों पर लड़ते रहे। आंदोलन से निकली छात्रों की पार्टी NCP चुनाव में बुरी तरह हार गई। उसके 30 में से सिर्फ 6 कैंडिडेट जीते हैं। फाहिम कहते हैं, ‘हमने छात्र आंदोलन से नेताओं को उभरते देखा। इनमें से कई ने यूनुस सरकार बनने के बाद वैसा बर्ताव नहीं किया, जैसी वे बातें करते थे। कई स्टूडेंट ने अपने स्वार्थ में पार्टी बनाई। यहां तक भी ठीक था। NCP ने जमात का समर्थन किया, उसके बाद पार्टी ने अपना आधार खो दिया। कुछ स्टूडेंट लीडर भले जीत गए, लेकिन बांग्लादेश के लोगों की नजरों में उन्होंने साख खो दी है।’
जमात की हार पर फाहिम कहते हैं, ‘जमात अब भी 1971 की पॉलिटिक्स से ऊपर नहीं उठ पाई है। जमात के लोग कैसे बांग्लादेश पर शासन करने की बात कर सकते हैं। उन्होंने बांग्लादेश बनने का विरोध किया था। अब इसी बांग्लादेश में चुनाव जीतना चाहते हैं। ये दोगलापन है। पूरे देश को जमात का दोगलापन पता है। इसलिए लोगों ने उन्हें खारिज कर दिया।’ ‘तारिक रहमान का देश के नेता के तौर पर चुनकर आना खास मौका है। प्रचार के दौरान उन्होंने जैसी मैच्योरिटी दिखाई, उससे पूरा देश उनका मुरीद हो गया। रहमान में लोगों को एकजुट करने का जज्बा है। वे जेंटलमैन हैं। तारिक रहमान ने पूरे चुनाव के दौरान मैसेज दिया कि वे बेहतर बांग्लादेश चाहते हैं। उन्होंने किसी भी पार्टी के खिलाफ बात नहीं की। वे सिर्फ लोगों को एकजुट करने और डेवलपमेंट की बात करते रहे।’ महिलाएं: जमात को लोगों ने पहचान लिया, उसे सही जगह दिखाई
ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालीं मालिहा खान BNP की जीत और जमात की हार से खुश हैं। वे कहती हैं, ‘पिछले 17 साल से हम सही और निष्पक्ष चुनाव का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार इस बार वैसा चुनाव देखने को मिला। हम चाहते थे कि जो सच में लोगों की बात करता हो, वही जनता के वोट से जीते। जुलाई के आंदोलन के बाद हमारी यह उम्मीद पूरी हुई।’ ‘पिछले 17 साल में BNP ने बहुत मुश्किलें झेली हैं। तारिक रहमान खुद भी इस दौर से गुजरे हैं। इतनी मुश्किलों के बाद वे देश का नेतृत्व करने आ रहे हैं। यह हमारे लिए उम्मीद की बात है। उन्होंने अपने मेनिफेस्टो में अच्छी और साफ राजनीति करने का वादा किया है। हम चाहते हैं कि वे अपने वादे पूरे करें।’ ‘जहां तक जमात की हार का सवाल है, लोगों ने उन्हें पहचान लिया है। वोट के जरिए अपना जवाब दे दिया है। ढाका यूनिवर्सिटी के चुनाव के बाद लगा था कि वे राष्ट्रीय चुनाव को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसा नहीं हुआ।’ मालिहा खान आगे कहती हैं, ‘उम्मीद थी कि जो लोग आंदोलन में आगे थे, वे जनता के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे। वे करप्शन और जुल्म के खिलाफ बोलेंगे। बाद में उनमें से कई लोगों पर अलग-अलग आरोप लगे। कुछ विवादों में भी फंस गए। NCP नाम की नई पार्टी बनी, लेकिन लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।’ ‘इससे सवाल उठता है कि क्या वे सच में जुलाई आंदोलन की सही आवाज थे। शायद लोगों ने उनके जरिए उस आंदोलन को स्वीकार नहीं किया। चुनाव के नतीजों से लगता है कि लोगों ने किसी और पर भरोसा जताया है। हम उम्मीद करते हैं कि इस बार जो लोग संसद में जाएंगे, वे सच में जनता के लिए काम करेंगे। बांग्लादेश इलेक्शन पर ये रिपोर्ट भी पढ़ें
अवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, हसीना की सरकार गिराने वाले भी हारे 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है। पढ़ें पूरी खबर…
जमात सपोर्टर बोले- हमें जानबूझकर हराया, रात में रिजल्ट बदला:अवामी लीग के वोटर BNP की जीत से खुश, हिंदू बोले- तारिक रहमान हमारे गार्जियन
📅 Published: February 14, 2026 |
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