संदेशखाली गैंगरेप- 2 विक्टिम पलटीं, एक गीता पाठ करा रहीं:CBI को 50 शिकायतें मिलीं लेकिन विक्टिम कहां; शाहजहां, शिबू, उत्तम जेल में

📅 Published: February 7, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना का छोटा सा गांव संदेशखाली। फरवरी 2024 में ये गांव सुर्खियों में आया, जब तीन महिलाओं ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC के नेता रहे शाहजहां शेख पर गैंगरेप के आरोप लगाए। महिलाओं की कहानी दिल दहलाने वाली थी। आरोपों के मुताबिक, शाहजहां और उसके लोगों को जो औरत अच्छी लगती, उसे पार्टी की मीटिंग के बहाने ऑफिस में बुला लेते। दो दिन, तीन दिन, चार दिन, जब तक मन होता, ऑफिस में ही रखते। अगर कोई महिला बुलाने पर नहीं आती उसे घर से उठा लेते। ये सब 13 साल से चल रहा था। शाहजहां शेख और उसके करीबी शिबू हाजरा, उत्तम सरदार को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। शाहजहां के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट, गैंगरेप के साथ जमीन कब्जा करने के भी आरोप लगे। CBI को करीब 50 शिकायतें मिलीं, लेकिन कुछ ही महीनों में दो महिलाओं ने केस वापस ले लिया। हालांकि, तीनों आरोपी अब भी कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में हैं। दो साल बीत चुके हैं। मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। संदेशखाली में क्या बदला, विक्टिम और उनके परिवार किस हाल में है, तीनों आरोपियों का खौफ कितना कम हुआ और केस कहां तक पहुंचा? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कोलकाता से लगभग 90 किलोमीटर दूर संदेशखाली पहुंचीं। विक्टिम नंबर-1
संदेशखाली में गीता पाठ और हनुमान चालीसा
संदेशखाली गांव एक टापू पर बसा है। धमाखाली से यहां हम नाव से नदी पार करके पहुंचे। फेरीघाट से जाने वाला रास्ता BJP और TMC के झंडों से पटा हुआ है। टापू में अलग-अलग पाड़ा यानी मोहल्ले हैं। केस की अकेली विक्टिम अब रेखा पात्रा ही हैं। वे माझेर पाड़ा में रहती हैं। यहीं से दो साल पहले महिलाओं ने शाहजहां शेख के खिलाफ मोर्चा खोला था। रेखा अब कोलकाता शिफ्ट हो चुकी हैं। SIR की प्रक्रिया के लिए संदेशखाली आई हुई थीं। यहां लाइब्रेरी मैदान में 30 जनवरी को हिंदू जागरण मंच ने गीता और हनुमान चालीसा का पाठ कराया था। रेखा अलग-अलग पाड़ों में जाकर उसी का पर्चा बांट रही थीं। वे घर-घर जाकर कह रही थीं, ’ये किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। इसके लिए आप कुछ योगदान करें और परिवार के साथ इसका हिस्सा बने। लाल पाड़े वाली सफेद साड़ी पहनकर आना है। उस दिन खाना बनाने की जरुरत नहीं है, यहीं खाना है। संदेशखाली की महिलाओं के लिए यही सही रास्ता है, ये हमारी ताकत है।’ हमने रेखा पात्रा से पूछा- क्या पहले भी इस तरह का आयोजन हुआ था? जवाब में वे कहती हैं, ‘नहीं, ऐसा पहली बार हो रहा है।‘ रेखा पात्रा ने 2024 में BJP के टिकट पर बशीरहाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। ‘शाहजहां शेख को फांसी होगी, तभी इंसाफ मिलेगा’
