शिनाख्त में देरी जमानत का आधार हो सकता है: हाईकोर्ट:भदोही के प्रिंसिपल हत्याकांड में शूटर आरोपी जुनैद की जमानत मंजूर

📅 Published: November 22, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि आरोपी की शिनाख्त परेड में अनावश्यक देरी ज़मानत मंजूर करने का आधार हो सकती है। क्योंकि यह विधि का स्थापित सिद्धांत है कि जब तक कोई व्यक्ति विधिपूर्वक दोषी साबित न हो जाए, उसे निर्दोष माना जाए। यह सिद्धांत ज़मानत नियम और जेल अपवाद के सिद्धांत का आधार है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने भदोही के चर्चित प्रिंसिपल योगेंद्र बहादुर सिंह हत्याकांड में बतौर शूटर आरोपी जुनैद की जमानत मंजूर करते हुए की। याची की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता कमल कृष्ण व श्यामल कुमार प्रयागी का कहना था कि याची एफआईआर में नामजद नहीं था। उसे बाद में अभियुक्त बनाया गया। शिनाख्त परेड घटना के 54 दिन बाद कराई गई, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार मान्य नहीं है। इसके अलावा शिनाख्त परेड से पूर्व ही याची को बेपर्दा कर दिया गया था। गिरफ्तारी के समय मीडिया चैनलों और अखबारों में उसकी फोटो प्रकाशित हो गई थी। ऐसे में उसके बाद कराई गई शिनाख्त परेड दूषित है। अपर शासकीय अधिवक्ता का कहना था कि याची इनामी अपराधी है। उसे पुलिस ने बड़ी मेहनत के बाद मुंबई से गिरफ्तार किया। ज़मानत पर रिहा करने पर मुकदमे के ट्रायल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली। मामले के तथ्यों के अनुसार इंद्र बहादुर ने 21 अक्टूबर 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई कि उसके भाई योगेंद्र बहादुर सिंह इंद्र बहादुर इंटर कॉलेज भदोही में प्रिंसिपल थे। घटना वाले दिन वह अपनी कार से कॉलेज के लिए घर से निकले थे। कुछ दूर बाइक सवार दो लोगों ने कार रोककर उन्हें गोली मार दी। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

Read more


📱 Share on WhatsApp 🌐 View Original Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *