दादी-नानी की कहानी श्रृंखला का 75वां आयोजन:लखनऊ के बाल निकुंज स्कूल में बच्चों को प्रेरक कहानियां सुनाईं

📅 Published: November 24, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक श्रृंखला ‘दादी-नानी की कहानी’ का 75वां आयोजन सोमवार को पल्टन छावनी स्थित बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल में किया गया। इस कार्यक्रम में स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने बच्चों को प्रेरक कहानियां सुनाईं। उन्होंने ‘सोने की चिड़िया और नीली बकरी’ की कहानी के माध्यम से जीवन-मूल्यों, लक्ष्य के प्रति एकाग्रता और साहस का संदेश दिया। बाल निकुंज स्कूल एंड कॉलेजेज के प्रबंध निदेशक एच.एन. जायसवाल ने कहानियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कहानियां बच्चों में नैतिकता, संवेदनशीलता और कल्पनाशीलता को बढ़ावा देती हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्य रश्मि शुक्ला ने लोक संस्कृति शोध संस्थान के पदाधिकारियों का स्वागत किया, जिनमें सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सर्वेश माथुर, लेखक राज वर्मा, लोककथा प्रभारी शम्भू शरण वर्मा, डॉ. एस.के गोपाल और नैमिष सोनी शामिल थे। कहानी में माली का छोटा बेटा सोने की चिड़िया की तलाश में निकलता कार्यक्रम में सुनाई गई ‘सोने की चिड़िया और नीली बकरी’ की कहानी में एक माली का छोटा बेटा सोने की चिड़िया की तलाश में निकलता है। उसकी यात्रा में एक नीली बकरी उसका मार्गदर्शन करती है, जो उसे कठिन परिस्थितियों, राक्षसों और बाधाओं से निपटने की सलाह देती है। कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साहस, बुद्धिमत्ता और निरंतर प्रयासों से व्यक्ति न केवल अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है, बल्कि जीवन में भी सफल हो सकता है। बच्चों ने कार्यक्रम में सरस्वती वंदना, स्वागत गीत और अन्य मनोरंजक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक अरविंद दीक्षित, दीपा जोशी, ओ.पी. वर्मा, अखिलेश उपाध्याय, मिथिलेश नायक, दिनेश तिवारी, मीरा मिश्रा, अनुराधा वैश्य, अनीता यादव, अमन और विवेक मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

Read more


📱 Share on WhatsApp 🌐 View Original Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *