वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने अमेरिका के मिनेसोटा में सेना तैनात करने की धमकी दी, अप्रवासियों की गिरफ्तारी के बाद हिंसा भड़की

📅 Published: January 16, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि वह मिनेसोटा में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए सदियों पुराने कानून का सहारा ले सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि “अगर मिनेसोटा के भ्रष्ट राजनेता कानून का पालन नहीं करते और विद्रोहियों को ICE पर हमला करने से नहीं रोकते तो मैं विद्रोह अधिनियम लागू करूंगा। विद्रोह अधिनियम पहली बार 1792 में पारित हुआ और 1871 में संशोधित किया गया। यह कानून राष्ट्रपति को सैन्य बलों को तैनात करने की अनुमति देता है ताकि विद्रोह या अशांति को कंट्रोल किया जा सके। ट्रम्प का यह बयान मिनियापोलिस में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंटों की बढ़ी मौजूदगी और दो फायरिंग घटनाओं के बाद सामने आया है। पहली घटना में एक ICE एजेंट ने अमेरिकी नागरिक रेनी गुड को गोली मार दी थी, जबकि दूसरी में एक वेनेजुएलाई नागरिक घायल हुआ। ट्रम्प पिछले कई हफ्तों से मिनेसोटा के डेमोक्रेट नेताओं से नाराज हैं। उन्होंने राज्य में रहने वाले सोमाली मूल के लोगों को कचरा बताते हुए देश से बाहर फेंकने जैसी टिप्पणी भी की है। ट्रम्प प्रशासन पहले ही मिनियापोलिस इलाके में करीब 3,000 अधिकारियों को तैनात कर चुका है, जो हथियारों के साथ सैन्य जैसी वर्दी और मास्क पहनकर गश्त कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने 2025 में सत्ता संभालने के बाद बड़े पैमाने पर अवैध अप्रवासियों की गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन की सख्त मुहिम शुरू की है। ये एजेंट हजारों लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं। स्थानीय लोग इसे नस्लीय भेदभाव और आतंक मान रहे हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ दिन-रात विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। स्थानीय लोग सीटी बजा रहे हैं, ढोल-टैंबरीन पीट रहे हैं और नारे लगा रहे हैं। बुधवार रात उस इलाके में बड़ी भीड़ जमा हुई, जहां वेनेजुएलाई नागरिक को गोली लगी थी। इस दौरान अधिकारियों ने ग्रेनेड छोड़े और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इन घटनाओं के बाद ट्रम्प प्रशासन और मिनेसोटा के नेता एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहे हैं। ट्रम्प पहले भी डेमोक्रेट शासित शहरों में नेशनल गार्ड को फेडरल कंट्रोल में लेकर इमिग्रेशन कानून लागू करवा चुके हैं। लॉस एंजिल्स में की गई ऐसी ही कार्रवाई को एक जज ने दिसंबर में असंवैधानिक बताया था।

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