शेख हसीना के तख्तापलट और भागकर भारत आने के बाद से ही बांग्लादेश और इंडिया के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। एक तरफ बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ जमात और BNP जैसी पार्टियां हसीना को वापस भेजने की मांग पर अड़ी हुई हैं। 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव हैं। इन चुनावों में भी सबसे बड़ा मुद्दा भारत के साथ दोस्ती या दुश्मनी ही नजर आ रहा है। फिलहाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार डॉ यूनुस चला रहे हैं। ये सरकार हिंदुओं पर हो रहे हमलों को कम्युनल न मानकर निजी दुश्मनी के मामले बता रही है। दैनिक भास्कर ने डॉ यूनुस के चीफ एडवाइजर और प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम से भारत से रिश्तों, शरिया कानून और हिंदुओं के कत्ल जैसे मुद्दों पर बात की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सबसे बुरे दौर में हैं। आप भारत से क्या चाहते हैं?
जवाब: भारत को समझना होगा कि बांग्लादेश बड़ा देश है। वो हमें भूटान न समझे। हम 18 करोड़ आबादी वाले देश हैं। हसीना के दौर में खुलेआम चुनाव में धांधली हुई। इसके बावजूद किसने हसीना का समर्थन किया, लोग ये सब समझते हैं। रिश्तों को बेहतर करने के लिए दोनों देशों को समझना होगा कि रिश्ता ईमानदारी, सम्मान और बराबरी के साथ हो सकता है। हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। भारत हमारा बड़ा पड़ोसी है। भारतीय इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है। हमारे बीच 4 हजार किमी का बॉर्डर है। हम भौगोलिक रूप से जुड़े हुए हैं। एक-दूसरे की रिश्तेदारियां हैं। हमारी भाषा, संस्कृति काफी मिलती-जुलती है। सवाल: डॉ. यूनुस क्या चाहते हैं, वे इन विवादों को कैसे देख रहे हैं?
जवाब: मुझे लगता है कि सभी शेख हसीना की वापसी चाहते हैं। उनके दिल्ली में होने से किसी का फायदा नहीं हो रहा। वे वहां रहकर बांग्लादेश में लोगों को भड़का रही हैं, विद्रोह की कोशिश कर रही हैं। सवाल: बांग्लादेश की टीम ने भारत आकर टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप खेलने से मना कर दिया, ऐसा क्यों?
जवाब: टीम की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी चिंता थी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने जो फैसला लिया, हमने उसका समर्थन किया। मैं इस पर ज्यादा नहीं कहना चाहता। सवाल: चुनाव के ठीक पहले 118 अफसरों का प्रमोशन हुआ लेकिन उसमें एक भी हिंदू या अल्पसंख्यक नहीं है?
जवाब: उसमें बौद्ध कम्युनिटी से आने वाले एक अफसर हैं। वैसे मुझे लगता है कि हम धर्म देखकर ऐसे फैसले नहीं करते। हसीना सरकार में अच्छे अफसरों को काफी नजरअंदाज किया गया था। सवाल: मतलब आप कह रहे हैं कि सभी हिंदू अफसर अवामी लीग के समर्थक हैं?
जवाब: हमने सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि उन मुस्लिम अफसरों को भी प्रमोट नहीं किया, जो भ्रष्ट या नाकाबिल थे। हमने जो नई सरकारी नौकरियां दी हैं, उनमें कई कर्मचारी हिंदू कम्युनिटी के भी हैं। सवाल: स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी की हत्या हुई, सरकार ये क्यों नहीं रोक सकी?
जवाब: 2014 में हसीना के वक्त चुनाव में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। BNP ने चुनाव का बहिष्कार किया था। तब चुनाव में 115 लोगों की हत्या हुई थी। अब ऐसा नहीं है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इस बार चुनाव अनाउंस होने के बाद से अब तक सिर्फ 4 मौतें हुईं। इसमें स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी भी शामिल हैं। उस्मान को अवामी लीग के समर्थकों ने मारा है। हमारी रिपोर्ट्स बताती हैं कि अवामी लीग के सीनियर लीडर ने हादी को मरवाने के लिए फंडिंग की है। पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक हादी की हत्या करने के बाद हत्यारे बांग्लादेश की सीमा पार करके भारत में दाखिल हो गए। सवाल: बांग्लादेश की भारत से दूरी बढ़ रही है, लेकिन दूसरे देशों से नजदीकियां बढ़ी हैं?
जवाब: हमें पूरी दुनिया से समर्थन मिला है। अमेरिका, चीन, सार्क देश और वेस्टर्न यूरोप के देशों से समर्थन मिला है। डॉ यूनुस ने शांति और स्थिरता लाने के लिए काम किया है। इकोनॉमी में भी ग्रोथ देखने को मिली है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि हम 6% ग्रोथ के साथ आगे बढ़ेंगे। हमारा फोकस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के साथ संबंध बेहतर करने पर था और डॉ यूनुस ने इसे बखूबी किया है। सवाल: चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले और हत्याएं हुईं, आपके सरकार में रहते ऐसा कैसे हो रहा है?
जवाब: पिछले साल हमने हिंसा पर सालाना रिपोर्ट जारी की थी। दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा के वक्त हालात बेहतर थे। कम्युनल और हेट क्राइम के मामले में पिछले एक साल में सिर्फ एक ही हत्या हुई है, जिसमें दीपू चंद्र दास का मामला है। दूसरी घटनाओं में जमीन और कानून व्यवस्था के मामले या किसी दूसरी वजहों से हत्या हुई हैं। अवामी लीग हर हिंदू की हत्या को धार्मिक हिंसा में हुई मौत बता रही है। आप खुद जाकर इन्वेस्टिगेशन करें। हम आपका स्वागत करते हैं कि आप जाकर उन परिवारों से मिलें और बात करें। सवाल: हिंदू अल्पसंख्यक कम्युनिटी ने डेटा देकर कहा कि पिछली सरकार के मुकाबले अपराध बढ़े हैं, क्या वे झूठ बोल रहे हैं?