संदेशखाली के मौजूदा माहौल के बारे में पूछने पर रेखा कहती हैं, ‘संदेशखाली में पुलिस आज भी लोगों को झूठे केस में अंदर कर देती है। BJP का समर्थन करने वालों पर केस कर दिया जाता है। अभी कुछ दिनों पहले ही दो लड़कों पर केस किया गया। राज्य की पुलिस हमारे खिलाफ है। कैसे कह दें कि डर का माहौल नहीं है। मैं इन वजहों से ही कोलकाता शिफ्ट हो गई हूं।‘ पिछले दो साल के बारे में पूछने पर वे कहती हैं, ‘मेरी जिंदगी में बदलाव तब आएगा, जब शाहजहां शेख और उसके गुर्गों को फांसी की सजा दी जाएगी। शाहजहां शेख ने कहा था मैं भले ही जेल चला जाऊं, लेकिन मैंने हजारों शेख खड़े किए हैं, जो मेरे लिए काम करेंगे। अभी कुछ दिन पहले ही केस के एक मुख्य गवाह का एक्सीडेंट करके उसे मार दिया गया। इसलिए डर लगता है कि कहीं कुछ हो न जाए।’ सियासी जिम्मेदारियों के बारे में पूछने पर रेखा कहती हैं, ’इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा हैं। पार्टी जो पद देगी, मैं उसके मुताबिक काम करती जाऊंगी।’ विधानसभा चुनाव में फिर किस्मत आजमाएंगी क्या? वे कहती हैं, ’पार्टी जो फैसला लेगी, वो मुझे मंजूर है।’ संदेशखाली केस में आपके साथ शिकायत करने वाली दो महिलाओं ने पिछले दिनों केस वापस ले लिया। आरोप है कि BJP ने उनसे प्लेन पेपर पर साइन करा लिया था। इसके जवाब में रेखा कहती हैं, ‘वो दोनों पहले से ही TMC से जुड़ी हुई थीं। हालांकि एक दिन उन्हें अहसास होगा कि उन्होंने क्या कर दिया। दोनों हिंदू हैं, एक न एक दिन उन्हें हमारी शरण में आना ही पड़ेगा।‘ विक्टिम नंबर-2
शाहजहां के गुंडों से पीछा छूटा, अब हालात बेहतर
इसके बाद हम माझेपाड़ा में दूसरी विक्टिम कविता (बदला हुआ नाम) से मिलने पहुंचे। हम लोकसभा चुनाव के दौरान यहां आए थे, तब मिट्टी का घर था। इसके बाहर कविता की सुरक्षा में पुलिस बैठी थी। अब डेढ़ साल बाद तस्वीर अलग है। मिट्टी की झोपड़ी की जगह पक्का मकान है। कविता हमें घर के पास ही गली में खड़ी मिलीं। केस के बारे में पूछने की कोशिश की, लेकिन बात करने को राजी नहीं हुईं। वे बांग्ला में कहते हुए निकल गईं, ‘ऐखोन कौनो प्रॉब्लम नेई, ऐखोन सोब ठीक आछे।’ मतलब फिलहाल कोई परेशानी नहीं है, सब ठीक है। इसके बाद हम संदेशखाली के बाजार पहुंचे, जहां आंदोलन का हिस्सा रहीं डॉली अधिकारी की कपड़े की दुकान है। डॉली खुश हैं कि शाहजहां शेख के गुर्गे शिबू हाजरा और उत्तम सोदार जेल में हैं। वे कहती हैं, ‘लोग इनके आतंक से परेशान थे। रोजी-रोटी कमानी मुश्किल थी। शिबू और उत्तम ने मेरे पति को बुलाकर धमकी दी थी कि अगर बात नहीं मानी, तो दुकान नहीं चलने देंगे।‘ वे आगे कहती हैं, ‘इन्होंने सब पर जुल्म किया। लड़कियों और महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव किया गया और पुरुषों को मारा-पीटा। अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो उनके आतंक का शिकार होना पड़ता। पहले गांव के लोग आपस में बंटे हुए थे। यहां आपस में बात भी BJP और TMC देखकर की जाती थी। इन लोगों के जेल चले जाने के बाद अब ये दूरियां कम हुई हैं और लोग प्यार से रह रहे हैं।‘ विक्टिम नंबर-3
लीज पर कहकर जमीन कब्जा ली, न पैसे दिए न जमीन मिली
