नार्को-आतंकवाद मामले में अमित गंभीर को जमानत से इनकार:हाई कोर्ट सख्त कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि नरमी न्याय के हित में नहीं

📅 Published: January 7, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बहुचर्चित और गंभीर नार्को-आतंकवाद मामले में आरोपी अमित गंभीर को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि आरोपी की भूमिका केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा, जिनसे देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला साधारण आर्थिक अपराध का नहीं, बल्कि नार्को-टेररिज्म से जुड़ा हुआ है, जिसमें नशीले पदार्थों से अर्जित धन का इस्तेमाल सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को पोषित करने के लिए किया गया। हवाला नेटवर्क से करोड़ों विदेश भेजने के सबूत
हाई कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन यह स्थापित करते हैं कि अमित गंभीर ने हवाला नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपए की अवैध राशि विदेश भेजने में सक्रिय भूमिका निभाई। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने सह-आरोपी शेरा के कहने पर चार करोड़ रुपए से अधिक की हवाला ट्रांजैक्शन को अंजाम दिया।
अदालत के अनुसार, भारतीय मुद्रा को दिरहम में परिवर्तित कर दुबई स्थित मनी एक्सचेंज एजेंसियों तक पहुंचाया गया। एनआईए द्वारा आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच में हवाला लेन-देन से जुड़ी ठोस सामग्री सामने आई है। 2019 में अटारी बॉर्डर पर हुई थी रिकॉर्ड तोड़ बरामदगी
यह मामला जून 2019 का है, जब अमृतसर स्थित अटारी बॉर्डर पर कस्टम अधिकारियों ने पाकिस्तान से आए एक ट्रक को रोका था। कागजात में खेप को रॉक सॉल्ट (सेंधा नमक) बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान बोरियों में छिपाकर रखी गई 532 किलोग्राम हेरोइन और 52 किलोग्राम मिश्रित मादक पदार्थ बरामद किए गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत हजारों करोड़ रुपए आंकी गई थी। इतनी बड़ी बरामदगी के बाद गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंप दी। पाकिस्तान-अफगानिस्तान से जुड़े हैंडर्ल्स का खुलासा
एनआईए ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम – UAPA के तहत केस दर्ज किया। जांच में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें ड्रग्स से अर्जित धन को अवैध हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जा रहा था। ट्रायल में देरी पर कोर्ट की चिंता
हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले की धीमी सुनवाई पर भी गंभीर चिंता जताई। अदालत ने पाया कि अभियोजन द्वारा सूचीबद्ध 248 गवाहों में से अब तक केवल 11 गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं, जबकि 237 गवाहों का परीक्षण बाकी है। इस पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट को शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जमानत याचिका खारिज
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए उसे जमानत का फायदा नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि “ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं होगा।”

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