जवाब: मुझे लगता है कि ऐसे संगठनों के नेता अवामी लीग से मिले हुए हैं। वे जो डेटा जारी करते हैं वो गलत हैं। कई मीडिया संगठनों ने उनके डेटा पर रिसर्च की है। वे बताते हैं कि डेटा में से कोई भी घटना कम्युनल किलिंग की नहीं है। ज्यादातर मामले लूटपाट, आपसी रंजिश के हैं। बांग्लादेश हिंदू, बुद्ध, क्रिश्चियन परिषद नाम के संगठन और लोग हसीना के पालतू कुत्तों की तरह के हैं। सवाल: डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार निष्पक्ष चुनाव कराना कैसे सुनिश्चित करेगी?
जवाब: ये अंतरिम और निष्पक्ष सरकार है। बांग्लादेश में किसी पार्टी ने अंतरिम सरकार पर पक्षपाती होने का आरोप नहीं लगाया है। डॉ यूनुस की सरकार में ईमानदारी से काम हो रहा है। हमने चुनाव में 10 लाख सिक्योरिटी फोर्स, पुलिस, पैरामिलिट्री और एलीट फोर्स लगाने का फैसला किया है। मुश्किल जगहों पर सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षाबलों को वियरेबल कैमरे देंगे। हमने क्रिटिकल इलाकों में ड्रोन सर्विलांस की भी तैयारी की है। ताकि हम चुनाव मॉनीटर कर सकें। अगर चुनाव के दौरान कोई गड़बड़ी होती है, तो पुलिस और सुरक्षाबल तुरंत मौके पर पहुंच पाएं। हमने इसकी डिटेल प्लानिंग की है। लोकल प्रशासन में हमने निष्पक्षता और बैकग्राउंड चेक करके ही अधिकारियों को चुना है। सवाल: वोटिंग के दिन एक वोट सरकार बनाने के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए देना होगा, क्या इससे कनफ्यूजन नहीं होगा ?
जवाब: मुझे लगता है कि जिसे भी बहुमत मिलेगा, वो सरकार बनाएगा। बाकी रेफरेंडम देश में रिफॉर्म को लेकर है। अगर लोग ‘हां’ के पक्ष में वोट देते हैं तो हम बेहतर राजनीतिक व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उसमें कोई भी नेता हसीना की तरह तानाशाही नहीं कर पाएगा। सवाल: अगर किसी को बहुमत नहीं मिला तब क्या होगा?
जवाब: किसी भी दूसरे देश या भारत की तरह गठबंधन की सरकार बन सकती है। सवाल: अगर रेफरेंडम के पक्ष में वोटिंग हुई तो क्या बांग्लादेश से सेक्युलरिज्म निकाल दिया जाएगा?
जवाब: मुझे लगता है कि वैसा ही रहेगा। सेक्युलरिज्म को हम प्लूरलिज्म से बदलेंगे। हालांकि मुझे नहीं लगता कि इस मामले में कोई बड़ा बदलाव होगा। सवाल: क्या बांग्लादेश में सेक्युलरिज्म की जगह इस्लामिक शरिया कानून होगा?
जवाब: ऐसा नहीं होगा, इसे लागू करने का सवाल ही नहीं उठता। सवाल: 40% वोट शेयर वाली अवामी लीग को चुनाव नहीं लड़ने दे रहे, आपको नहीं लगता ये अलोकतांत्रिक है?
जवाब: अवामी लीग अपना वोट शेयर 40% होने का दावा करती है, लेकिन सभी चुनावों में धांधली हुई थी। उनका वोटिंग शेयर 10% ही था। वे जानते थे कि BNP उनके लिए चुनौती है, इसलिए चुनाव में धांधली करके जीतते थे। अवामी लीग ने जुलाई और अगस्त 2024 में सारा समर्थन खो दिया लेकिन मुझे लगता है कि पुलिस और सिक्योरिटी की वजह से हुई मौतों से जनाधार कम नहीं हुआ। बल्कि अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और स्टूडेंट लीडर्स की हिंसा से उनका समर्थन खत्म हो गया है। हसीना के ऑर्डर पर हजारों लोग गायब कर दिए गए, हजारों की हत्या कर दी गई। हसीना सरकार धरती पर सबसे भ्रष्ट सरकार थी लेकिन उनकी पार्टी ने अब तक सॉरी नहीं कहा। हसीना भारतीय मीडिया को इंटरव्यू दे रहीं और अच्छी-अच्छी बातें कर रही हैं। सवाल: अगर शेख हसीना अवामी लीग पार्टी से अलग हो गईं तो क्या बैन हटाएंगे?
जवाब: ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल अभी इलेक्शन होने हैं। ……………… ये इंटरव्यू भी पढ़ें… ‘जिस देश ने हसीना को पनाह दी, वो दोस्त कैसे’ बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। पार्टी की कमान पूर्व PM खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
'हिंदू-बौद्ध-क्रिश्चियन काउंसिल हसीना के पालतू कुत्ते':यूनुस के एडवाइजर बोले- सेक्युलरिज्म हटेगा, शरिया नहीं आएगा; भारत हमें भूटान न समझे
📅 Published: February 6, 2026 |
📂 Category: Uncategorized
