भारत-EU की डील से अमेरिका इतना भड़का क्यों है:मंत्री बोले- इसमें भारत का ज्यादा फायदा; क्या ट्रम्प का टैरिफ बेअसर हो जाएगा

📅 Published: January 30, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से अमेरिका भड़का हुआ है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोप के लिए यूक्रेन युद्ध से ज्यादा जरूरी ट्रेड है। वह अपने खिलाफ युद्ध को फंड कर रहा है। बेसेंट ने कहा कि इस डील से भारत को ज्यादा फायदा होगा। भारत-EU की डील से अमेरिका इतना परेशान क्यों है, क्या वाकई भारत को इस डील से ज्यादा फायदा होगा और ट्रम्प के टैरिफ का असर घटेगा; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई ‘मदर ऑफ ऑल डील’ क्या है? जवाबः जब दो या ज्यादा देश आपस में ये तय कर लेते हैं कि वे एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर टैक्स, पाबंदियां और रुकावटें कम या खत्म कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो FTA व्यापार का ‘टोल फ्री हाईवे’ है। भारत ने 27 जनवरी को यूरोपीय यूनियन के साथ FTA अनाउंस कर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है… सवाल-2: इससे नाराज अमेरिका किस तरह गुस्सा जाहिर कर रहा है? जवाबः भारत और EU के बीच ट्रेड डील होने के बाद ट्रम्प सरकार के मंत्री इस डील की आलोचना कर रहे हैं… सवाल-3: क्या वाकई इस डील से भारत को ज्यादा फायदा होगा? जवाबः भारत ने 2025 में यूरोप को 6.8 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा। वहीं EU से 5.5 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। यानी दोनों देशों के बीच हो रहे व्यापार में भारत के पास पहले से 1.3 लाख करोड़ रुपए की बढ़त है। इसे टेक्निकल भाषा में ट्रेड सरप्लस भी कहते हैं। इस डील के तहत भारत ने यूरोप से आने वाले करीब 96.6% चीजों से टैरिफ पूरी तरह हटा दिया है या बहुत कम कर दिया है। ऐसे ही यूरोप ने भी भारत से आने वाले 99.5% सामान पर टैरिफ खत्म कर दिया है या घटा दिया है। डील के बाद EU का भारत पर लगने वाला एवरेज टैरिफ 3.8% से घटकर 0.1% हो गया है। भारत-EU की ट्रेड डील से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… यूरोप में भारतीय कपड़े ज्यादा बिकेंगे 20% बढ़ सकता है फार्मा और केमिकल ट्रेड भारत में लग सकती हैं यूरोप की डिफेंस फैक्ट्रियां भारत के चमड़ा कारीगरों का व्यापार बढ़ेगा इसके अलावा भारत की हर तरह की ज्वेलरी पर लगने वाली ड्यूटी खत्म या बहुत कम हो जाएगी। भारत के लोगों को यूरोपियन शराब, यूरोपियन कारें और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे, क्योंकि इन पर लगने वाले प्रीमियम टैरिफ कम हो जाएंगे। इस डील से भारत को फायदा तो होता दिख रहा है लेकिन यह कहना कि भारत को ज्यादा फायदा होगा अभी जल्दबाजी होगी। चाइनीज एकेडमी ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड एंड इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन के सीनियर रिसर्चर जोऊ मी के मुताबिक, अमेरिका को लग रहा है कि पूरी दुनिया उसके लॉजिक के हिसाब से चलेगी। इसमें भले ही उसके साझेदारों का नुकसान हो जाए। अब अमेरिका के साझेदार उसके हिसाब से नहीं चल रहे इसलिए वो ऐसे बयान दे रहा है। सवाल-4: यूरोपियन यूनियन को डील से क्या हासिल होगा? जवाबः भारत ने EU से आयात होने वाली 49.6% चीजों पर तुरंत टैरिफ खत्म कर दिया है। बाकी की 39.5% चीजों पर 5 से 10 साल में टैरिफ खत्म हो जाएगा। EU की ट्रेड डील से यूरोपियन यूनियन के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… भारत में यूरोपीय शराब और वाइन की खपत बढ़ेगी भारत में यूरोपीय कारों की डिमांड बढ़ेगी इसके अलावा मशीनरी पर 44%, केमिकल्स पर 22% और फार्मा सेक्टर पर 11% लगने वाला टैरिफ भी आने वाले कुछ सालों में पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यूरोप के आईटी, इंजीनियरिंग, बिजनेस सर्विसेज और