इसके बाद हम सुनीता सोदार (बदला हुआ नाम) से मिले। इन्होंने शाहजहां शेख और उसके साथियों पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया था। सुनीता बताती हैं, ‘2010 में आए चक्रवती तूफान आयला ने हमें बर्बाद कर दिया। खेती की जमीन में नमक वाला पानी भर गया। यहां खेती के बजाय मछली पालन होने लगा। शाहजहां शेख के गुर्गों ने हमसे जमीनें लीज पर ले लीं और पैसा भी नहीं दिया। उनका डर इतना था कि लोग न पैसे मांग सके और न जमीन वापस ले सकते थे।‘ वे आगे बताती हैं, ‘तूफान में मेरा पूरा मकान टूटकर तबाह हो गया था। शाहजहां के गुर्गे उत्तम और उसके साथी कई बार घर की फोटो खींचकर ले गए। बनवाने का वादा किया, लेकिन कुछ नहीं कराया। वे हर बार सरकारी तिरपाल देकर फोटो खींच लेते, लेकिन मिलता कुछ नहीं। इतने साल बाद अब जाकर घर का कुछ हिस्सा तैयार किया है।‘ शाहजहां के खिलाफ दो साल पहले हुए आंदोलन के बारे में सुनीता बताती हैं, ‘पहले अंधेरा हो जाने के बाद बाहर नहीं निकल सकते थे। अब ऐसा नहीं है। पहले से आतंक थोड़ा कम हुआ है।’ विक्टिम नंबर-4
शाहजहां जेल न जाता, तो जमीन वापस नहीं मिलती
2024 में राशन घोटाले में शेख शाहजहां के घर ईडी की रेड पड़ी थी। इसी के बाद संदेशखाली की महिलाओं ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने की शिकायत की थी। इस मामले में करीब 50 महिलाओं ने याचिका दायर की थी, जिसके बाद शाहजहां शेख को TMC ने पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि अब कई विक्टिम फैमिली अपनी जमीन वापस ले रही हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं, जिन्हें लीज के पैसे मिले हैं और कुछ को नहीं। पार्वती उनमें से एक हैं। पति का निधन हो गया। वे संदेशखाली में बेटों के साथ रहती हैं, जो खेती करते हैं। पार्वती बताती हैं, ‘हमारे पास 3 एकड़ जमीन थी। शिबू हाजरा और उत्तम ने उस पर कब्जा कर लिया था। तीन साल जमीन उन्हीं के पास थी, जिसमें मछली पालन हो रहा था। हमें एक पैसा नहीं दिया। उनके जेल जाने के बाद जमीन वापस मिली। अगर वे अंदर नहीं जाते, तो शायद आज भी नहीं मिलती।’ पार्वती के छोटे बेटे बताते हैं, ‘कुछ महीने पहले ही जमीन वापस मिली है, लेकिन खेती करने लायक नहीं थी। हमने 30 हजार रुपए लगाकर मिट्टी ठीक कराई है। कई दिन तक मैं खुद भी काम करता रहा। अब जमीन धान की खेती के लायक हुई है।‘ हाफीज्जुल रहमान गाजी भी खुद को शाहजहां शेख का विक्टिम बताते हैं। वे कहते हैं, ‘इनके (शेख शेरजहां) गुंडे जब से अंदर गए हैं, यहां लोग आराम से जिंदगी गुजार रहे हैं। नहीं तो ये लोगों की जमीन ही नहीं छोड़ते थे।‘ उन्हीं के बगल में बैठे श्यामल बारो कहते हैं, ‘संदेशखाली के लोग अब आजाद हुए हैं। इनके आंतक के कारण लोगों ने जीना छोड़ दिया था। ये लोग इतने घटिया थे कि एक प्रेग्नेंट महिला इनके पैर पकड़ती रही, लेकिन फिर भी उसके पति को नहीं छोड़ा। हर शख्स को डराकर काबू में रखना चाहते थे। अब सब शांत हो गए हैं।‘ शाहजहां की मां बोलीं…
मैं टीचर रही, क्या बेटे को रेप सिखाऊंगी
