पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा की जमानत रद्द कराने को लेकर पंजाब सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में सरकार से पूछा कि दो साल बाद आखिर किन नए हालात में जमानत रद्द करने की मांग की जा रही है। सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर अदालत ने सुनवाई 30 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह सरकार को दिया गया अंतिम अवसर है। हाईकोर्ट ने कहा- यह क्या है? मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका पर हैरानी जताते हुए कहा, “यह क्या है? दो साल बाद अब जमानत रद्द करने की मांग क्यों की जा रही है? क्या कोई नया तथ्य या नई परिस्थिति सामने आई है?” अदालत के इन सवालों पर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा सका। इसके बाद सरकारी वकील ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। पहले भी समय मांग चुकी है सरकार गौरतलब है कि इस याचिका पर 3 दिसंबर को भी सुनवाई हुई थी। उस दिन भी पंजाब सरकार ने तैयारी न होने का हवाला देकर समय मांगा था। इसके बावजूद अगली सुनवाई में भी सरकार कोई नया आधार या तथ्य पेश नहीं कर सकी। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दस साल पुराने मामले में पिछले दो साल पहले मिली थी जमानत पंजाब सरकार ने सुखपाल सिंह खैहरा को 15 जनवरी 2024 को मिली जमानत रद्द करने की मांग की है। यह जमानत 4 जनवरी 2024 को कपूरथला जिले के सुभानपुर थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में दी गई थी। यह एफआईआर वर्ष 2015 के एक एनडीपीएस एक्ट केस से जुड़ी बताई गई है। आरोप है कि उस पुराने मामले में शिकायतकर्ता की पत्नी को धमकाया गया था। इसी आरोप के आधार पर 4 जनवरी 2024 को नई एफआईआर दर्ज की गई। खास बात यह है कि उस समय सुखपाल खैहरा पहले से ही हिरासत में थे। इसके बावजूद उन्हें कुछ ही दिनों बाद, 15 जनवरी 2024 को इस मामले में जमानत मिल गई थी। अब, जमानत मिलने के करीब दो साल बाद, पंजाब सरकार ने अचानक हाईकोर्ट का रुख करते हुए जमानत रद्द कराने की याचिका दाखिल की, जिस पर अदालत ने कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो साल बाद खैहरा की जमानत रद्द कराने पहुंची सरकार:पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी से पूछा- क्या कोई नया तथ्य या नई परिस्थिति, सुनवाई टली
📅 Published: January 9, 2026 |
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