पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस के एक कांस्टेबल को बड़ी राहत देते हुए 20 वर्ष पहले लगाई गई कठोर विभागीय सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पांच वेतन वृद्धियों की स्थायी रोक को अवैध ठहराते हुए न केवल सभी संबंधित आदेश खारिज कर दिए, बल्कि मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए राज्य सरकार को हर्जाना और एरियर ब्याज सहित देने के निर्देश भी जारी किए। अदालत ने इस मामले को विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और सतही कार्रवाई का स्पष्ट उदाहरण बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब जांच अधिकारी ने कर्मचारी को दोषी ही नहीं पाया, तो बिना किसी ठोस आधार के इतनी बड़ी सजा देना कानूनन गलत है। इन सभी कारणों से हाईकोर्ट ने अनुशासनिक, अपील और पुनरीक्षण—तीनों आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नरेश कुमार को 1.10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति 45 दिनों के भीतर दी जाए। साथ ही सजा रद्द होने के चलते देय सभी एरियर छह माह के भीतर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जारी किए जाएं। तय समय में भुगतान न होने पर ब्याज की दर 9 प्रतिशत वार्षिक होगी। फिर भी थोप दी गई सख्त सजा: इसके बावजूद पुलिस अधीक्षक ने 20 दिसंबर 2003 को कारण बताओ नोटिस जारी कर नरेश कुमार की पांच वेतन वृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी। इसके बाद दायर अपील और पुनरीक्षण याचिकाएं भी उच्च अधिकारियों ने बिना ठोस विचार किए खारिज कर दीं। क्या है मामला… याचिकाकर्ता नरेश कुमार ने 3 अक्टूबर 1989 को हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में सेवा ज्वाइन की थी। वर्ष 2002–03 के दौरान उनकी तैनाती पुलिस पोस्ट कलानौर में थी। इसी दौरान हेड कांस्टेबल जसवंत सिंह के साथ उनके संबंध बिगड़ गए। 11 अप्रैल 2003 को दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें नरेश कुमार की आंख में गंभीर चोट आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसके बाद नरेश कुमार पर वरिष्ठ अधिकारी से दुर्व्यवहार करने और ट्रांसफर के बावजूद सरकारी मोटरसाइकिल थाने से ले जाने जैसे आरोप लगाए गए। जांच में आरोप बेबुनियाद पाए गए इन आरोपों के आधार पर विभागीय जांच शुरू की गई। जांच के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड और लॉग बुक के आधार पर पाया कि सरकारी मोटरसाइकिल थाने में ही मौजूद थी और उसे ले जाने का आरोप गलत है। मेडिकल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह भी स्पष्ट हुआ कि झगड़े में चोट नरेश कुमार को लगी थी। जांच अधिकारी ने यहां तक कहा कि मोटरसाइकिल ले जाने की शिकायत हेड कांस्टेबल द्वारा खुद को बचाने के लिए दर्ज कराई गई प्रतीत होती है। इन तथ्यों के आधार पर जांच अधिकारी ने नरेश कुमार को दोनों मुख्य आरोपों से निर्दोष बताया और उलटे हेड कांस्टेबल की भूमिका पर सवाल उठाए।
20 साल बाद इंसाफ; पुलिस कांस्टेबल पर लगी कठोर सजा रद्द कोर्ट ने कहा-जांच में दोषी न मिलने पर सजा देना कानूनन गलत
📅 Published: January 18, 2026 |
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