वाराणसी में शौर्य-चक्र-विजेता शहीद की पत्नी की रोक दी पेंशन:डीएम ऑफिस के बाबू ने कहा – फाइल नहीं मिल रही, बोलीं – शहीदों की परिजनों का हाल बुरा

📅 Published: January 31, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

वाराणसी के महमूरगंज स्थित शिवपुरम कालोनी के रहने वाले महेंद्र प्रताप सिंह साल 2008 में अफगानिस्तान में आत्मघाती हमले में शहीद हुए थे। उनकी शाहदत को सलाम करते हुए देश ने उन्हें प्रतिष्ठित शौर्य चक्र मरणोपरांत दिया था। इसमें उनकी विधवा उमा सिंह को शासन स्तर से पेंशन का प्रावधान है। लेकिन इस पेंशन के लिए उन्हें अक्टूबर से दौड़ना पड़ रहा है। उन्होंने इस संबंध में जब डीएम से शिकायत की बात कही तो सरकारी अमले में हलचल मच गयी और बाबू ने स्वयं फोन कर उन्हें पैसे ट्रेजरी को भेजने की बात कही। ऐसे में दैनिक भास्कर ने उमा सिंह से उनके आवास पर पहुंचकर बात की और उनकी परेशानियों को जाना। पढ़िए रिपोर्ट… केंद्र और राज्य सरकार से मिलती है पेंशन उमा सिंह ने बताया – हमारे पति की शहादत के बाद साल 2008 में पांच दिन बाद शव वाराणसी पहुंचा था। उसके बाद सरकार ने हमें 5 लाख तुरंत दिए थे। उसके बाद शौर्य चक्र मिला तो उसका भी 6 लाख रुपया मिला। फिर केंद्र सरकार ने और राज्य सरकार ने पेंशन की व्यवस्था की जो साल में एक बार मिलती है। जुलाई में दिया था लाइफ सर्टिफिकेट उमा ने बताया – जुलाई में हर साल हम लोगों को लाइफ सर्टिफिकेट देना होता है। मै अकेले हूं इसलिए लड़की के पास दिल्ली रहती हूं। दिल्ली से आकर मैंने जुलाई में सभी डाक्यूमेंट डीएम कार्यालय में जमा कराए थे। उसके बाद दिल्ली चली गई। लेकिन अक्टूबर तक जब मेरी पेंशन नहीं आयी। तो मैंने डीएम कार्यालय के बाबू जैनुल से बात की तो उन्होंने कहा की आ जाएगी। उसके बाद कई बार उनसे बात की पर उन्होंने हर बार बहाना बना दिया। नए बाबू ने कहा हमें नहीं मिली फाइल उमा सिंह ने बताया – मै दो दिन पहले दिल्ली से एक शादी समारोह में शामिल होने आयी। उसके बाद शुक्रवार को डीएम कार्यालय पहुंची तो वहां नए बाबू मिले। उनसे जब मैंने अपनी फाइल के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता हम तो एक महीना हुआ आए। जैनुल बाबू से मांगा पर उन्होंने नहीं दिया। इसपर जब मैंने शिकायत डीएम से करने की बात कही तो उन लोगों ने वहां से मुझे जाने को कहा। सुबह फोन करके दी जानकारी उमा ने बताया – आज सुबह उसी कार्यालय के बाबू ने फोन करके बताया कि आप की फाइल बनाकर ट्रेजरी को भेज दी गयी है। पेंशन आ जाएगी लेकिन जिस तरह से यह सरकार शहीदों के सम्मान की बात कर रही है। वह कहीं दिखाई नहीं दे रही है। एक कार्यालय का बाबू शहीद की बीवी को इस तरह दौड़ा रहा और लोगों को फर्क नहीं पड़ रहा। शहीदों के परिजनों का हाल बुरा है। बस पैसे की डिमांड नहीं होती फाइल पास करवाने के नाम पर।

Read more


📱 Share on WhatsApp 🌐 View Original Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *