AMU में दिया वसुधैव कुटुंबकम का संदेश:पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बोले- दुनिया को अब भारतीय सभ्यता से सीखनी होगी डिप्लोमेसी

📅 Published: February 14, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

AMU में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। तीन दिवसीय सम्मेलन ‘डिकोलोनाइजिंग ए डिसिप्लिन, भारत की सभ्यतागत दृष्टि और वैश्विक अंतरराष्ट्रीय संबंध’ पर उन्होंने अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि अब दुनिया को पश्चिमी चश्मे के बजाय भारतीय नजरिए से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को समझना होगा। ​वसुधैव कुटुंबकम और नई वैश्विक दृष्टि ​राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का आदर्श वाक्य वसुधैव कुटुंबकम केवल एक विचार नहीं, बल्कि वैश्विक शांति का ठोस आधार है। उन्होंने वि-उपनिवेशीकरण पर कहा कि भारत अपनी खोई हुई गरिमा को पुनः प्राप्त कर रहा है। उन्होंने भारत को मानव जाति की जन्मभूमि और इतिहास की जननी बताया। ​कौटिल्य की नीति और पीएम मोदी का संदेश ​डॉ. बोस ने आचार्य कौटिल्य की षाड्गुण्य नीति (विदेश नीति के छह उपाय) का जिक्र करते हुए इसे आज के दौर में भी सबसे संतुलित ढांचा करार दिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने मैकॉले की शिक्षा नीति द्वारा थोपी गई औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागकर भारतीय मूल्यों पर गर्व करने का आह्वान किया। कुलपति प्रो. नइमा खातून को मिलेगा वंदे मातरम सम्मान राज्यपाल ने कुलपति प्रो. नइमा खातून को शैक्षणिक नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण के लिए वंदे मातरम उत्कृष्टता पुरस्कार देने की घोषणा की। इस सम्मान के तहत उन्हें 1 लाख रुपए की राशि, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। कुलपति ने अपने संबोधन में अकबर की सुलह-ए-कुल नीति और भारतीय परंपराओं के सह-अस्तित्व के संदेश को एएमयू की मूल भावना बताया। नो कमेंट्स ऑन बांग्लादेश ​जब पश्चिम बंगाल से सटे बांग्लादेश के हालातों पर सवाल पूछा तो राज्यपाल ने सधे हुए अंदाज में गेंद केंद्र के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का मुद्दा विदेश नीति का हिस्सा है। राज्यपाल होने के नाते वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। 251 में से चुने गए 150 पेपर ​सम्मेलन के संयोजक प्रो. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि आयोजन के लिए देशभर से 251 शोध पत्र प्राप्त हुए थे। इनमें से कड़ी समीक्षा के बाद 150 का चयन किया गया है। इन्हें भविष्य में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। कार्यक्रम कासंचालन डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी ने किया। अंत में सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

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