टेलिकॉम जैसे हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर को भी भारत में ज्यादा मौके मिलेंगे। क्योंकि इन सेक्टर में दूसरे देशों के मुकाबले टैरिफ कम लगेगा। सवाल-5: क्या ये डील ट्रम्प के टैरिफ को बेअसर कर देगी? जवाबः ट्रम्प ने भारत के सामानों पर फिलहाल 50% टैरिफ लगा रखा है, जो उनके सत्ता में आने से पहले 10% से भी कम था। इससे भारत के एक्सपोर्ट पर बेहद नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी GTRI के मुताबिक, नवंबर 2025 में भारत ने करीब 3 लाख करोड़ रूपए का सामान निर्यात किया। ये साल 2024 से 11% कम था। सिर्फ अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात में 28.5% की कमी आई। मई 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 80 हजार करोड़ रुपए का निर्यात किया था। अक्टूबर में ये घटकर 56 हजार करोड़ रूपए रह गया। GTRI के मुताबिक, भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात साल 2024–25 में 86.5 अरब डॉलर था। यह 2025–26 में घटकर करीब 50 अरब डॉलर रह सकता है। यानी भारतीय घरेलू बाजार को 3 लाख करोड़ रूपए का नुकसान होगा। सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल, ज्वेलरी, झींगा (श्रिंप) और कालीन के निर्यात पर पडे़गा। आशंका है कि इन सेक्टरों में निर्यात करीब 70% तक गिर जाएगा, जिससे लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। ट्रेड डील के बाद ईयू ने एक्सपोर्ट के लिए भारत की कुछ सीफूड प्रोसेसिंग फैसिलिटीज को भी मंजूरी दे दी है। इससे शिपमेंट्स बढ़ सकेंगी, खासकर ऐसे समय में जब कई प्रोड्यूसर्स को US के टैरिफ की वजह से दबाव झेलना पड़ रहा है। अमेरिका को होने वाले इस निर्यात पर बढ़े टैरिफ का असर जमीन पर दिखने लगा है। सूरत जैसे प्रमुख हब से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक हीरों के उत्पादन में कटौती शुरू हो चुकी है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री 12 लाख लोगों को रोजगार देती है। अर्थशास्त्री शरद कोहली कहते हैं कि ट्रेड डील से भारतीय सामान चीन जितना सस्ता हो सकता है, जिससे यूरोप में इसकी डिमांड बढ़ेगी। ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत को हीरों और जेम्स में जो नुकसान हुआ है, यूरोप से उसकी भरपाई हो सकती है। हालांकि, पूरी भरपाई के बारे में कहना संभव नहीं है। लेकिन 3 से 4 सालों में EU–भारत के बीच का व्यापार करीब 22 लाख करोड़ तक जा सकता है। सवाल-6: इस डील से अमेरिका को किस बात का डर सता रहा है? जवाबः EU और भारत के करीब आने से अमेरिका के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं… सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर छूट सकता है भारत पर टैरिफ का दबाव बेअसर भारत-EU के बीच FTA दो बड़े इकोनॉमिक प्लेयर्स का साथ आना है। यह अमेरिका के लिए सिग्नल है कि दोनों देश अपने एजेंडा पर आगे बढ़ने को तैयार हैं। अमेरिका का विकल्प ढूंढ रहे दुनिया भर के देश अंतरराष्ट्रीय मामलों में JNU के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, ‘इन घटनाओं ने EU को NATO से इतर साझेदारियां तलाशने की इच्छा को और मजबूत किया है। इसलिए EU-India FTA सिर्फ इकोनॉमिक स्ट्रेटजी तक सीमित न रहकर, अमेरिका के खिलाफ EU के लिए एक जियो-पॉलिटिकल इंश्योरेंस के रूप में सामने आता है।’ ————- ये खबर भी पढ़िए… 4 करोड़ लाशों पर बैठा था यूरोप:76 साल पहले कैसे बना NATO, क्या अब बिखरना तय है; आखिरी कील ठोक रहे ट्रम्प तारीख- 4 मार्च 2025। वॉशिंगटन डीसी की एक शाम। अमेरिकी कांग्रेस का संयुक्त सत्र चल रहा था। ट्रम्प मंच पर खड़े बोल रहे थे। उन्होंने अचानक कहा कि अमेरिका को हर हाल में ग्रीनलैंड लेना पड़ेगा। बात इतनी बेहिचक थी कि संसद में बैठे सांसद हंस पड़े, लेकिन ट्रम्प मजाक नहीं कर रहे थे। पूरी खबर पढ़िए…

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