5 रूपये की फैवीक्विक से 2000 के ग्लू का काम:मेडिकल एक्सपर्ट्स बोले-बहुत बड़ी लापरवाही की गई, बॉडी में फैल सकता था इंफेक्शन

📅 Published: November 20, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

मेरठ में ढाई साल के बच्चे को आंख के ऊपर लगी चोट पर भाग्यश्री अस्पताल के स्टाफ ने घाव को साफ किए बिना ही मरीज के पिता से ही 5 रूपये की फैवीक्विक मंगाकर उस से बंद कर दिया। इससे बच्चे को लगभग 12 घंटे तक असहनीय दर्द हुआ। इसके बाद परिजन बच्चे को लोकप्रिय हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां लगभग तीन घंटे तक इलाज के बाद उसके घाव को खोलकर फैवीक्विक के कण हटाकर टांके लगाए। इतना ही नहीं परिजनों ने जब अस्पताल में इस लापरवाही की शिकायत की तो अस्पताल के स्टाफ ने हमसे बहस मत करो ऐसा कहकर भेज दिया। इसके बाद बच्चे के पिता ने सीएमओ से शिकायत की है। अब पढ़ते हैं इस प्रकरण को लेकर क्या बोले विशेषज्ञ डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ भानू प्रताप ने बताया कि आमतौर पर प्लास्टिक सर्जरी में मेडिकल ग्लु का इस्तेमाल वहां किया जाता है जहां सिर्फ त्वचा में कट हो न की कोई गहरा घाव। मेडिकल ग्लु आमतौर पर ब्यूटाइल साइनोएक्रिलेट या ओक्टाइल साइनोएक्रिलेट से बने होते हैं वहीं फैवीक्विक में इथाइल साइनोएक्रिलेट होता है। मेडिकल में इसे इस्तेमाल करने का कोई मतलब नहीं है। यह घाव को जला भी सकता है और अगर इसे गहरे घाव में लगा दिया जाए तो यह चोट को ठीक नहीं होने देगा क्योंकि घाव हमेशा अंदर से ही भरता है। जनरल सर्जरी या आम चोटों में इसका प्रयोग नहीं होता है। आमतौर पर जो ग्लु आता है वो 1500 रूपये तक का आता है लोग सस्ते के चक्कर में भी फैवीक्विक का इस्तेमाल कर लेते हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि ऐसा पदार्थ की एक बूंद भी अगर आंख में चली जाए तो खुजली, लालीपन, एलर्जी या जख्म भी कर सकता है। अगर आंख के अंदर की काली पुतली उसके संपर्क में आ जाए तो बच्चे की रोशनी भी प्रभावित हो सकती थी। इसे ज्वलनशील पदार्थों में माना जाता है इसलिए त्वचा और आंख के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है। जनरल सर्जन डॉ धीरज राज बालियान ने बताया कि फैवीक्विक में इंडस्ट्रियल केमिकल इस्तेमाल किया जाता है जो त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं होते हैं। अगर बिना घाव भी फैवीक्विक गलती से त्वचा पर कहीं लग जाती है तो भी वह त्वचा को प्रभावित करता है । इस प्रकार की लापरवाही सीधे तौर पर बच्चे की जान से खिलवाड़ है। आमतौर पर विशेषज्ञ या सर्जन द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है उसमे भी इस्तेमाल का मानकों के साथ एक तरीका होता है बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अनुपमा वर्मा ने बताया कि बच्चे की त्वचा बहुत ही नाजुक होती है और चेहरे की त्वचा शरीर के मुकाबले और भी संवेदनशील होती है। फैवीक्विक जैसी चीजों में ज्वलनशील पदार्थ होते हैं। ऐसे में घाव को तो नुकसान होता ही है और इसके साथ साथ आसपास की त्वचा भी जल सकती है। क्योंकि आंख के पास का घाव है तो वह आंख को भी प्रभावित कर सकता था। स्टाफ के कारण बच्चे को और भी बड़ी समस्या हो सकती है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ अंकिता चिकारा ने बताया कि फैवीक्विक हमारी त्वचा के अंदर मौजूद शुक्राणुओं को मार सकता है। इसके इस्तेमाल से एलर्जी या अन्य समस्या भी हो सकती हैं। कई बार इस कारण जो पपड़ी नुमा परत बन जाती है उसे हटाते समय भी त्वचा के खिंचने के कारण खून निकल जाता है। मेडिकल ग्लु के मानक अलग होते हैं इसलिए इसका इस्तेमाल करना त्वचा के लिए बेहद खतरनाक है। पूरी घटना पर क्या बोले सीएमओ मेरठ के सीएमओ डॉ अशाेक कटारिया ने बताया कि कुछ त्वचा संबंधित घाव में ग्लू का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन वह घाव अलग ब्लू होता है। भाग्यश्री हॉस्पिटल में फैवीक्विक से घाव बंद करने की शिकायत मिली है। उसके लिए दो सदस्यों की जांच टीम गठित कर दी गई है, दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घाव पर ग्लू लगाने से बच्चे को हो सकते थे ये 5 नुकसान – अगर घाव गहरा है तो वह कभी भी भरेगा नहीं। इस तरह सेप्टिक धीरे-धीरे बढ़ता जाता और पूरी बॉडी में फैल जाता। – सेप्टिक फैलने के कारण जान भी जा सकती है। क्योंकि बच्चे को टिटनेस का प्रिक्योर वैक्सीनेशन भी नहीं किया गया। – घाव में जलन हो सकती थी, घाव के आसपास का एरिया भी जल सकता था। – बाद में फैवीक्विक हटाते समय त्वचा फट सकती है – सबसे बड़ा खतरा बच्चे की आंखों को होता, उसकी आंखों की रोशनी भी जा सकती थी।

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