माघी पर सियासी कान्फ्रेंस से कांग्रेस ने किया किनारा:मनरेगा रैलियां और गुटबाजी बनी वजह, शिअद (अमृतसर) ने भी बनाई दूरी

📅 Published: January 14, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के गृह जिले श्री मुक्तसर साहिब में इस बार माघी मेले के मौके पर होने वाली मालवा की सबसे बड़ी सियासी कॉन्फ्रेंस नहीं होगी। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की इस बड़े आयोजन से गैरमौजूदगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। माघी मेले पर हर साल होने वाली यह राजनीतिक रैली मालवा ही नहीं, पूरे पंजाब की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती रही है। ऐसे समय में, जब अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, कांग्रेस का इस सियासी मंच से दूर रहना मालवा में पार्टी की पकड़ ढीली होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मनरेगा आंदोलन और गुटबाजी बनी वजह पार्टी सूत्रों के मुताबिक, G-RAM-G के खिलाफ चल रही रैलियों, ‘मनरेगा बचाओ संघर्ष’ और कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी के चलते इस बार माघी पर सियासी कॉन्फ्रेंस नहीं करने का फैसला लिया गया है।
बताया जा रहा है कि पार्टी के एक बड़े धड़े में इस फैसले को लेकर अंदरखाने नाराजगी है। कई नेता इसे मालवा जैसे निर्णायक इलाके में राजनीतिक अवसर गंवाने के तौर पर देख रहे हैं। पंजाब की राजनीति में मालवा की निर्णायक भूमिका पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र से आती हैं। ऐसे में सरकार बनाने का रास्ता काफी हद तक यहीं से तय होता है।
माझा और दोआबा, दोनों मिलकर भी मालवा के बराबर सीटें नहीं रखते। यही वजह है कि कांग्रेस ने G-RAM-G के खिलाफ सबसे ज्यादा रोष रैलियां भी मालवा में ही की थीं।
मालवा का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है और माघी मेला सीधे ग्रामीण वोटर से जुड़ा हुआ आयोजन माना जाता है, इसके बावजूद कांग्रेस द्वारा इसे नजरअंदाज करना सियासी संदेश दे रहा है। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) भी नहीं करेगा कॉन्फ्रेंस इस बार माघी मेले पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) ने भी सियासी कॉन्फ्रेंस से दूरी बना ली है। इससे पहले यह दल भी माघी मेले के मौके पर अपनी सियासी ताकत दिखाता रहा है।
दो बड़े दलों की गैरमौजूदगी ने माघी मेले की सियासी चमक को फीका कर दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी और भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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