जनपद में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत अब तक 26.99 लाख मतदाताओं में से केवल 1.20 लाख मतदाताओं का ही डिजिटल डेटा ऑनलाइन अपलोड हो पाया है। जिला प्रशासन ने गणना प्रपत्रों को 20 नवंबर तक भरकर वापस मांगा है, लेकिन बड़ी संख्या में मतदाताओं तक अभी तक ये प्रपत्र पहुंचे ही नहीं हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो मतदाता समय पर प्रपत्र भरकर वापस नहीं देंगे, उनका नाम मतदाता सूची से काटा जा सकता है। 19 नवंबर की शाम तक प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर केवल 1.20 लाख प्रपत्र ही फीड हो सके थे, जो कुल मतदाताओं की संख्या का एक छोटा हिस्सा है। जनपद में कुल सात विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें 26.99 लाख मतदाता दर्ज हैं। इन मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाने के लिए जनपद के 2758 बूथों पर 2758 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) तैनात किए गए हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी प्रशासन सत्यप्रकाश सिंह ने दावा किया है कि 99 प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित कर दिए गए हैं। हालांकि, वितरण के दावों के बावजूद प्रपत्रों की वापसी की दर चिंताजनक है। प्राप्त हुए भरे हुए प्रपत्रों को बीएलओ अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटलाइज्ड कर रहे हैं। मतदाताओं को अपने बूथ के बीएलओ से संपर्क करने, एसआईआर (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) से संबंधित जानकारी प्राप्त करने और गणना प्रपत्र मंगवाने के लिए चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट पर फोन कॉल बुक करने की सुविधा दी है। इस सुविधा का उपयोग अब तक 1443 मतदाताओं ने किया है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने कुछ विशेष निर्देश भी दिए हैं। जिन मतदाताओं के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उन्हें अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी के वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज विवरण उपलब्ध कराना होगा। इसी प्रकार, जिन युवतियों की शादी वर्ष 2003 के बाद हुई है, उन्हें गणना प्रपत्र में अपने पिता के वर्ष 2003 के विवरण को दर्ज करना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक मतदाता केवल एक स्थान से ही गणना प्रपत्र भरसकता है।
27 में से 1.20 लाख मतदाता का ही डेटा अपलोड:मेरठ में निर्वाचन अधिकारी ने समय पर फार्म भरने के दिए निर्देश
📅 Published: November 21, 2025 |
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