इसके बाद हम शेख शाहजहां के घर पहुंचे। ये संदेशखाली से करीब 7 किलोमीटर पहले ही है। सड़क से सटकर चार मकान बने हैं। यहां शाहजहां शेख के परिवार के साथ उसके दो भाई और मां रहती हैं। घर पर कुछ बच्चे खेलते मिले। हमारी पहली मुलाकात शाहजहां के भाई की पत्नी से हुई। उन्होंने शाहजहां की मां रजिया शेख से मिलवाया। शाहजहां से मुलाकात हुई या नहीं, ये पूछते ही 70 साल की रजिया कहती हैं, ‘अब तक तीन बार मिली हूं। हर बार वो एक ही बात कहता है- मां मेरे लिए दुआ करो, अल्लाह सब ठीक कर देंगे। मुझे भी कानून पर भरोसा है। इतने दिन से वो जेल में हैं, हम सबको न्याय की उम्मीद है।‘ राजिया आगे कहती हैं, ‘हमारे परिवार के बारे में क्या कुछ नहीं कहा गया, जबकि मैं खुद टीचर थी। आसपास के कई बच्चे मेरे पास पढ़ने आते थे। अब आंखें काम नहीं करतीं, इसलिए पढ़ाना छोड़ दिया। आपको लगता है कि मैं अपने बच्चों को रेप की शिक्षा दूंगी। मैं दो बार हज करके आई हूं। जिस साल ये घटना हुई, मेरे बेटे और बहुएं भी हज के लिए जाने वाले थे, लेकिन खुदा की कुछ और ही मर्जी थी।‘ शाहजहां को जेल में इसलिए डाला क्योंकि वो मुसलमान
मां रजिया शेख के पास खड़ी शाहजहां की भाभी कैमरे पर आने को तो राजी नहीं हुईं, लेकिन मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, ‘जिस वक्त शाहजहां शेख के खिलाफ आंदोलन हुआ, सभी चैनलों में दिखाया गया। उसके पक्ष में लोगों ने आंदोलन किया, तो किसी ने नहीं दिखाया।‘ शाहजहां ने किसी को आंख उठाकर भी नहीं देखा। न ही उसने मदद करते वक्त किसी की जाति या धर्म देखा, लेकिन उसे धर्म देखकर जेल में डाला गया है। ‘संदेशखाली हमारे घर से इतनी दूर है, वो वहां क्या करने जाएगा? हमारा सारा कारोबार नदी के इस पार है। वहां से हमारा कोई लेना-देना नहीं हैं। उसे इसलिए जेल में डाला गया क्योंकि वो मुसलमान है। यहां अब सिर्फ हिंदू मुसलमान ही होता है।‘ वे आगे कहती हैं, ‘हमारे परिवार में सब पढ़े-लिखे हैं। पति डॉक्टर हैं। आसपास के लोगों में ही हमारा अच्छा उठना-बैठना है। हम तो मदद भी धर्म देखकर नहीं करते। फिर भी हमारे साथ ऐसा हो रहा है।‘ पिछले दो साल में आए बदलाव के बारे में पूछते ही वे गुस्से में कहती हैं, ‘हमारी जिंदगी ही मुश्किल हो गई है। सारा काम घर की महिलाओं को देखना पड़ता है। बच्चों को स्कूल पहुंचाने से लेकर कोर्ट कचहरी तक सब हम ही लोग देख रहे हैं। कभी नहीं सोचा था कि ऐसी जिंदगी हो जाएगी।‘ पुलिस बोली- शाहजहां मर्डर और हिंसा के केस में जेल में
केस की जांच कहां तक पहुंची, जब इसकी जानकारी हमने संदेशखाली पुलिस स्टेशन के SHO से मांगी, तो उन्होंने कहा कि चार्जशीट कोर्ट में जा चुकी है। इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते। लिहाजा हमने बशीरहाट SP ऑफिस का रुख किया। यहां एक पुलिस अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि वो दो मामलों में जेल में हैं। एक 2019 का मामला है, जब शाहजहां शेख को इलेक्शन के बाद प्रदीप मंडल, देवदास मंडल और सुकांता मंडल की हत्या के मामले में CBI ने मुख्य आरोपी पाया था। इसके अलावा दूसरा केस 2024 में ED की रेड के दौरान हुई हिंसा का है। रेप केस के बारे में पूछने पर बोले कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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