मेरठ के कंकरखेड़ा इलाके में सैन्य अफसर रोशनलाल शाही की जमीन का मुआवजा फर्जी तरीके से लेने का मामला सामने आया है। आरोप हैं कि सरकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने साजिश कर जमीन का मुआवजा किसी और के नाम से निकाल लिया और उसे आपस में बांट लिया। परिवार की शिकायत पर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। न्यायालय के आदेश के बाद ही सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए संबंधित दस्तावेज और मुआवजे की प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है। सैन्य अफसर की जमीन और परिवार की शिकायत साकेत निवासी सैन्य अफसर रोशनलाल शाही की कंकर खेड़ा क्षेत्र में खसरा नंबर 195 में जमीन थी। 13 जनवरी, 1981 को उन्होंने यह जमीन विमला देवी को बेच दी थी। इसके बाद अफसर अपने परिवार के साथ कनाडा चले गए। दो साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। जमीन पर विमला का कब्जा रहा। आरोप है कि इसी दौरान सरकारी महकमे के कुछ लोगों ने साजिश कर रोशनलाल शाही के स्थान पर किसी और व्यक्ति को दिखाकर मुआवजा ले लिया। इसके बाद सभी आरोपियों ने मुआवजे की रकम आपस में बाँट ली। फर्जी तरह से नोटिस जारी वर्ष 1990 में मुआवजा लेने का नोटिस जारी हुआ। तत्कालीन एडीएम एल/ए के कार्यालय से मुआवजा जारी नहीं करने का पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद मुआवजा किसी अन्य नाम पर जारी कर दिया गया। सैन्य अफसर के परिजनों ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल, मेरठ कमिश्नर, डीएम और एसएसपी तक की, लेकिन किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज पुलिस और प्रशासन से सहयोग न मिलने पर परिवार ने न्यायालय की शरण ली। स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और मुकदमे का आदेश जारी किया। इसके बाद सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए सभी संबंधित सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है।
फर्जी कागजों से लिया सैन्य अफसर की जमीन का मुआवजा:मेरठ में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप, कोर्ट के आदेश पर FIR
📅 Published: November 23, 2025 |
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