बलूचिस्तान में एकसाथ 12 जगहों पर बलूचों का हमला:10 पुलिसकर्मियों की मौत, डिप्टी कमिश्नर को किडनैप किया; PM शहबाज बोले- इसके पीछे भारत

📅 Published: January 31, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक साथ 12 जगहों पर हमले किए। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक हमलों में कम से कम 10 सुरक्षाकर्मी की मौत हुई है। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में 37 लड़ाके भी मारे गए। एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि बलूच विद्रोहियों ने क्वेटा, पसनी, मस्तुंग, नुश्की और ग्वादर जिले में शनिवार सुबह 12 से ज्यादा जगहों पर एक साथ हमले किए। राजधानी क्वेटा में कम से कम चार पुलिसकर्मी मारे गए। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि यह चार पुलिसकर्मी उन 10 सुरक्षाकर्मियों में शामिल हैं या नहीं। क्वेटा के एक सीनियर अफसर ने यह भी बताया कि लड़ाकों ने नुश्की जिले के डिप्टी कमिश्नर का अपहरण कर लिया है। BLA ने इसे ‘ऑपरेशन हेरोफ’ नाम दिया है। हमले के बाद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने बयान जारी कर दावा किया कि इन हमलों के पीछे भारत का हाथ है। क्वेटा के बाजार पर BLA लड़ाकों का कब्जा इन हमलों की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है। संगठन ने कहा कि उसने सैन्य ठिकानों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाया। साथ ही यह भी दावा किया कि मुख्य हाईवे बंद किए गए, ताकि सेना की कार्रवाई में बाधा डाली जा सके। BLA लड़ाकों ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर ये दावा किया है कि उन्होंने क्वेटा के एक बाजार इलाके पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हथियारबंद आतंकी बाजार में घुस आए और कुछ समय के लिए पूरे इलाके पर उनका नियंत्रण रहा। हालांकि, इस घटना को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। क्वेटा में सुबह से लगातार धमाके हो रहे क्वेटा में एएफपी के एक पत्रकार ने बताया कि शहर में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। पूरे शहर में भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई, मुख्य सड़कें सुनसान रहीं और कारोबार ठप हो गया। 38 साल के निजी कर्मचारी अब्दुल वली ने बताया, “सुबह से लगातार धमाके हो रहे हैं।” उनकी मां अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें खून की जरूरत थी। उन्होंने कहा, “पुलिस हम पर बंदूक तानती है और कहती है वापस जाओ, वरना मारेंगे। ऐसे में हम क्या करें?” ये हमले ऐसे समय हुए हैं जब एक दिन पहले ही सेना ने दावा किया था कि उसने बलूचिस्तान में दो अलग-अलग अभियानों में 41 विद्रोहियों को मार गिराया है। शहबाज बोले- आतंकवाद के खत्म होने तक लड़ाई जारी रहेगी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बयान जारी कर दावा किया कि इन हमलों को नाकाम कर दिया गया है। उन्होंने इसके लिए सुरक्षा बलों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें और पूरे देश को अपने शहीदों पर गर्व है। साथ ही उन्होंने इन हमलों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश से आतंकवाद के पूरी तरह खत्म होने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। पाकिस्तान का सबसे गरीब राज्य बलूचिस्तान बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत है, जबकि यहां प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है। शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास के मामले में यह देश के बाकी हिस्सों से काफी पीछे है। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और विद्रोह से जूझ रहा है। यह खनिज संसाधनों से भरपूर दक्षिण-पश्चिमी प्रांत है, जिसकी सीमा अफगानिस्तान और ईरान से लगती है। यहां लड़ाके अक्सर सरकारी बलों, विदेशी नागरिकों और दूसरे प्रांतों से आए लोगों को निशाना बनाते हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) बलूचिस्तान का सबसे सक्रिय अलगाववादी संगठन माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में बलूच अलगाववादियों ने दूसरे प्रांतों से आए पाकिस्तानी मजदूरों और विदेशी कंपनियों पर हमले तेज कर दिए हैं। उनका आरोप है कि ये लोग और कंपनियां बलूचिस्तान के संसाधनों का शोषण कर रही हैं। बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा है BLA बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर ——————————————– बलूचिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरान के आर्यों ने बलूचिस्तान बसाया, औरंगजेब से छीना इलाका:पाकिस्तान से आजाद क्यों होना चाहते हैं बलूच, 77 साल के विद्रोह की पूरी कहानी
साल 1540 की बात है, भारत के पहले मुगल शासक बाबर के बेटे हुमायूं को बिहार के शेरशाह सूरी ने युद्ध में हरा दिया। हुमायूं भारत से भाग खड़ा हुआ। उसने फारस यानी ईरान में शरण ली। 1545 में शेरशाह सूरी की मौत हो गई। मौके को भांपकर हुमायूं ने भारत वापस लौटने की योजना बनाना शुरू कर दिया। तब बलूचिस्तान के कबीलाई सरदारों ने उसके इस प्लान में मदद की। बलूचों का साथ पाकर 1555 में हुमायूं ने दिल्ली पर फिर से नियंत्रण कर लिया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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