चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने कहा कि मानवाधिकार आयोग केवल शिकायतों की जांच कर सरकार को सिफारिशें भेजने वाला अनुशंसात्मक निकाय है, आदेश पारित करने वाला प्राधिकरण नहीं है। जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कैथल जिले के दर्जनों राइस मिल मालिकों को बड़ी राहत देते हुए कथित प्रदूषण के मामले में मानवाधिकार आयोग द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की है। सुनवाई के दौरान मिल मालिकों ने तर्क दिया कि जिस शिकायत के आधार पर आयोग ने संज्ञान लिया, वह मूलरूप से पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ी है। ऐसे मामलों के लिए पहले से ही जल, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम व पर्यावरण संरक्षण अधिनियम मौजूद हैं। बिना ठोस आधार के नियामकीय या तकनीकी विवाद को मानवाधिकार का मुद्दा नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य की कार्रवाई या निष्क्रियता और मानवाधिकार उल्लंघन के बीच स्पष्ट और प्रत्यक्ष संबंध नहीं दिखाया जाता, तब तक ऐसे मामलों को मानवाधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता। सिर्फ किसी विवाद को मानवाधिकार का रूप देकर आयोग की प्रक्रिया के अधीन नहीं किया जा सकता।
राइस मिलर्स को राहत, प्रदूषण केस में आयोग के आदेशों पर रोक
📅 Published: February 4, 2026 |
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